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कसमार प्रखंड के महज दो दिन में ही कोरोना पॉजिटिव से नेगेटिव हो गये 120 मरीज

  • स्वास्थ्य विभाग की मनमानी और लापरवाही से ग्रामीणों में आक्रोश

बोकारो/कसमार: कसमार प्रखंड के हिसीम पंचायत अंतर्गत खुदीबेड़ा गांव के 12 कोरोना

पोजिटिव मरीज महज दो ही दिन में नेगेटिव हो गये और उन्हें नेगेटिव मानकर घर भी

भेज दिया गया। अब चिकित्सकों ने 48 घंटे में ही इन मरीजों को किस तरह ईलाज कर

नेगेटिव से पाजिटिव किया ये स्वास्थ्य कर्मी ही जाने। बता दें कि पिछले 25 सितंबर को

स्वास्थ्य उप केंद्र खुदीबेड़ा के निकट आंगनबाड़ी केंद्र में कोरोना जांच शिविर का आयोजन

किया गया था। जिसमें तीन अक्टूबर को आये रिपोर्ट में खुदीबेड़ा गांव के ही 18 लोगों

रिपोर्ट पॉजिटिव मिला था। 12 लोगों को स्वास्थ्य विभाग द्वारा तीन अक्टूबर को ही शाम

को उठाकर सदर अस्पताल स्थित कोविड वार्ड में भर्ती कराया गया था। बाकी नहीं गए थे,

लेकिन पांच अक्टूबर शाम को ही सभी 12 मरीजों को नेगेटिव बता कर कोविड वार्ड से

बाहर कर दिया। मरीजों ने बताया कि उन्हें शाम को करीब 6 बजे अस्पताल से बाहर कर

दिया गया।

 कसमार में वाहन की कोई सुविधा नहीं थी और नहीं पास पैसे थे

अब कैसे 50 किलोमीटर दूर स्थित अपने घर पहुंचे इसकी जिम्मेवारी किसी ने नहीं लिया।

वे तीन घंटे प्रतीक्षा करने के बाद किसी ऑटो चालक से बात किया। जिसमें घर जाकर

किराया देने पर मनाया। दो ऑटो के माध्यम से आ खुदीबेडा स्थित घर पहुंच कर मरीजों

ने किसी तरह ऑटो चालक को 36 सौ का भुगतान किया। 35 वर्षीय अखिलेश्वर महतो, 23

वर्षीय विश्वनाथ महतो, 40 वर्षीय भवानी शंकर महतो, 68 वर्षीय वासुदेव महतो,

32 वर्षीय नमिता देवी, 60 वर्षीय मंजू देवी, 45 वर्षीय प्रभा देवी, 32 वर्षीय मुन्नी देवी, 50

वर्षीय सती देवी, 13 वर्षीय शिवानी कुमारी, 60 वर्षीय किरण देवी तथा 30 वर्षीय मंजू देवी

को पॉजिटिव का कर ले गया था। जिन्हें दो ही दिन बाद नेगेटिव 48 घंटे बाद नेगेटिव

बताकर कोविड सेंटर ले जाया गया। मरीजों ने बताया कि प्रशासन द्वारा धमकी देकर

जबरन वाहन में बैठाकर बोकारो ले जाया गया था। इन मरीजों ने बताया कि कोविड-19

उन्हें भरपेट भोजन भी नहीं दिया गया। खुदीबेड़ा के ग्रामीणों ने बताया कि खुद ही बड़ा में

कोरोनावायरस के डर से अन्य ग्रामीणों को भी खैराचातर बाजार में राशन आदि समान के

साथ बाजार में बैठने भी नहीं दिया जा रहा था। खुद ही बेड़ा के ग्रामीणों को खैराचातर के

व्यवसायियों द्वारा नीच दृष्टि से देखा जा रहा था। ग्रामीणों का कहना था कि सहिया

नमिता कुमारी द्वारा प्रशासन का दोष दिखाकर जबरन मरीजों को वाहन पर चढ़ाया था।

जिप सदस्य जगदीश महतो एवं इसी मुखिया प्रतिनिधि फनिंदर मुंडा ने स्वास्थ्य विभाग

की कार्यशैली से नाखुश हैं। उन्होंने स्वास्थ्य विभाग पर लापरवाही का आरोप लगाया है।

ऐसा स्थिति रहती है तो लोग कोरोना जांच कराने में हिचकिचायेगें। आगे भी इस तरह का

गलती ना करें।


 

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