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सामान्य तापमान पर चमड़े पर थ्री डी प्रिंटिंग का कमाल




  • शरीर की आंतरिक गतिविधियों की रिपोर्ट देगा

  • लचीला होने की वजह से उसे पहन सकते हैं

  • दोबारा भी इस्तेमाल होगा तो खर्च कम होगा

  • अमेरिका और चीन के वैज्ञानिकों का संयुक्त प्रयास

राष्ट्रीय खबर

रांचीः सामान्य तापमान पर इस किस्म के अत्याधुनिक वैज्ञानिक प्रयोग का सफल

नतीजा पहली बार सामने आया है। वरना आम तौर पर खास किस्म की वैज्ञानिक प्रक्रिया

को सफल बनाने के लिए तापमान और हवा के दबाव के मुद्दे पर भी ध्यान देना पड़ता है।

इस बीर सामान्य चमड़ी पर शरीर के सेंसरों की मदद से सीधे प्रिंटिंग की गयी है। इस

प्रयोग के सफल होने के बाद ऐसा माना जा रहा है कि इंसान ऐसे सेंसरों को पहनकर चल

सकता है। इसकी मदद से उनके शरीर के आंतरिक गतिविधियों की जानकारी भी तुरंत

मिल जाएगी क्योंकि यह सारे आंकड़े इंसान के चमड़े के ऊपर ही प्रिंट हो सकेंगे। वर्तमान

में भी दिल की धड़कन सहित अन्य जानकारी देने वाले ऐसे उपकरण बाजार में हैं लेकिन

उनकी गुणवत्ता उतनी अच्छी नहीं है। इन सारे उपकरणों के बदले इस एक उपकरण से

सारी समस्या का समाधान हो सकता है।

पेनिनसिल्वानिया स्टेट यूनिवर्सिटी के शोधकर्ताओं ने इस काम को कर दिखाया है। वैसे

इस अनुसंधान में उनके साथ चीन के हारबिन इंस्टिट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी के वैज्ञानिक

भी रहे हैं। साथ ही चीन की कई अन्य संस्थानों ने भी इसे विकसित करने में अपनी अपनी

भूमिका निभायी है। इस तकनीक की मदद से इलेक्ट्रॉनिक सेंसरों की मदद से प्रिंट करना

संभव हो पाया है। सबसे अच्छी बात यह है कि यह सारा काम बिना किसी अतिरिक्त

तापमान के होता है। सामान्य तापमान पर सारा काम होने की वजह से जिसके शरीर पर

सेंसर लगे हैं, उसे भी अतिरिक्त गर्मी का एहसास तक नहीं होता है। इसी वजह से यह

धारण करने योग्य हैं क्योंकि इसे पहनने में किसी को कोई परेशानी नहीं होती। लेकिन

पहने जाने के बाद यह खुद ही इंसान के शरीर के कई आंतरिक गतिविधियों के विवरण

दर्ज करता जाता है।

सामान्य तापमान पर पहनने वालों को भी कोई परेशानी नहीं

जिस किसी व्यक्ति ने इसे पहन रखा है, उसे इसकी वजह से कोई परेशानी नहीं होती।

इससे पहले आम तौर पर प्रिंटिग की जो तकनीक हमारे पास मौजूद है, उसमें सिल्वर

नैनो पार्टिकल्स को एकसाथ करने के लिए लचीले इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों की आवश्यकता

होती थी। उस काम को पूरा करने के लिए उच्च ताप की जरूरत पड़ती है। लेकिन किसी

इंसान के शरीर के चमड़े पर 572 डिग्री फारेनहाइट का यह ताप संभ नहीं है क्योंकि इस

ताप से तो चमड़ी ही जल जाएगी। इसी अड़चन को तकनीकी सुधार के जरिए समाप्त

किया गया है। इस काम को करने के लिए एक अतिरिक्त सिंटेरिंग परत बनायी गयी है।

इसमें पॉलिविनाइल अल्कोहल का पेस्ट और कैलसियम कार्बोनेट मिला गया है। इसी

मिश्रण की वजह से नैनो पार्टिकल्स सामान्य तापमान पर ही काम कर पाते हैं। कमरे के

तापमान पर जब यह प्रक्रिया पूरी होती है तो सतह पर जो प्रिंटिंग होती है, वह भी

अतिरिक्त ताप पैदा नहीं करती। इस विधि का परीक्षण करने के लिए वैज्ञानिकों ने खून में

ऑक्सीजन की मात्रा, ईसीजी और अन्य नमी संबंधी आंकड़ों की प्रिंटिंग की है। यह आंकड़े

सीधे चमड़ी पर प्रिंट करने के साथ साथ इसी विधि से सारी सूचनाएं किसी खास मॉनिटर

तक भेजने में भी सफलता मिली है। यानी इस विधि से किसी मरीज की वर्तमान हालत की

जानकारी सीधे अस्पताल अथवा उसके डाक्टर तक भी भेजी जा सकती है। परीक्षण में

पाया गया है कि इस विधि से चमड़े पर जो प्रिंटिंग होती है वह कुछ दिनों तक दृश्यमान

होती है। गर्म पानी में नहाने से यह दाग जल्दी समाप्त हो जाते हैं। दूसरी तरफ यह

उपकरण ऐसा है कि इसका दोबारा भी इस्तेमाल किया जा सकता है क्योंकि इस्तेमाल के

दौरान इसका कोई भी हिस्सा क्षतिग्रस्त नहीं होता है।

शरीर में टैटू की तरह ही प्रिंटिंग होती है इसकी

शरीर में जिस तरीके से लोग टैटू लगाते हैं, लगभग उसी तरीके से यह शारीरिक आंकड़े भी

देखने लायक बन जाते हैं। इनके जरिए इंसान के शरीर के अंदर की क्या हालत है, उसका

पता चलता रहता है। दरअसल किसी भी इलेक्ट्रॉनिक उपकरण के लचीला होने से ही उसमें

सुविधाओं का विस्तार हो जाता है। दूसरी तरफ दोबोरा इस्तेमाल में लाने लायक बने

उपकरण खास तौर पर चिकित्सीय सुविधा के लिहाज से और भी बेहतर और कम खर्चीला

साबित होते हैं। वैसे तो यह विधि पहले ही विकसित कर ली गयी थी लेकिन उस वक्त

तापमान को नियंत्रित करने का तरीका नहीं खोजा जा सका था। अब जाकर कमरे के

तापमान पर यह काम पूरा करने का प्रयोग सफल साबित हो पाया है।

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