सत्ता और विपक्ष में अलग अलग भूमिका क्यों, संदर्भ एफडीआइ, बदल गये सारे सुर

वर्तमान सरकार ने अंतत: उन्हीं फैसलों पर मुहर लगायी, जिसका वह विपक्ष में रहते वक्त विरोध करती आयी थी। इससे खास तौर पर खुदरा व्यापारियों के एक बड़े वर्ग का विरोध उन्हें झेलना ही पड़ेगा। इन व्यापारियों ने इसे चुनावी वादे के खिलाफ की गयी कार्रवाई बताया है।
इससे स्पष्ट हो जाता है कि देश की आंतरिक प्रशासन का अपना एक नियम है, जो कोई भी सरकार में रहे, उससे इस नियम अथवा प्रशासन को कोई फर्क नहीं पड़ता। देश की जरूरतों को पूरा करने के लिए जिस विदेशी पूंजीनिवेश की बात पहले की सरकारें करती थी, अब जाकर नई सरकार ने उस दलील को न सिर्फ स्वीकार किया है बल्कि अपने ही चुनावी वादों के अलग हटते हुए एफडीआइ पर फैसले भी लिये हैं।
कल हुई कैबिनेट की बैठक में जो निर्णय लिये गये हैं, उनके मुताबिक एकल ब्रांड खुदरा कारोबार के लिए स्व त: रूट के तहत 100 प्रतिशत एफडीआई, निर्माण क्षेत्र के विकास में स्वकत: रूट के तहत 100 प्रतिशत एफडीआई, विदेशी एयरलाइनों को एयर इंडिया में मंजूरी रूट के तहत 49 प्रतिशत तक निवेश करने की अनुमति, एफआईआई/एफपीआई को प्राथमिक बाजार के जरिए पावर एक्सएचेंजों में निवेश करने की अनुमति, एफडीआई नीति में चिकित्सान उपकरणों की परिभाषा संशोधित की गई।
इस सरकार ने अपने विपक्ष में होने के दौरान जिन बातों को लेकर पूर्व की सरकारों की आलोचना की थी, उससे ये निर्णय बिल्कुल भिन्न हैं। यानी अब नरेंद्र मोदी की सरकार को भी समझ में आ रहा है कि सरकार चलाने तथा देश के आंतरिक संसाधनों के विकास के अलावा भी देश को आगे बढ़ाने के लिए विदेशी पूंजी निवेश की कैसी जरूरत पड़ती है।
डॉ मनमोहन सिंह बिना ज्यादा शोर गुल किये, इन्हीं विषयों पर काम किया करते थे। अब कैबिनेट में इन प्रस्तावों पर फैसला लेने के बाद यह बताया गया है कि इनका उद्देश्य एफडीआई नीति को और ज्यांदा उदार एवं सरल बनाना है, ताकि देश में कारोबार करने में आसानी सुनिश्चित हो सके।
इसके परिणामस्वेरूप प्रत्येक्ष विदेशी निवेश (एफडीआई) का प्रवाह बढ़ेगा जो निवेश, आय और रोजगार में उल्लेडखनीय योगदान करेगा। यह स्वीकार्य सत्य है कि प्रत्ययक्ष विदेशी निवेश (एफडीआई) आर्थिक विकास का एक प्रमुख वाहक और देश में आर्थिक विकास के लिए गैर-ऋण वित्त का एक स्रोत है।
सरकार ने एफडीआई के संबंध में एक निवेशक अनुकूल नीति क्रियान्वित की है जिसके तहत ज्याकदातर क्षेत्रों/गतिविधियों में स्व्त: रूट से 100 प्रतिशत तक एफडीआई की अनुमति दी गई है। हाल के महीनों में सरकार ने अनेक क्षेत्रों (सेक्टनर) यथा रक्षा, निर्माण क्षेत्र के विकास, बीमा, पेंशन, अन्य) वित्तीय सेवाओं, परिसंपत्ति पुनर्निर्माण कंपनियों, प्रसारण, नागरिक उड्डयन, फार्मास्यूाटिकल्स,, ट्रेडिंग इत्याडदि में एफडीआई संबंधी नीतिगत सुधार लागू किए।

