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14 हजार साल पुराने अवशेष को लेकर वैज्ञानिकों में मतभेद

  • कुत्ता है या भेड़िया है, इसकी जांच जारी है

  • लगभग सही सलामत हालत में मिला अवशेष

  • शीतकाल का प्राणी अब तक पृथ्वी पर जीवित था

  • बड़े आकार के प्राणी को खुद नहीं मार सकता था वह

प्रतिनिधि

नईदिल्लीः 14 हजार साल पुराने एक फॉसिल के मिलने के बाद यह दरअसल कौन सा

जानवर है, यह तय नहीं हो पा रहा है। रुस के साइबेरिया क्षेत्र के तुमाट इलाके से यह

फॉसिल मिली थी। आकार को देखकर पहले यह अनुमान लगाया गया था कि यह शायद

कोई पालतू कुत्ता रहा होगा। लेकिन जब आगे इसकी जांच की गयी तो वैज्ञानिक इसकी

संरचना को लेकर खुद ही चकरा गये। कुछ लोगों का मानना है कि यह दरअसल प्राचीन

काल का कुत्ता नहीं बल्कि एक भेड़िया है।

रोएंदार इस  जीव के अवशेष के विश्लेषण से उसके पेट से बालों का जो गुच्छा मिला है, वह

भी जांच कर्ताओं को और हैरान करने वाला है। आम तौर पर इतने सुरक्षित अवस्था में

प्राणियों के फॉसिल आम तौर पर नहीं मिलते हैं। समय के साथ साथ उनका काफी कुछ

नष्ट हो जाता है। लेकिन शून्य से नीचे के तापमान में होने की वजह से इस अवशेष को

कोई खास नुकसान नहीं पहुंचा है। वैज्ञानिकों ने जब इसकी गहन जांच की तो उसके पेट से

बालों का एक बड़ा गुच्छा पाया गया। बालों का यह गुच्छा हलेक पीले रंग का था। इस वजह

से ऐसा समझा गया था कि यह शायद किसी छोटे आकार की बिल्ली अथवा किसी अन्य

जानवर का होगा। लेकिन जांच में यह आकलन गलत प्रमाणित हुआ। स्टॉकहोल्म नेचुरल

हिस्ट्री म्युजियम के विशेषज्ञों ने यह पाया कि बालों में जो डीएनए मौजूद है वह ऐसी किसी

प्रजाति का नहीं है। इस शोध से जुड़े विशेषज्ञ लव डॉलेन ने कहा कि सारे आंकड़ों की जांच

से डीएनए के आधार पर यह पाया गया कि बालों का यह गुच्छा दरअसल उस काल के

रोएंदार राइनो का है। अब राइनो को इस जीव ने कैसा खाया होगा, इसे समझने की

कोशिश चल रही है।

14 हजार साल पुराना होने की पुष्टि कार्बन डेटिंग से

इस अनुसंधान से स्टॉकहोल्म के साथ साथ स्वीडिश म्युजियम ऑफ नेचुरल हिस्ट्री के

वैज्ञानिक भी जुड़े हुए थे। इन्होंने भी इसकी पुष्टि की है।  इस एक तथ्य ने कई नये सवाल

खड़े कर दिये हैं। गंभीर मसला यह है कि रोएंदार राइनो इस धरती पर पृथ्वी के शीतकाल

के दौरान हुआ करता था। दूसरी तरफ जिस प्राणी का अवशेष पाया गया है वह करीब 14

हजार साल पुराना है। इसी वजह से वैज्ञानिकों ने पेट से पाये गये हिस्सों की कार्बन डेटिंग

भी की तो पता चला कि यह राइनो भी 14 हजार साल पुराना ही है। यानी अति प्राचीन काल

का यह प्राणी किसी तरह इस युग में भी जीवित था। अब माना  जा रहा है कि किसी तरह

उस रोएंदार राइनो के शरीर के किसी हिस्से को इस प्राणी ने अपना ग्रास बनाया होगा।

शीतकाल का प्राणी भी इस दौर तक जीवित था

सेंटर फॉर पेलियोजेनेटिक्स से जुड़े शोधकर्ता एडेना लॉर्ड ने कहा कि रोएंदार राइनो का

आकार भी आज के दौर के राइनो के जितना ही होता था। इसलिए यह नहीं पाया जा

सकता कि कुत्ते के आकार के इस प्राणी ने अपने बलबूते पर इतने बड़े प्राणी का शिकार

किया होगा। दूसरी तरफ वैज्ञानिक इस तथ्य को जानकर भी हैरान है कि इस प्राणी का

एक हिस्सा खाने के तुरंत बाद ही यह जानवर भी मर गया था क्योंकि उसके पेट में भोजन

के अंश बचे हुए थे। शायद किसी मरे हुए राइनो के शरीर के हिस्से को ही इसने अपना

भोजन बनाया होगा। लेकिन अभी इस प्राणी के बारे में अंतिम निष्कर्ष निकाला जाना शेष

है क्योंकि लगभग सही सलामत अवस्था में पाये गये इस फॉसिल के बारे में और

अनुसंधान अभी जारी हैं। सिर्फ वैज्ञानिक यह मानते हैं कि शायद यह पिल्ला अपने समूह

के साथ किसी को भोजन बना चुका था। भोजन करने के दौरान ही किसी अन्य प्राणी

शायद रोएंदार राइनो की मां अथवा दूसरे प्राणियों ने उनपर हमला कर दिया था,  जिसमें

यह पिल्ला मारा गया था


 

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