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महापंचायत में अब भी किसानों के तेवर आक्रामक

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भाजपा की धमकी के बाद भी पहुंचे हजारों किसान
अब एमएसपी सहित अन्य मुद्दों पर चर्चा की बात
सभी फसलों पर एमएसपी की गारंटी की मांग की
राष्ट्रीय खबर

लखनऊः महापंचायत में भी किसानों ने साफ कर दिया है कि तीनों कृषि कानूनों की वापसी के एलान के बाद भी उनकी लड़ाई अभी जारी है।




यहां आयोजित होने वाले किसान महापंचायत के पूर्व भाजपा की तरफ से यहां आने वालों का लट्ठ से स्वागत करने की भी बात कही गयी है।

इस धमकी के बाद भी उत्तरप्रदेश के सभी इलाकों से गाड़ियों में भरकर किसान यहां की महापंचायत में भाग लेने पहुंचे।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा तीनों कृषि कानूनों की वापसी के एलान से पहले ही इस महापंचायत का कार्यक्रम निर्धारित कर दिया गया था।

इसलिए श्री मोदी के एलान के बाद भी इस महापंचायत के कार्यक्रम को स्थगित नहीं कर किसान संगठनों ने साफ कर दिया है कि वे भाजपा के साथ फिलहाल अपने रिश्ते सुधारने के लिए लालायित नहीं है।

आज के महापंचायत में किसानों ने सभी फसलों पर न्यूनतम समर्थन मूल्य का एलान करने की मांग की और कहा कि सिर्फ चावल और गेंहू पर इस एसएसपी से काम नहीं चलने वाला है।

संयुक्त किसान मोर्चा ने इस संबंध में प्रधानमंत्री को पूर्व में ही लिखे गये पत्र का हवाला दिया और कहा कि किसानों को उनके हर फसल पर समर्थन मूल्य का लाभ दिया जाना चाहिए

ताकि खेती में हो रहे लगातार आर्थिक नुकसान की भरपाई हो और किसान भी संपन्न हो सकें।  वर्तमान में सरकार द्वारा सिर्फ धान और गेंहू पर यह एमएसपी लागू है।




महापंचायत में अन्य लंबित मांगों पर चर्चा हुई

आज के महापंचायत में किसानों ने सरकार के बिजली बिजली के उस ड्राफ्ट को भी वापस लेने की मांग दोहरायी, जिसमें अनुदान पर आधारित बिजली की आपूर्ति से किसानों को वंचित करने की बात लिखी गयी है।

इसके अलावा राज्यो में किसानों पर पराली जलाने के लिए दर्ज मुकदमे वापस लेने पर भी मंच से चर्चा हुई। वैसे पूर्व में ऐसा समझा गया था कि यहां किसानों के आने की स्थिति में भाजपा कार्यकर्ताओं के साथ उनकी झड़प भी हो सकती है।

लेकिन दरअसल ऐसा कुछ भी नहीं हुआ और सारा कुछ शांतिपूर्ण रहा। किसानों और सरकार के बीच थोड़ी स्थिति में सुधार के बीच उन्नाव के भाजपा सांसद साक्षी महाराज ने बूझती आग में फिर से घी डाल दिया है। उन्होंने कहा कि ऐसे कानून फिर से लाये जा सकते हैं।

उन्होंने कहा कि दरअसल श्री मोदी ने बड़ा दिल दिखाते हुए ऐसा फैसला किया है। वैसे वह यह कहने से भी नहीं चूके कि इन तीनों बिलों की वापसी का उत्तरप्रदेश के विधानसभा चुनाव से कोई लेना देना नहीं है।

उनके इस बयान से दोनों खेमों के बीच तनातनी फिर से बढ़ गयी है। इससे पहले भारतीय किसान यूनियन (भाकियू) के राष्ट्रीय प्रवक्ता राकेश टिकैत ने बताया कि फिलहाल आंदोलन जारी है।

उन्होंने कहा कि इस दौरान आंदोलन में मारे 750 से अधिक किसानों को शहीद का दर्जा देने, उनके परिजनों को मुआवजा देने और न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) का कानून बनाने सहित अन्य मांगें सरकार के समक्ष पेश किये जाने का प्रस्ताव भी महापंचायत में पेश किया जायेगा।

उन्होंने कहा कि सरकार कृषि क्षेत्र में सुधार के लिये जो कानून लाने वाली है, उस पर भी चर्चा होगी। आज सुबह से ही कोने कोने के किसानों का जत्था इस महापंचायत में भाग लेने के लिए पहुंचने लगा था। जिस कारण लखनऊ पुलिस अलर्ट मोड पर थी।



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