fbpx Press "Enter" to skip to content

सहकारिता मुद्दे पर शरद पवार की पहल के मायने

सहकारिता मुद्दे पर कई लोगों की नजर नये मंत्रालय को अमित शाह के अधीन किये जाते ही

चौकन्नी हो गयी है। इस बारे में चर्चा है कि एनसीपी नेता शरद पवार ने नरेंद्र मोदी के साथ

अपनी मुलाकात में यह मुद्दा उठाया है। वैसे यह इतिहास की बात है कि देश में ब्रिटिश शासन

काल के दौरान सहकारिता आंदोलन की नींव भी महाराष्ट्र से पड़ी थी। इतिहास गवाह है कि

करीब डेढ़ सौ वर्ष पूर्व महाराष्ट्र के पश्चिमी क्षेत्र के बड़े किसानों ने कर्ज की अनुचित परिपाटी

को लेकर आंदोलन किया था और सबकी पहुंच वाले आर्थिक ढांचे की मांग की थी। लोगों के

मुताबिक सहकारिता आंदोलन के बीज यहीं बोए गए। आज देश भर में 8 लाख से अधिक

सहकारी समितियां (2018 तक) हैं जिनमें करीब 30 करोड़ सदस्य हैं जो अमेरिका की आबादी

के समान है। हालांकि इतनी गहरी पहुंच के बावजूद भारत की अर्थव्यवस्था में सहकारिता का

योगदान कम होने लगता है। निजी उद्यमों में वृद्धि, इसकी मांग और आपूर्ति की गति,

सरकार द्वारा संचालित संस्थानों और योजनाओं के साथ-साथ उनके व्यापक दृष्टिकोण की

वजह से भारत में सहकारी समितियों की क्षमता प्रभावित हुई। उदाहरण के तौर पर राष्ट्रीय

कृषि एवं ग्रामीण विकास बैंक (नाबार्ड) के आंकड़ों के अनुसार, देश में वितरित कुल कृषि ऋण

में सहकारी समितियों की हिस्सेदारी दो दशकों में 40 फीसदी से कम होकर 10 फीसदी हो गई

है। अनेक सहकारी समितियां अपने बलबूते पर बहुत अच्छा काम कर रही हैं लेकिन हम चंद

अत्यंत सफल और कॉरपोरेट छवि पा चुके समितियों और उनके उत्पादनों के बारे में ही जानते

हैं। जैसे आमूल ब्रांड या पतंजली ब्रांड। अब सहकारी ऋण संस्थाओं की हिस्सेदारी सहकारी

समितियों में 70 फीसदी तक हैं और कॉमर्शियल बैंकों के बेहतर सौदे होने की वजह से इनके

कारोबार में बड़ी कटौती देखी जा रही है।

सहकारिता मुद्दे पर नियंत्रण कई राज्यो की राजनीति में अहम

बाकी के हिस्से में मशहूर सहकारी समितियां चीनी और दूध के क्षेत्र से जुड़ी हुई हैं। गृह मंत्री

अमित शाह के नेतृत्व में नए सहकारिता मंत्रालय का गठन हो रहा है और इसके जरिये 30

करोड़ साझेदारों को पुनरुद्धार का स्पष्ट संकेत भेजा गया है। भले ही नए मंत्रालय को अपना

प्रभाव बनाने में एक या दो साल लग जाते हों लेकिन 2024 में लोकसभा चुनाव से पहले कई

भारतीयों के दरवाजे तक पहुंचने में निश्चित रूप से मदद मिलेगी। इस तंत्र से जुड़े लोगों को

महसूस होता है कि एक नया मंत्रालय काफी मददगार साबित होगा। भारतीय रिजर्व बैंक के

अनुसार, शहरों में शहरी सहकारी बैंकों (यूसीबी) के ऋण खाते का दायरा 2004-05 में 1.3

लाख करोड़ रुपये से बढ़कर 2019-20 में 6.2 लाख करोड़ रुपये हो गया है। जिस मुद्दे पर

ध्यान देने की जरूरत है वह यह है कि 95 प्रतिशत से अधिक शहरी सहकारी बैंक, अब भी गैर-

अनुसूचित बैंक बने हुए हैं। दूसरी तरफ मोदी के साथ शरद पवार की मुलाकात के बारे में

समझा जाता है कि इस बैठक में भी इसी सहकारिता मंत्रालय से जुड़े विषयों की तरफ उनका

ध्यान आकृष्ट किया है। इसके पूर्व में ही श्री पवार ने एक पत्र लिखकर सहकारिता बैंकों के मुद्दे

पर केंद्र सरकार का ध्यान इस तरह आकृष्ट किया था कि सहकारिता बैंक दरअसल राज्यों के

विषय हैं। उन्होंने इस संबंध में सुप्रीम कोर्ट के फैसलों का हवाला देते हुए कहा था कि इसके

खिलाफ कोई भी कदम दरअसल संविधान के खिलाफ ही होगा। दूसरी तरफ एक खेमा फिर से

यह संदेह जता रहा है कि नोटबंदी के ठीक पहले अमित शाह के नेतृत्व में चलने वाली सहकारी

समितियों और बैंकों से जो पुराने नोट बदले गये थे, वे महज संयोग नहीं थे।

नोटबंदी से ठीक पहले पुराने नोट बदलने का घटना याद है

जैसे जैसे दिन बीत रहे हैं यह स्पष्ट होता जा रहा है कि सरकार चलाने का काम काज में

अमित शाह का दखल बढ़ता चला गया है। अनेक विरोध दल के लोग अब साफ तौर पर कहने

भी लगे हैं कि सरकार तो अमित शाह ही चलाते हैं और नरेंद्र मोदी अब सिर्फ इस सरकार के

लिए बेहतर छवि वाला एक मुखौटा भर रह गये हैं। इतने अविश्वास की स्थिति में दरअसल

देश का नवगठित सहकारिता मंत्रालय आखिर क्या करना चाहता है, यह देखने लायक बात

होगी। कोरोना महामारी के बदली आर्थिक परिस्थितियों के बीच ग्रामीण इलाकों में फिर से उठ

खड़े होने की चाह में सहकारिता के प्रयास और बेहतर होंगे। झारखंड के संदर्भ में बात करें तो

यहां अन्य विषयों के अलावा मत्स्य पालन में भी सहकारिता समिति का योगदान बेहतर है।

अनेक महिला समूहों ने अपने माध्यम से सहकारिता आंदोलन को आगे बढ़ाया है। ऐसे में

सहकारिता के माध्यम से अंतिम पायदान पर खड़े व्यक्ति की अगर मदद हो पायी तो वह

निश्चित तौर पर बेहतर बात होगी और अगर यह भी नोटबंदी के पहले जैसी स्थिति रही तो

यह तय है कि इसकी कीमत भी आने वाले चुनाव में भाजपा को ही अदा करनी होगी।

Spread the love
  •  
  •  
  •  
  •  
  •  
  •  
  •  
  •  
  •  
  •  
  •  
More from HomeMore posts in Home »
More from ताजा समाचारMore posts in ताजा समाचार »
More from देशMore posts in देश »
More from नेताMore posts in नेता »

Be First to Comment

... ... ...
error: Content is protected !!
%d bloggers like this: