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बड़ा दिलवाला बनकर आए राकेश वर्मा ने इलाज के लिए दिये पैसे

  • सरकारी व्यवस्था फेल तो सोशल मीडिया ने दिखाई ताकत

चांडिलः  बड़ा दिलवाला सोशल मीडिया की बदौलत ही समस्या को जान पाया और आगे

आकर इंसानियत दिखायी।  जब सरकारी व्यवस्था फेल हो गई तो सोशल मीडिया की

ताकत से एक मासूम बच्चे की इलाज शुरू होने जा रही हैं। प्रखंड के दिनाई गांव के अजित

दास के सात वर्षीय पुत्र चंदन दास विगत एक महीने से जिंदगी और मौत के बीच झूल रहा

है। उसके शरीर में कोई हरकत नहीं हो रही हैं। नाक में पाईप के सहारे पेय पदार्थ डाला जा

रहा है, जिससे उसे जीवित रखा गया है। अजित दास दिहाड़ी मजदूरी कर परिवार का भरण

पोषण करता है। आर्थिक स्थिति ठीक नहीं होने के कारण बच्चे का इलाज भी नहीं हो पा

रहा था। ऐसी परिस्थिति में जब इसकी जानकारी चावलीबासा के पंचायत समिति सदस्य

गुरुचरण साव को मिली तो उन्होंने सोशल मीडिया का सहारा लिया। सोशल मीडिया पर

बच्चे की मदद करने का गुहार लगाई गई। लोगों से आर्थिक मदद करने की अपील करते

ही लोग धड़ाधड़ ऑनलाइन रुपये भेजने लगे। गुरुचरण साव ने बच्चे की माँ का बैंक

एकाउंट नंबर एवं ऑनलाइन ट्रांजेक्शन नंबर सार्वजनिक कर दिया है। जिसमें लोग रुपये

भेज रहे हैं। वहीं, गुरुवार सुबह सेवा ही संकल्प है सामाजिक संस्था के संस्थापक राकेश

वर्मा पीड़ित बच्चे के घर पहुंच गए। यहां मरीज की गंभीर हालत देख उन्होंने दिल बड़ा 

करते हुए तुरंत पचास हजार रुपये आर्थिक मदद के रूप में दी। यह राशि मरीज के परिजनों

के हाथों सौंपी गई। राकेश वर्मा ने बड़ा दिल दिखाते हुए एक दिन पहले ही सोशल मीडिया

पर ही घोषणा कर दिया था कि वह बच्चे की इलाज के लिए स्वयं पचास हजार रुपये मदद

करेंगे। इसके अलावा क्षेत्र के कई लोगों ने अपनी क्षमता अनुसार मदद कर रहे हैं।

बड़ा दिल तो दूसरों ने भी अपील पर दिखाया

बताया जाता है कि करीब 25 दिन पहले चंदन दास को जमशेदपुर के एक निजी अस्पताल

में भर्ती कराया गया था। जहां करीब 16 दिनों तक इलाज चलने के बाद उसके स्वास्थ्य में

कोई सुधार नहीं हुई। वहीं, दूसरी ओर परिजनों के पास इलाज के लिए रुपये भी नहीं थे।

इसके कारण मरीज को घर लाया गया था। परिजनों का कहना है कि चंदन दास को ब्रेन से

संबंधित कोई बीमारी हुई हैं। जिसका इलाज अब कोलकाता के न्यूरोलॉजिकल विशेषज्ञ से

कराया जाएगा। हालांकि, इससे पहले पंसस गुरुचरण साव एवं अन्य लोगों ने ट्विटर पर

मदद की मांग किया था। जिसपर संज्ञान लेते हुए सूबे के स्वास्थ्य मंत्री बन्ना गुप्ता ने

जमशेदपुर एवं सरायकेला के उपायुक्त को इलाज कराने का निर्देश दिया था लेकिन,

स्वास्थ्य विभाग ने बच्चे की इलाज करने में असमर्थता जताई। कहा जा सकता है कि

परिजनों को सांत्वना देने के लिए स्वास्थ्य विभाग की ओर से मरीज को जमशेदपुर के

एमजीएम अस्पताल में भर्ती कराने की बात कही गई थी। लेकिन, कटु सत्य यह है कि

कोल्हान के किसी भी सरकारी अस्पताल में बच्चे के दिमाग की बीमारी का इलाज

व्यवस्था उपलब्ध नहीं है। बड़ा  दिल दिखाने वालों की मदद से बच्चे के ईलाज का इंतजाम

अब जाकर हो पा रहा है। 

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