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राफेल विमान सौदे पर फिर एन राम ने बरसाये खबर बम




  • अनिल की कंपनी को टैक्स छूट का भी फायदा

  • फाइल फोटो राफेल विमान सौदा

  • एन राम ने बताया कैसे दी गयी छूट

  • फ्रांस के अखबार ने भी छापी रिपोर्ट

  • रक्षा मंत्रालय और रिलायंस ने किया खंडन

प्रतिनिधि

नईदिल्लीः राफेल विमान सौदे पर प्रसिद्ध पत्रकार और अंग्रेजी दैनिक द हिन्दू

के सम्पादक एन राम ने फिर से गोले बरसाये हैं।




इस बार उनकी रिपोर्ट में यह कहा गया है कि इस विमान सौदे के क्रम में

अनिल अंबानी की कंपनी को कर की छूट का लाभ भी दिया गया है।

रिपोर्ट के मुताबिक इस कंपनी को कुल 143.7 मिलियन यूरो के टैक्स भुगतान की छूट मिली है।

दरअसल फ्रांस की एक समाचार पत्र ली मनडे ने इसका खुलासा भी किया है।

इस खबर के प्रकाशित होने के बाद रक्षा मंत्रालय ने आनन फानन में इसका खंडन किया है

और कहा है कि कर में दी गयी छूट का राफेल सौदे के साथ कोई लेना देना ही नहीं है।

फ्रांस में पंजीकृत अनिल अंबनी की टेलीकॉम कंपनी को स्थानीय अधिकारियों ने कर में भुगतान की यह छूट दी है।

यह छूट राफेल विमान सौदे की घोषणा के बाद ही दी गयी है।

इससे पूर्व फ्रांस क सरकार अनिल अंबानी की कंपनी के कर भुगतान के मामले की जांच कर चुकी थी।

सरकारी एजेंसियों ने साफ कर दिया था कि इस कंपनी पर सरकार का साठ मिलियन

यूरो की देनदारी बनती है।

यह देनदारी वर्ष 2007 से वर्ष 2010 के बीच की थी।

खबर के मुताबिक रिलायंस ने इस मुद्दे को सुलझाने के लिए समझौते का प्रस्ताव भी दिया था।

जिसमें 7.6 मिलियन यूरो देन की बात कही गयी थी। फ्रांस सरकार ने इस प्रस्ताव को नामंजूर कर दिया था।

इस बीच अगले दो वर्षों का 91 मिलियन यूरो की देनदारी इसमें और जोड़ दी गयी।

राफेल सौदा होने के बाद ही माफ की गयी देनदारीराफेल विमान सौदे पर फिर एन राम ने बरसाये खबर बम




अप्रैल 2015 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पेरिस गये थे।

इसी दौरान उन्होंने अचानक ही 36 राफेल लड़ाकू विमान खरीदने की घोषणा कर दी।

इसके लिए उन्होंने भारतीय वायुसेना की अत्यावश्यक जरूरतों का उल्लेख भी किया था।

प्रधानमंत्री की इस घोषणा के समय तक रिलायंस पर टैक्स की देनदारी 151 मिलियन यूरो हो चुकी थी।

राफेल सौदा होने के छह महीने के भीतर फ्रांस ने इस देनदारी को माफ करते हुए 7.3 मिलियन यूरो लेकर ही समझौता कर लिया।

इससे राफेल विमान के ऑफ सेट पार्टनर बनाये गये अनिल अंबानी को कर में छूट का भारी लाभ भी दिया गया।

इस खबर के आने के बाद रिलायंस कम्युनिकेशंस ने एक बयान जारी कर कहा है कि

उसे कोई अतिरिक्त फायदा नहीं पहुंचाया गया है ।

दरअसल करों का जो दावा किया गया था वह गलत था,

जिसे बाद में कानून के दायरे में अपील कर सुधारा गया है।

रक्षा मंत्रालय ने बयान जारी कर कहा है कि राफेल विमान सौदे के क्रम में

किसी को कोई कर भुगतान की छूट नहीं मिली है।

और अगर मिली भी है तो उसका राफेल विमान सौदे से कुछ लेना देना नहीं है।



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