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नासा ने नये सैटेलाइट से खोजा नये अनजाने जीवन का नया ठिकाना




  • पृथ्वी से 53 प्रकाश वर्ष दूर स्थित यह यह इलाका

  • इसमें जीवन पृथ्वी के जैसा नहीं होगा

  • 7.8 दिन में काट लेता है एक चक्कर

  • आकार में पृथ्वी के जितना ही बड़ा

प्रतिनिधि

नईदिल्लीः नासा के वैज्ञानिकों ने एक और ऐसा ठिकाना खोजा है, जहां जीवन के उम्मीद है।

लेकिन प्रारंभिक खोज के दौरान ही वैज्ञानिकों ने यह भी साफ कर दिया है कि

अगर वहां जीवन है तो वह पृथ्वी के जैसा तो कतई नहीं होगा।

यानी यह परग्रहियों (एलियनों) का ठिकाना भी हो सकता है।

जिस इलाके की पहचान इसके लिए की गयी है, वह एक तारा एचडी 21749 के चारों तरफ चक्कर काट रहा है।

इसका आकार भी लगभग पृथ्वी के जैसा ही है।

वैज्ञानिक यह मान रहे हैं कि किसी तारे के पास होने की वजह से वहां पृथ्वी के जैसा जीवन संभव नहीं है।

नासा के खास सर्वेक्षण सैटेलाइट टीइएसएस के माध्यम से इस ठिकाने का पता चला है।

अनुमान के मुताबिक यह पृथ्वी से करीब 53 प्रकाश वर्ष की दूरी पर है।

जिस तारा का यह चक्कर काट रहा है, वह भी आकार में सूर्य के करीब 80 प्रतिशत जितना है।

तारे के काफी करीब से यह ग्रह चक्कर काट रहा है।

नासा का यह सैटेलाइट पूरे अंतरिक्ष में हमारे सौर मंडल के बाहर की गतिविधियों पर भी लगातार नजर बनाये रखता है।

वहीं से प्राप्त आंकड़ों के आधार पर इस नये इलाके की पहचान और उसका विश्लेषण किया गया है।

नासा का टेस कैसे काम करता है देखें वीडियो

नासा के वैज्ञानिकों ने बताया है कि यह टेस (टीइएसएस) पिछले एक साल से काम कर रहा है।

लेकिन यह अपनी तकनीक की वजह से पहले से कार्यरत कैप्लर स्पेस टेलीस्कोप के मुकाबल बेहतर सूचनाएं प्रेषित कर रहा है।

कैप्लर ने अपने अभियान के तहत करीब ढाई हजार तारों और ग्रहों का पता लगाया है।

कैप्लर की यह खोज अब तक की खोज का सत्तर फीसद है।

अब नासा मान रही है कि यह टेस उसे पीछे छोड़ देने वाला है।

जिस नये तारे के ग्रह का पता लगाया गया है वह अपने तारे का एक चक्कर पृथ्वी के 7.8 दिन के समय में काट लेता है।

लेकिन यह तारा चूंकि गर्म तारा है इसलिए तारे के अंदर तो जीवन की कोई संभावना नहीं है।

इसलिए उसके पास के इस ग्रह को जीवन के लायक समझा जा रहा है।

इसका पता चलने के बाद उसके बारे में प्राप्त अन्य तमाम आंकड़ों का गहन विश्लेषण भी प्रारंभ कर दिया गया है।

इन आंकडों के विश्लेषण के बाद ही इस नये इलाके के बारे में कुछ और नई जानकारी भी मिल सकती है।

वैज्ञानिक इस बात को लेकर भी खुश हैं कि इस उपकरण को कुछ इस तरीके से डिजाइन किया गया है कि

यह भविष्य में काम आने वाले जेम्स वेब स्पेस टेलीस्कोप से भी अपना तालमेल बैठा लेगा

और अंतरिक्ष की अन्य बारिक जानकारियों को भी पकड़ सकेगा.

इससे खुली आंखों से अदृश्य रहने वाले उन इलाकों के बारे में भी जानकारी मिलेगी,

जहां जीवन की संभावनाएं हो सकती हैं।

दरअसल अब वैज्ञानिक खास तौर पर उन इलाकों की पहचान करना चाह रहे हैं,

जहां की संरचना बिल्कुल पृथ्वी के जैसा किसी वायुमंडल से घिरी हुई हो

ताकि ऐसी स्थिति में किसी भी विकिरण के प्रभाव से मुक्त इस इलाके में जीवन की संभावनाओं की तलाश की जा सके।



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