एफडीआइ में असली परेशानी रिटेल कारोबार में होगी

लेकिन असली समस्या सिर्फ एकल ब्रांड खुदरा कारोबार करने वाले निकाय को आरंभिक 5 वर्षों के दौरान वैश्विक परिचालनों के लिए भारत से वस्तुाओं की अपनी वृद्धिपरक प्राप्ति का समायोजन करने की अनुमति देने का निर्णय लिया गया है।
इस अवधि की शुरूआत भारत से 30 प्रतिशत की खरीद की अनिवार्य प्राप्ति आवश्यनकता के सापेक्ष प्रथम स्टो र खोलने के वर्ष की पहली अप्रैल से होगी। इस उद्देश्य‍ के लिए वृद्धिपरक प्राप्ति से आशय एकल ब्रांड खुदरा कारोबार करने वाले अनिवासी निकायों द्वारा पिछले वित्त वर्ष की तुलना में किसी विशेष वित्त वर्ष मं संबंेधित एकल ब्रांड (भारतीय रुपये में) के लिए भारत से की गई इस तरह की वैश्विक प्राप्ति के मूल्यय में हुई वृद्धि से है।
इस तरह की प्राप्ति (सोर्सिंग) या तो प्रत्याक्ष रूप से अथवा उनके समूह की कंपनियों के जरिए की जा सकेगी। पांच वर्षों की यह अवधि पूरी होने के बाद एसबीआरटी निकाय के लिए हर साल सीधे अपने भारतीय परिचालन हेतु 30 प्रतिशत की प्राप्ति से जुड़े मानकों को पूरा करना अनिवार्य होगा।
विदेशी एयरलाइन या एयरलाइंस के विदेशी निवेश सहित एयर इंडिया में विदेशी निवेश न तो प्रत्यएक्ष अथवा अप्रत्येक्ष रूप से 49 प्रतिशत से अधिक होगी। एयर इंडि‍या का व्याअपक स्वािमित्वी एवं प्रभावकारी नियंत्रण आगे भी भारतीय हाथों में ही निहित होगी। यह स्प ष्टर करने का निर्णय लिया गया है कि रियल एस्टेहट ब्रोकिंग सेवा का वास्ताि अचल परिसंपत्ति (रियल एस्टेरट) व्ययवसाय से नहीं है, इसलिए इसमें स्वतत: रूट के तहत 100 प्रतिशत एफडीआई संभव है।
पावर एक्स चेंजों में स्व त: रूट के जरिए 49 प्रतिशत एफडीआई की अनुमति दी गई है। एफआईआई/एफपीआई को अब प्राथमिक बाजार के जरिए भी पावर एक्सफचेंजों में निवेश करने की अनुमति देने का निर्णय लिया गया है। उधर, सरकारी मंजूरी वाले क्षेत्रों/गतिविधियों, जिनके लिए सुरक्षा मंजूरी की आवश्यमकता होती है, से जुड़े मामलों पर संबंधित प्रशासकीय मंत्रालय/विभाग गौर करेंगे, जैसा भी मामला होगा। सरकारी मंजूरी रूट के तहत आने वाले ऐसे मामलों पर आगे भी संबंधित प्रशासकीय विभाग/मंत्रालय ही गौर करेगा जिनके लिए संवेदनशील देश से जुड़ी सुरक्षा मंजूरी आवश्याक होती है।
इससे स्पष्ट है कि अब विकास की गाड़ी आगे बढ़ाने के लिए सरकार उसी रास्ते पर चल पड़ी है, जिस पर पूर्व की सरकारें चला करती थी।

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