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विपत्ति की घड़ी में पुलिस बनी ‘मददगार’ अवतार

  • गरीबों-जरूरतमंदों के लिये घूम-घूम कर बांट रहे अनाज-भोजन
  • जान हथेली में रख कर मेडिकल स्टाफ, पुलिस-प्रशासन के लोग व सफाईकर्मी कर रहे सेवा

उदय चौहान

रांची : झारखंड की तासीर जे नाचीं से बाचीं वाली रही है। लेकिन, लॉकडाउन के बीच यहां

की हवाओं में अजीब सी बेचैनी छा गयी है। पिछले छह दिनों से कोरोना के खिलाफ जंग में

हर आम वो खास अपने-अपने स्तर से भूमिका निभा रहा है। इस विकट परिस्थिति में

भावनाओं का ‘जोर’ बढ़ गया है। झारखंड पुलिस की ‘मददगार’ अवतार ही हर ओर प्रशंसा

हो रही है। आम आदमी की जरूरतों को पूरा करने के अलावा पशुओं को भी पुलिस की ओर

से चारा खिलाया जा रहा है। यह पुलिस की छवि पर सबसे बड़ा सुधार दिखाई देने लगा है।

जान हथेली पर रखकर मेडिकल स्टाफ, सफाईकर्मी व पुलिस-प्रशासन के अलावा समाज

के विभिन्न वर्ग के लोग आगे आ रहे हैं। द रांची प्रेस क्लब जैसी संस्था भी गरीब व

जरूरतमंदों के बीच अनाज वितरण कर रहा है। माहेश्वरी समाज की ओर से भूखों को

भोजन कराया जा रहा है। सांसद संजय सेठ ने भी जरूरतमंदों के लिये अनाज व खिचड़ी

उपलब्ध कराने का अभियान शुरू किया है। इसके अलावा हजारों मददगार अपने-अपने

स्तर से सेवादार की भूमिका निभा रहे हैं। लेकिन कोरोना से जंग अभी और लंबी है। इसमें

धैर्यपूर्वक, संयमपूर्वक जज्बा कायम रखना ही हर नागरिक का हथियार हैं। सुरक्षित रहने

के लिये कोरोना को हराने के लिये लॉक डाउन के नियमों का पालन करना ही होगा।

सड़ने सुनी व गलियां बिरान, फिर भी जीत के जज्बे को सलाम

राजधानी रांची की गलियां बिरान है और सड़कें सांय-सांय कर रही हैं। हां! शहर के चौक-

चौराहों पर पुलिस व अन्य आपातकालीन सेवा उपलब्ध कराने वालों की धमक यदा-कदा

सन्नाटे को बेध रही है। यह बिल्कुल युद्ध वाली स्थिति को बयां करता है। ऐसे में, घरों में

कैद आम आदमी, बुजुर्ग, महिलाओं व बच्चों की बेचैनी भविष्य को लेकर वाजिब है।

बावजूद इसके कोरोना के खिलाफ जंग को जीतने में जज्बा ही काम आयेगा। समर्थ लोग

उदारतापूर्वक निर्धनों की मदद को खड़े हो रहे हैं। यह भारतीय संस्कृति का धवल पक्ष है।

अब, यहां कोई बड़ा-छोटा नहीं रह गया है। सभी कोरोना के खिलाफ युद्ध के वीर हैं और हर

कोरोना वॉरियर खास है। झारखंड की नदी-झरने, पहाड़, खेत-खलियान, जंगलप्रांत में फिर

से नवजीवन का नृत्य होगा। कोरोना के खिलाफ जंग जीतने के बाद जीवन फिर से विहंस

उठेगी, इस विश्वास को कायम रखने की जरूरत है।

आप मुस्कराइये कि झारखंड में हैं!

अब तक झारखंड में एक भी कोरोना पॉजिटिव नहीं पाया जाना सुकुन देने वाला है। पूरे

विश्व में कोहराम मचाने वाले कोरोना को अब तक इस प्रकृतिप्रेमी स्टेट में इंट्री नहीं मिली

है। लेकिन, कोरोना से आगे की जंग निर्णायक दौर की है। ऐसे में, थोड़ी लापरवाही भी

महंगी साबित होगी। ऐसे में, घरों में रहकर ही सुरक्षित रहेंगे। लॉक डाउन का पालन

कीजिये और सरकारी कर्मियों को सहयोग करने का मूलमंत्र को आत्म्सात कीजिये।

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2 Comments

  1. […] विपत्ति की घड़ी में पुलिस बनी ‘मददगार… गरीबों-जरूरतमंदों के लिये घूम-घूम कर बांट रहे अनाज-भोजन जान हथेली में रख कर मेडिकल स्टाफ, पुलिस-प्रशासन के लोग व सफाईकर्मी कर … […]

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