बशर अल-असद ने सत्ता के लिए दुनिया को झोंका युद्ध में

साल 2000 में बशर के पिता हाफिज अल-असद की मौत हो गई।

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बशर अल -असद को सीरिया की सत्ता विरासत में मिली है। असद उस परिवार से आते हैं, जो दशकों तक इस देश पर राज कर चुका है।

असद के वालिद हाफिज अल असद ने 1971 से सन् 2000 तक इस मुल्क पर अधिकार किया।

हाफिज अल असद के बाद इस राजनीतिक विरासत का

जिम्मा उनके बड़े बेटे बासिल अल असद को मिलना था।

लेकिन सन् 1994 में उनकी एक सड़क हादसे में मौत हो गई।

यही हादसा बशर अल असद के राजनीति में आने का सबब बना।

बशर अल-असद सीरिया से ही ग्रेजुएट हुए हैं। उन्होंने दमिश्क

यूनिवर्सिटी से 1988 में मेडिकल की पढ़ाई की थी। उच्च शिक्षा

के लिए वह लंदन चले गए थे। जब बासिल की मौत हुई, उस

वक्त बशर लंदन में ही थे। राजनीति में बशर को कोई खास

दिलचस्पी नहीं थी, लेकिन बासिल की मौत के बाद उनके पिता

ने उन्हें वापस दमिश्क बुला लिया। बशर अल-असद के सीरिया

लौटने पर उन्हें पहले 1994 में ही टैंक बटालियन कमांडर

बनाया गया। इसके बाद 1997 में वो लेफ्टिनेंट कर्नल बने और

1999 में उन्हें कर्नल बना दिया गया। साल 2000 में बशर के

पिता हाफिज अल-असद की मौत हो गई, जिसके बाद पारिवारिक

सत्ता को संभालने की जिम्मेदारी बशर ने उठाई और

सन् 2000 में ही बशर अल-असद सीरिया के राष्ट्रपति बन

गए। आज 18 साल बाद भी बशर सत्ता के शिखर पर

काबिज हैं। 2011 की अरब क्रांति भी उनकी कुर्सी नहीं हिला

सकी है। ये उनकी ताकत का ही नतीजा है कि 74 फीसदी

सुन्नी मुसलमान आबादी वाले सीरिया में 10 फीसदी से कम

आबादी वाले शिया समुदाय के बशर अल-असद निरंतर राज

कर रहे हैं। चार दशकों से चली आ रही इस सत्ता को बचाने

के लिए उन्होंने सीरिया को युद्ध का अखाड़ा बना दिया है।

जहां दुनिया के दो ताकतवर गुट आपस में जोर-आजमाइश कर रहे हैं और सीरिया की धरती पर पैदा हुए बेकसूरों को कब्र तक नसीब नहीं हो रही है।

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