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अंतरिक्ष में ज्यादा समय रहना कोई कम खतरे से खाली नहीं




  • स्कॉट कैली के शरीर में हुए जेनेटिक बदलाव

  • सबसे अधिक दिनों तक अंतरिक्ष में रहने वाले अमेरिकी

  • उनका जुड़वा मार्क कैली पृथ्वी पर मौजूद रहा

  • लौटने के बाद 1400 जीनों में बदलाव दर्ज हुआ

प्रतिनिधि

नईदिल्लीः अंतरिक्ष में रहना आपके शरीर पर नकारात्मक प्रभाव भी डालता है।

पहली बार वैज्ञानिक जांच में इस बात की पुष्टि तब हो पायी जब स्कॉट कैली को एक साल तक अंतरिक्ष में रहना पड़ा।

स्कॉट वहां के अंतरिक्ष स्पेस स्टेशन पर अनुसंधान कर रहे थे।

उनकी विशेषता यह है कि उनका जुड़वा भाई मार्क था।

जेनेटिक तौर पर दोनों में लगभग एक जैसे गुण थे।

दोनों के जिनोम के नमूने वैज्ञानिकों के पास पहले से ही मौजूद थे।

अब लौटे तो चिकित्सीय जांच में स्कॉट के जेनेटिक्स में हुए बदलावों को दर्ज किया जा सका है।

इसका पता चलने के बाद अब वैज्ञानिक इस अनुसंधान में जुटे हैं कि

अंतरिक्ष में कितना समय बीताने का शरीर पर क्या क्या और कितना प्रभाव पड़ता है।

वैसे इस शोध की जानकारी देने के साथ साथ वैज्ञानिकों ने यह भी स्पष्ट कर दिया है कि

पृथ्वी पर लौट आने के कुछ दिनों के बाद स्कॉट के शरीर के अंदर जो बदलाव दर्ज किये गये थे, वे अपने आप ही समाप्त हो गये हैं।

इससे नई बात यह निकलकर सामने आयी है कि पृथ्वी का जलवायु और गुरुत्वाकर्षण भी हमारे शरीर की आंतरिक संरचना पर प्रभाव डालते हैं।

अंतरिक्ष में अन्य बातों के साथ अकेलापन भी कष्ट देता है

इस शोध को पूरा कर वैज्ञानिक यह समझने की कोशिश कर रहे हैं कि मंगल

और उससे आगे की लंबी अंतरिक्ष यात्रा का अंतरिक्ष यात्रियों के शरीर के आंतरिक संरचना पर क्या प्रभाव पड़ सकता है ।

अंतरिक्ष स्पेस स्टेशन पर 340 दिन रहने वाले स्कॉट ने सबसे अधिक समय तक अंतरिक्ष में रहने वाले अमेरिकी होने का रिकार्ड बनाया है।

इस दौरान उन्हें अंतरिक्ष की हर किस्म की चुनौतियों का हर पल सामना करना पड़ा है।

वह खुद स्वीकार करते हैं कि विकिरण, बिना वजन का महसूस करना, अजीब किस्म का भोजन

और सोने के समय की गड़बड़ी के साथ साथ वहां बिल्कुल अकेला होना भी अपने आप में कठिन चुनौती होती है।

स्कॉट और उसके जुड़वा भाई मार्क के हर नमूनों की निरंतर जांच की जाती रही।

अंतरिक्ष में जाने के पहले दोनों लगभग एक जैसे थे।

अंतरिक्ष में रहे तो बदल गये शरीर के जीनों के आचरणअंतरिक्ष में ज्यादा समय रहना कोई कम खतरे से खाली नहीं




लेकिन अंतरिक्ष से लौटन के बाद स्कॉट के शरीर में काफी कुछ बदलाव दर्ज किया गया।

वैसे भारशून्यता से सीधे पृथ्वी के गुरुत्वाकर्षण के अंदर आना भी अपने आप में एक कठिन चुनौती होती है

क्योंकि इतने दिनों तक शरीर को जिसकी आदत पड़ गयी हो, उससे एकाएक बाहर आने पर कई बदलाव होते हैं।

जांच में वैज्ञानिकों ने पाया है कि अंतरिक्ष में रहने की वज से दुबले हो चुके स्कॉट के शरीर के अंदर भी ढेर सारे बदलाव हो चुके थे।

इनमें से उसकी आंखों की रेटिना का मोटा होना, सीने के कार्टोयड आर्टरी का मोटा होना भी शामिल है।

सबसे बड़ी बात यह देखी गयी कि अंतरिक्ष में होते वक्त उसके शरीर में मौजूद जीनों में से

करीब 14 सौ जीनों का आचरण पृथ्वी से बिल्कुल भिन्न हो गया था।

यह बदलाव स्कॉट के अंतरिक्ष में रहने के साथ साथ बढ़ता ही चला गया था।

इसलिए जब वह पृथ्वी पर लौटे तो इन जीनों को भी सामान्य अवस्था मैं लौट आने में करीब छह महीने का वक्त लगा।

लेकिन इतने दिनों के बीच भी करीब 9 प्रतिशत जीन अब तक पूर्व स्थिति में नहीं लौट पाये थे।

कुछ वैज्ञानिक मान रहे हैं कि यह शायद अंतरिक्ष में लगातार विकिरण को झेलने का प्रभाव भी हो सकता है।

लेकिन इसमें अभी कोई पक्की राय नहीं बनी है ।



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