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भारतीय राजदूत श्रृंगला ने कहा अब राष्ट्रपति ट्रंप के प्रस्ताव का औचित्य नहीं




वाशिंगटनः भारतीय राजदूत हर्ष वर्धन श्रृंगला ने कहा है कि जम्मू-कश्मीर को विशेष राज्य का दर्जा देने वाले

संविधान के अनुच्छेद-370 को निरस्त कर राज्य के पुनर्गठन के तहत उसे दो केन्द्रशासित प्रदेशों में

विभाजित करना भारत का आंतरिक मामला है।

श्री श्रृंगला ने कहा कि ऐसा 12वीं बार है जब भारत ने अपने किसी राज्य का पुनर्गठन कर

उसे विभाजित किया है।

भारतीय राजदूत ने फॉक्स न्यूज को दिए गए साक्षात्कार में कहा कि जम्मू-कश्मीर के मुद्दे पर

भारत और पाकिस्तान के बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प के मध्यस्थता करने के प्रस्ताव का

अब कोई औचित्य नहीं रह गया है।

श्री श्रृंगला ने कहा, ‘‘ राष्ट्रपति ट्रम्प ने कहा था कि यदि भारत और पाकिस्तान चाहें

तो वह मध्यस्थता करने के लिए तैयार हैं, क्योंकि भारत ने इस प्रस्ताव को स्वीकार नहीं किया है

इसलिए इसका अब कोई औचित्य नहीं रह गया है।’’

भारतीय राजदूत ने ट्वीट किया, ‘‘ जम्मू-कश्मीर में सुशासन लागू करने और सामाजिक-आर्थिक न्याय

पहुंचाने के मुद्दे पर फॉक्स न्यूज के ब्रेटबेयर के साथ आज शाम मेरे साक्षात्कार का सीधा प्रसारण।’’

जम्मू-कश्मीर में मौजूदा हालात के बारे में पूछे गए सवालों का जवाब देते हुए

श्री श्रृंगला ने कहा कि हमें सत्य और तोड़-मरोड़ कर पेश की जाने वाली बातों में अंतर करने की जरुरत है।

उन्होंने कहा कि अनुच्छेद-370 को निरस्त कर जम्मू-कश्मीर को दो भागों में विभाजित कर

भारत ने केवल राज्य का पुनर्गठन किया है जो पूर्ण रूप से एक प्रशासनिक फैसला है।

श्री श्रृंगला ने कहा कि कई वर्षों से भारत सरकार की ओर से जम्मू-कश्मीर के लिए बड़े पैमाने पर

फंड दिया जा जाता रहा है लेकिन जमीनी स्तर पर लोगों तक इसका लाभ नहीं पहुंच पाता।

सरकार की ओर से लिए फैसले से राज्य में विकास को गति मिलेगी और निजी क्षेत्र समेत निवेश की संभावना भी बढ़ेगी।

भारतीय राजदूत ने कहा इससे कश्मीर और मजबूत होगा

इससे जम्मू-कश्मीर आर्थिक रूप से शेष भारत के साथ मजबूती के साथ जुड़ेगा।

उन्होंने कहा कि इंटरनेट समेत अन्य पाबंदियां केवल अस्थायी हैं और इन्हें केवल सुरक्षा की दृष्टि से लागू किया गया है।

पाबंदियों में कुछ ढील भी दी जा रही है।

उन्होंने दावा किया कि जम्मू-कश्मीर पर भारत के फैसले से अंतरराष्ट्रीय नियंत्रण रेखा पर कोई प्रभाव नहीं पड़ा है, इसलिए यह देश का आंतरिक मामला है।

भारतीय राजदूत ने कहा, ‘‘ हमने यह फैसला इसलिए लिया है क्योंकि हमने पाया है कि

पिछले 70 वर्षों के दौरान राज्य में विकास बुरी तरह प्रभावित हुआ है।’’

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