सिर्फ बिटक्वाइन नहीं शेयर बाजार पर भी सरकार की पूरी नजर रहे

बिटक्वाइन
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भारत सरकार की कड़ाई के बाद अब बिटक्वाइन नामक आभाषी मुद्रा भारत छोड़ने की तैयारी में है। सरकार का यह फैसला काबिलेतारीफ है। सरकार को ऐसे बेबुनियाद मुद्रा के साथ साथ फर्जी आंकड़ों के साथ बाजार को प्रभावित करने वाली उन कंपनियों पर भी कार्रवाई करनी चाहिए, जो शेयर बाजार का बहुत सारा पैसा खींच रही हैं।
डिजिटल करेंसी की बढ़ती लोकप्रियता को ध्यान में रखते हुए भारतीय रिजर्व बैंक ने अपनी डिजिटल करेंसी लाने की घोषणा कर ऐसे गोरखधंधा को रोकने की दिशा में बेहतर कदम उठाया है। इसी क्रम में भारतीय रिजर्व बैंक ने तमाम संबंधित लोगों और संस्थाओं को बिटक्वाइन जैसी आभाषी मुद्राओं का कारोबार नहीं करने की हिदायत देकर भी अच्छा काम किया है।
अनेक लोगों को इस बात को लेकर नाराजगी है कि सरकार ने अच्छी कमाई का जरिया बंद कर दिया है। ऐसे लोगों को यह समझना चाहिए कि जिस मुनाफे के पीछे वे पागल हो रहे हैं, वे गड़बड़ी की स्थिति में कभी पकड़ में नहीं आ सकते। इस वजह से पूरी दुनिया में आभाषी मुद्रा पर धोखाधड़ी बहुत तेजी से बढ़ रही है।
इसके ज्वलंत उदाहरण देश में भी मौजूद हैं। बिटक्वाइन से जुड़ा हजारों करोड़ रुपये का घोटाला सामने आया है। बिटक्वाइन के जरिये 8000 लोगों को 2000 करोड़ रुपये का चूना लगाने वाले एक शख्स को पुणे पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है। पुणे पुलिस ने दिल्ली एयरपोर्ट से घोटाले के मुख्य आरोपी अमित भारद्वाज को दबोचा है।

बिटक्वाइन के धंधे में एक गिरफ्तारी भी हुई है

अमित ने खुद का बिटक्वाइन माइनिंग आॅपरेशन (बिटक्वाइन हासिल करने की प्रक्रिया) शुरू की थी। पुणे पुलिस अमित भारद्वाज के सात सहयोगियों को पहले ही गिरफ्तार कर चुकी है। अमित भारद्वाज ने ही देश के अंदर साल 2014 में पहला आॅनलाइन रिटेल मार्केट प्लेस खोला था। अमित का बिटक्वाइन आॅपरेशन चीन समेत कई देशों में चलता था। हाल ही में उसने एमकैप के नाम से नया विटक्वाइन लॉन्च किया है।
पुणे पुलिस को बैंकाक की एक एजेंसी ने अमित के बारे में जानकारी दी थी। अमित को दिल्ली एयरपोर्ट से गिरफ्तार किया गया है। अमित ने बिटक्वाइन खरीदने पर निवेश्कों से ज्यादा रिटर्न देने का वादा किया था। उसकी तरफ से चलाई जाने वाली स्कीम में निवेश्कों से 10 फीसदी रिटर्न का वादा किया जाता था।
वह निवेश्कों से एक कॉन्ट्रैक्ट करता था, जो कि 18 महीने तक वैध रहता था। इसके अलावा वह निवेशकों को बिटक्वाइन माइनिंग का आॅप्शन देता था। इसमें लोग खुद बिटक्वाइन माइन कर सकते थे। लेकिन अमित ने कभी भी निवेश्कों को इसका फायदा नहीं दिया।
अमित के देश छोड़ने के बाद ईडी की मुंबई शाखा ने अमित के खिलाफ लुकआउट नोटिस जारी किया था। पुलिस के अनुसार अमित ने मुंबई, पुणे, नांदेड़ और कोल्हापुर समेत कई शहरों के निवेशकों को चूना लगाया था। इससे पहले पुलिस ने अमित के सात सहयोगियों आकाश संचेती, काजल सिंघवी, व्यास सापा, हेमंत सूर्यवंशी, हेमंत चव्हाण, अजय जाधव और पंकज अधालका को भी गिरफ्तार किया था।
समझने वाली बात यह भी है कि यह यह आभाषी मुद्रा है। इसकी खरीद-बिक्री आईडी-पासवर्ड के जरिये आॅनलाइन की जाती है। दुनिया भर में बिटक्वाइन और उसकी सुरक्षा को लेकर काफी चिंता है। इसका कारण यह है कि सरकार या केंद्रीय बैंक इसका नियमन नहीं करते। इससे मनी लांड्रिंग का जोखिम है। पिछले एक साल में इसके दाम में काफी तेज उतार-चढ़ाव आया है।
पिछले साल नवंबर-दिसंबर में इसकी कीमत 20 हजार डॉलर के उच्चतम स्तर पर पहुंच गई थी। जबकि कई देशों द्वारा सख्ती की वजह से इस साल जनवरी-फरवरी में इसके दाम घटकर सात हजार डॉलर से भी नीचे आ गए थे। एक अनुमान के मुताबिक करीब 50 लाख भारतीयों ने 13 हजार करोड़ रुपए बिटक्वाइन जैसी क्रिप्टोकरेंसियों में निवेश कर रखे हैं।
आगे जैसे-जैसे इस पर शिंकजा कसेगा लोग इनको बेचेंगे और इन क्रिप्टोकरेंसी के भाव और गिरेंगे। इस किस्म की कार्रवाई के साथ साथ अब सरकार को शेयर बाजार की गतिविधियों पर भी नजर रखनी चाहिए। कई बड़े बैंक घोटालों के बाद यह तथ्य प्रमाणित हो चुका है कि शेयर बाजार के तथ्य कंपनी की वास्तविक आर्थिक स्थिति से कतई मेल नहीं खाते।
ऐसे में शेयर बाजार के भरोसे कंपनी पर पूंजी निवेश करने वालों का पैसा डूबने का खतरा लगातार बना रहता है।
यूं भी शेयर बाजार के कारोबार का प्रलोभन देने वाले भी बड़ी स्पष्टता से इस बात को प्रचारित करते हैं कि पूरा कारोबार बाजार के लेन देन के जोखिमों से जुड़ा हुआ है।
इसलिए जब सफाई की प्रक्रिया चल ही रही है तो सरकार को लगे हाथ शेयर बाजार की गतिविधियों को भी जांच लेना चाहिए।
जिस तरीके से चाटर्ड एकाउंटेंटों पर विभागीय नजर है, उसी तरह शेयर बाजार पर नजर रखने से शायद सरकार और भारतीय बैंकों का और भी डूबा हुआ पैसा निकल आयेगा। साथ ही जनता के और पैसे डूबने से भी बच जाएंगे।

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