Press "Enter" to skip to content

वनस्पति विज्ञान के अनुसंधान में जीनों की चोरी का पता चला







  • परजीवी पौधे भी खूब करते हैं जीनों की चोरी

  • क्रमिक विकास के नये क्रम का पता चला

  • सभी सक्रिय प्राणियों में यह पद्धति आम बात है

  • 108 जीनों को सूचीबद्ध किया गया जो चुराये गये हैं


प्रतिनिधि

नईदिल्लीः वनस्पति विज्ञान का अनुसंधान यह बता रहा है कि पेड़-पौधों में भी चोरी होती है।

वह सिर्फ खुद को और बेहतर बनाने के लिए ऐसी चोरी किया करते हैं।

अनुसंधान के क्रम में पहले ही इस चोरी के संकेत मिले थे।

पहले सिर्फ अंगूर के पेड़ों में इस किस्म की चोरी का पता चला था।


इन्हें भी पढ़ सकते हैं


अब नया अनुसंधान बताता है कि अनेक परजीवी पौधे इस किस्म की चोरी किया करते हैं।

पहले इस किस्म की चोरी की तरफ वैज्ञानिकों का ध्यान नहीं गया था।

अब पता चला है कि दरअसल अपने मूल पेड़ से जीनों की चोरी कर वे खुद की जीनों को उन्नत बना रहे हैं।

यानी परजीवी पौधों में भी जीनों के एक क्रमिक विकास का काम निरंतर चल रहा है।

जीनों की इस किस्म की चोरी से उन्हें अपने आधार पेड़ से बेहतर तरीके से पौष्टिकता हासिल करने में और मदद मिलती है।

कई बार यह देखा गया है कि इस किस्म की चोरी की वजह से मूल पेड़ ही बीमार होने लगता है

जबकि उसपर पूरी तरह आश्रित परजीवी पौधे फलते-फूलते पाये जाते हैं।


आप इन खबरों को भी पढ़ सकते हैं


इस स्थिति के अध्ययन के बाद वैज्ञानिक इस नतीजे पर पहुंचे हैं कि

दरअसल सारी पौष्टिकता परजीवी द्वारा सोख लिये जाने की वजह से पेड़ खुद के लिए कुछ भी बचा नहीं पाता।

इस वजह से वह धीरे धीरे कमजोर होने लगता है।

समय पर सुधार नहीं होने की स्थिति में पहले पेड़ और बाद में उस पर आश्रित परजीवी पौधे की मौत हो जाती है।

वनस्पति विज्ञान में पहली बार इस क्रमिक विकास की पुष्टि हुई




अनुसंधान में जीनों की चोरी का पता चलने के बाद वैज्ञानिकों ने उन जीनों की सूची बनाने का काम भी प्रारंभ किया है, जिनकी अक्सर ही चोरी की जाती है।

इस कड़ी में अब तक करीब एक सौ ऐसे जीनों का पता चला है,

जिन्हें परजीवी पौधों ने अपने आधार वृक्ष से चुरा लिया है। इस चोरी की वजह से वे और उन्नत किस्म के हो गये हैं।

शोध के दौरान यह भी पाया गया है कि मूल पेड़ से पर्याप्त पौष्टिकता नहीं मिलने की वे नियमित जांच भी करते हैं।

अगर किन्हीं कारणों से पेड़ ने अपने अंदर मौजूद संरचना की वजह से

पौष्टिकता की चोरी को रोका हो तो वे हमला भी करते हैं

ताकि उन्हें पेड़ से अपनी खुराक नियमित मिलती रहे।

इंसान सहित दूसरे प्राणियों में जीनों का ऐसा स्थानांतरण आम बात है।


पर्यावरण की कुछ खास रिपोर्ट


क्रमिक विकास के दौरान यह अक्सर होता है और वैज्ञानिक तौर पर प्रमाणित तथ्य है।

वनस्पति विज्ञान के शोध का निष्कर्ष है कि पेड़ पौधों में भी क्रमिक विकास का

यह क्रम खास तौर पर परजीवी पौधों पर स्पष्ट देखा जा सकता है।

साथ ही यह भी साबित हो गया है कि कुछ खास प्रजाति के परजीवी पौधों के लिए

ऐसा करना मजबूरी भी है क्योंकि वे अपने फोटो संश्लेषण की विधि से

खुद को जीवित नहीं रख सकते।

उन्हें दूसरों से ही पौष्टिकता प्राप्त करने की जरूरत पड़ती है।

वैज्ञानिकों ने 108 जीनों का पता लगाया जो चुराये गये हैं




वैज्ञानिकों ने इस श्रेणी के 108 ऐसी जीनों का पता लगाया है

जो मूल परजीवी पौधों में इसी क्रमिक विकास के क्रम में जोड़े गये हैं।

इस पूरी प्रक्रिया का अध्ययन करने वाले शोधकर्ताओं ने पाया है कि

इसी जीन ट्रांसफर की वजह से परजीवी पौधों में कई किस्म की नई प्रक्रियाओं में एमिनो एसिड पैदा होता है।

साथ ही वे आरएनए नाम से परिचित एक विशेष विधि तैयार कर रहे हैं।

इस विधि का प्रयोग मूल पेड़ पर तब किया जाता है

जब वह इस परजीवी को पौष्टिकता देना बंद कर देता है।

इस आरएनए के हमले से मूल पेड़ की सुरक्षा व्यवस्था को भेदकर अपने लिए पुष्टि हासिल करने का नया रास्ता तैयार किया जाता है।

इस प्रक्रिया में वह सारी विधि तैयार होती है जो आम जीवन के आगे बढ़ने के लिए आवश्यक हैं।

शोध के तथ्य को साबित करने के लिए वैज्ञानिकों ने एक ही प्रजाति के अलग अलग परजीवियों का परीक्षण किया गया है।

इसमें पाया गया है कि मूल प्रजाति के परजीवी से विकसित प्रजाति के परजीवी पौधों में कई जेनेटिक गुण अधिक विकसित हो चुके हैं

जबकि उनका मूल जीन अब तक यथावत ही है। यह परीक्षण चार हजार से अधिक प्रजाति के परजीवी पौधों पर किया गया है।


विज्ञान की कुछ रोचक खबरें



Spread the love
  •  
  •  
  •  
  •  
  •  
  •  
  •  
  •  
  •   
  •  
  •  

Be First to Comment

Leave a Reply

WP2Social Auto Publish Powered By : XYZScripts.com