भारतीय वैज्ञानिकों ने खोजा सौरमंडल का नया तारा,यहां 19.5 दिन का एक साल

  • भारतीय उपकरण से ही किया अनुसंधान

  • माउंट आबू में स्थापित किया था संयंत्र

  • पृथ्वी से छह सौ प्रकाश वर्ष की दूरी पर

प्रतिनिधि

नईदिल्ली : भारतीय वैज्ञानिकों ने एक नया तारा खोज निकाला है।

अहमदाबाद के फिजिकल रिसर्च लैब के प्रोफेसर अभिजीत चक्रवर्ती के नेतृत्व में भारतीय दल ने इस तारे को खोजा है।

इस तारे की खास बात यही है कि यहां का एक साल 19.5 दिन में पूरा हो जाता है।

तारा शनि के वलय के पास नजर आया है।

वैज्ञानिकों ने अपनी खोज पूरी करने के बाद इसकी विस्तृत रिपोर्ट भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान केंद्र को भेज दी है।

उल्लेखनीय बात यह है कि भारतीय वैज्ञानिकों ने स्वदेशी उपकरणों की मदद से इसकी खोज की है।

वैज्ञानिकों ने अंतरिक्ष के अनुसंधान के लिए पारस नामक यंत्र बनाया था।

यह दरअसल एक स्पेक्रोग्राफ है, जिसे पीआरएल एडवांस रेडियल वेलोसिटी, अबू स्काई सर्च (पारस) नाम दिया गया था।

इस यंत्र को माउंट आबू के गुरुशिखर केंद्र में स्थापित किया गया था।

इस उपकरण की विशेषता यह है कि यह किसी भी तारे के सामने से गुजरने वाले किसी भी ग्रह के आकार को नाप सकता है।

नया तारा आकार में पृथ्वी से 27 गुणा बड़ा

शोध जारी रखते हुए भारतीय वैज्ञानिकों ने इस नये तारे को खोज निकाला।

इसे एपिक 211945201बी अथवा के-2 236 नाम दिया गया है।

जिस तारे के पास यह अवस्थित है, उसे एपिक 211945201 या के 2-236 नाम से जाना जाता है।

तारे के बारे में अनुमान लगाया गया है कि यह आकार में पृथ्वी से 27 गुणा बड़ा है।

यह भी सूर्य के चक्कर लगाता है। वर्तमान अनुमान के मुताबिक यह हमसे करीब छह सौ प्रकाश वर्ष की दूरी पर है।

शोध के क्रम में ही इस बात का पता चला है कि यह नया तारा भी अपने मूल धुरी पर 19.5 दिन में पूरा घूम लेता है।

इससे इसके एक वर्ष मात्र साढ़े उन्नीद दिन में ही पूरे हो जाते हैं।

वैज्ञानिकों का अनुमान है कि इस तारे का तापमान करीब छह सौ डिग्री सेंटीग्रेड है। जिस तारे के ईर्द गिर्द यह चक्कर लगा रहा है, उसका तापमान भी लगभग इतना ही है।

वैसे सूर्य से पृथ्वी की दूरी के मुकाबले यह अपने मूल तारा से सात गुणा कम दूरी पर है।

इसी वजह से उसके चक्कर जल्दी जल्दी लग जाते हैं।

वैज्ञानिकों का मानना है कि इस तारा में क्या कुछ पदार्थ मौजूद हैं, उसकी गणना से और जानकारी मिल पायेगी।

वर्तमान में यह अनुमान लगाया गया है कि इस तारा पर लोहा, बर्फ और सिलिकेट है, जो मूल तारा के करीब 60 से सत्तर फीसद है।

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