सौरमंडलों के टकराव से ही उत्पन्न होते हैं ब्लैक होल

सौरमंडलों के टकराव से ही उत्पन्न होते हैं ब्लैक होल
  • नासा के चंद्रा खगोलकेंद्र से बनाये नये सिद्धांत

  • हर ब्लैक होल आकार में सूर्य से लाखों गुणा बड़ा

  • इस टकराव के नये तारों का भी होता है निर्माण

  • गुरुत्वाकर्षण की वजह से टकराते हैं सौर मंडल

प्रतिनिधि
नईदिल्लीः सौरमंडलों के आपस में टकराने के परिणाम स्वरुप ही ब्लैक होल पैदा होते हैं।



एक नई वैज्ञानिक परिकल्पना में इस सिद्धांत पर काम हो रहा है।

इसके तहत पाया गया है कि इस किस्म के भीषण संघर्ष के बाद टकराने वाले दोनों ही सौर मंडलों का अस्तित्व पूरी तरह समाप्त हो गया।

इसके स्थान पर एक नये ब्लैक होल का जन्म हुआ।

इस क्रम में वहां नये तारों के निर्माण की भी पुष्टि हो रही है।

देखें इस टक्कर की परिकल्पना वीडियो

पृथ्वी से करीब तीन सौ प्रकाश वर्ष की दूरी पर स्थित एक ब्लैक होल के अध्ययन और आस-पास के घटनाक्रमों पर नजर रखने वाले वैज्ञानिकों का यह प्रारंभिक अनुमान है।

नासा के चंद्र एक्सरे खगोलशाला से इस पर नजर रखी जा रही है।

वहां स्थापित टेलीस्कोप में यह देखा गया है कि उस क्षेत्र में एक्स रे किरणों के विकिरण का केंद्र ब्लैक होल ही है।

इसके अंदर से उत्सर्जित होने वाले गैस भी आस-पास के इलाकों में नये तारों का निर्माण कर रहे हैं।

फिलहाल जिस ब्लैक होल पर यह अध्ययन केंद्रित है, उसे एएम 0644-742 कहा जाता है।

टेलीस्कोप से यह देखा गया कि ब्लैक होल अथवा उसके आस पास के न्यूट्रॉन तारों का जन्म ही आस-पास के दो सौर मंडलों के आपसी टकराव की वजह से हुआ है।

दोनों ने एक दूसरे को अपने गुरुत्वाकर्षण की वजह से खींचना प्रारंभ किया था।

सौरमंडल के साथ समाप्त हो जाते हैं उसके सभी तारे भी

जिसके परिणामस्वरुप दोनों आपस में टकरा गये।

जिसके बाद वहां शून्य जैसा ब्लैक होल उत्पन्न हो गया।

वैज्ञानिकों का मानना है कि दोनों के टकराव से जो अत्यधिक ऊर्जा उत्पन्न हुई, उससे दोनों ही सौर मंडल नष्ट हो गये।

इनमें मौजूद गैसों को उत्सर्जन से ही यह ब्लैक होल बनता चला गया, जिसमें इन दोनों ही सौर मंडलों की अपेक्षा अधिक गुरुत्वाकर्षण था।

जिसने अपने आस पास के अनय तारों को भी अपने अंदर समेट लिया।

इस पूरी प्रक्रिया में जब जब वहां गैसों की लहर पैदा हुई, उसने नये तारों को भी जन्म दिया।

जबकि टकराने वाले दोनों सौर मंडलों के सारे तारे ब्लैक होल में समाने के बाद पूरी तरह समाप्त हो गये।

वैज्ञानिकों का मानना है कि ब्लैक होल के जन्म के वक्त पैदा होने वाले तारों की जीवन भी बहुत कम होता है।

वैसे आम आदमी की भाषा में यह बहुत कम जीवन भी कई लाख वर्षों का होता है।

उसके अंदर मौजूद ऊर्जा के समाप्त होते ही ये तारे मृत हो जाते हैं।

फिर अंतरिक्ष में भटकते हुए फिर किसी ब्लैक होल में समा जाते हैं।



Facebooktwittergoogle_plusredditpinterestlinkedinmail

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

This site uses Akismet to reduce spam. Learn how your comment data is processed.