हरियाली के बीच बढ़े बच्चों की मानसिक शक्ति अधिक

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  • मानसिक स्वास्थ्य पर नये शोध से निकला बिल्कुल नया निष्कर्ष

  • डेनमार्क के विश्वविद्यालय ने किया है शोध

  • नौ लाख लोगों के तमाम आंकड़े जुटाये गये

  • ऐसे बच्चे अधिक समय तक तदरुस्त रहते हैं

प्रतिनिधि

नईदिल्लीः हरियाली वैसे भी पर्यावरण के लिए बेहद जरूरी है।

लेकिन पहली बार यह पता चला है कि बच्चों के मानसिक विकास में भी

इसकी प्रवल भूमिका होती है।

नेशनल अकाडेमी ऑफ साइंस में प्रकाशित एक शोध प्रबंध में इस बात की जानकारी दी गयी है।

यह शोध डेनमार्क के आराहुस विश्वविद्यालय के शोध कर्ताओं ने किया है।

विभिन्न किस्म के आचरण और मानसिक स्वास्थ्य के पीछे के कारणों का

विश्लेषण करने के बाद वैज्ञानिक इस नतीजे पर पहुंचे हैं कि जिन बच्चों की

परवरिश हरियाली में अथवा जो नियमित तौर पर हरियाली से भरे पार्कों में

घूमने जाते हैं, उनका मानसिक स्वास्थ्य अधिक आयु में भी

दूसरों के मुकाबले अधिक बेहतर रहता है।

वैज्ञानिक इस नतीजे पर भी पहुंचे हैं कि जो बच्चे इस माहौल में पले बढ़े होते हैं,

उनका विकास भी अधिक प्रसन्नचित्त मनुष् के तौर पर होता है।

साथ ही वे अधिक उम्र तक अधिक क्रियाशील बने रहते हैं।

शोधकर्ताओं ने पाया है कि हरियाली के बीच रहने वाले बच्चों को

युवावस्था में पहुंचने के दौरान भी मानसिक शक्ति अधिक होती है।

इसलिए वे इस आयु की मानसिक चुनौतियों का बेहतर तरीके से सामना कर पाते हैं।

दूसरी तरफ जो बच्चे इन सुविधाओं से वंचित होकर बड़े होते हैं,

उनके लिए मानसिक चुनौतियां अधिक होती हैं।

ऐसे बच्चों में अधिक उम्र में मानसिक विकार होने का खतरा अधिक होता है।

इस निष्कर्ष पर पहुंचने के लिए शोध दल ने करीब नौ लाख लोगों के आंकड़ों को एकत्रित करने के बाद एक एक कर उनका विश्लेषण किया है।

यह पाया गया है कि जो बच्चे हरियाली के बीच बड़े नहीं होते हैं, उनमें अधिक उम्र में मानसिक अवसाद से पीड़ित होने का खतरा करीब 55 प्रतिशत अधिक रहता है।

इसलिए इस निष्कर्ष को गंभीरता से लिया जा रहा है।

क्योंकि इसमें आंकड़ों की तादात काफी अधिक है।

इस निष्कर्ष में हरियाली को स्वास्थ्य संबंधी बेहतरी में बीमारी और लंबे समय तक ईलाज के खर्च का बचाव का भी मुख्य कारण बताया गया है।

शोध के दायरे में सामाजिक और आर्थिक मुद्दों को भी शामिल किया गया था।

जबकि बच्चों के माता पिता की मानसिक और शारीरिक स्थिति और उम्र को भी इस निष्कर्ष के शोध में रखा गया था।

इन तमाम मुद्दों को मिलाकर जब निष्कर्ष निकाला गया तो हरियाली के साथ बच्चों के बेहतर विकास का यह रिश्ता खुलकर सामने आया है।

दूसरी बात यह है कि हरियाली के बीच बचपन गुजारने की वजह से ऐसे बच्चे प्राकृतिक तौर पर पर्यावरण प्रेमी भी होते हैं।

लिहाजा वे किसी भी शहरी विकास की योजना में हर वक्त हरियाली पर पूरा ध्यान देते हैं।

शोध में बताया गया है कि अनेक प्रमुख सामुदायिक नेताओं के आगे बढ़ने में भी बचपन के इस हरियाली की प्रमुख भूमिका रही है।

ऐसे लोगों ने भी अत्यंत भीड़ भाड़ वाले इलाको में हरियाली कायम रखने के लिए पार्कों के लिए स्थान निर्धारित किये हैं।

वे अपने बचपन के आधार पर भावी बच्चों के मनोरंजन के लिए भी

नित नये साधन जुटाने को हमेशा प्रयासरत रहते हैं।

इससे अंत में समाज का भला होता है।

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