बर्फ गलने के शोध में अब समुद्री सीलों की भी मदद लेंगे वैज्ञानिक

सीलों
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  • काफी गहराई तक गोता लगाते हैं वे
  • ताजा आंकड़ों से मिलेगी जानकारी
  • कई शहरों के डूब जाने का खतरा

विशेष प्रतिनिधि
नईदिल्ली : समुद्री सीलों की मदद से अब ग्लेशियरों के पिघलने की वास्तविक स्थिति का पता लगाया जाएगा।



अंटार्कटिका में तेजी से पिघलते हिमखंड अब वैज्ञानिकों की चिंता बढ़ा रहे हैं।

वैज्ञानिकों को आशंका है कि जिस तेजी से यहां के हिमखंड पिघल रहे हैं, उससे दुनिया के कई बड़े शहर इसकी चपेट में आ सकते हैं।

कुछ इलाकों में इसका असर दिखना प्रारंभ भी हो चुका है।

इसलिए अब वैज्ञानिकों ने समुद्र के अंदर की स्थिति का पता लगाने के लिए समुद्री जीव सील की मदद लेने का फैसला किया है।

यह समुद्री जीव नियमित तौर पर समुद्र के अंदर ढाई हजार फीट तक गोता लगाता रहता है।

वे पानी के भीतर तीस मिनट तक अपनी सांस रोक सकते हैं।

अत्यंत ठंडे पानी में भी उन्हें तैरने में कोई परेशानी नहीं होती।

इसलिए समुद्र के अंदर डूबे हिमखंडों की स्थिति का आकलन करने के लिए उनकी मदद ली जाएगी।

उनकी मदद से समुद्र के अंदर के आवश्यक आंकड़े और पानी में हो रहे बदलावों को पहचाना जा सकेगा।

वैज्ञानिक इसलिए भी सील की मदद लेना चाह रहे हैं क्योंकि समुद्र के जल के निरंतर गर्म होते जाने की वजह से हिमखंडों के पिघलने की गति भी तेज हो रही है।

पाइन आइलैंड इलाके में मैनहटन के आकार का एक हिमखंड टूटकर अलग हुआ है।

नासा ने इसकी पुष्टि भी कर दी है। इसके तेजी से पिघल जाने पर समुद्री जलस्तर में दस फीट तक की बढ़ोत्तरी हो सकती है।

इससे कई इलाके डूब की चपेट में आ जाएंगे।

दूसरी तरफ प्रशांत महासागर की गहराई में एक और बड़ा ज्वालामुखी फटने की तरफ बढ़ रहा है।

सीलों पर सेंसर लगाकर आंकड़ा लेने की है तैयारी

वैज्ञानिक मान रहे हैं कि दक्षिणी इलाके के एलिफेंट सील और वेडल सील में सेंसर लगाकर नियमित आंकड़े प्राप्त किये जा सकते हैं।

ये समुद्री जीव पानी के अंदर मछली पकड़ने के लिए आते जाते रहते हैं।

वे हर साल करीब 11 हजार बार गोता लगाते हैं।

इसके बाद वे अपनी त्वचा बदल लेते हैं।

इस बीच की अवधि में उनके शरीर पर लगे सेंसर वैज्ञानिकों को अंदर हो रहे बदलाव की महत्वपूर्ण जानकारी उपलब्ध करा देंगे।

मछली पकड़ने के लिए अलग अलग स्थान पर गोता लगाने वाले सीलों में लगें सेंसर अलग अलग स्थान की पक्की जानकारी देंगे।

इससे तेजी से आंकड़े प्राप्त हो पायेंगे।

वरना वैज्ञानिकों को सामान्य वैज्ञानिक उपकरणों की मदद से एक हजार ऐसे आंकड़े एकत्रित करने में 20 वर्ष लगे हैं।

नासा से मिले एक चित्र के मुताबिक अंटार्कटिका क्षेत्र का एक बहुत बड़ा हिमखंड समुद्र की तरफ खिसक रहा है।

समुद्र के अंदर उसके पूरी तरह पिघल जाने पर समुद्र का जलस्तर खतरनाक तरीके से बढ़ जाएगा।

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