पुलिस मुख्यालय की गुटबाजी से परेशान कई सीनियर अधिकारी

पुलिस की छवि पर पड़ रहा है प्रतिकूल प्रभाव

  • नहीं हो पा रही हर रोज एक अपराधी की गिरफ्तारी 
  • पुलिस मुख्यालय ने की नाराजगी जाहिर  
  • द्विवेदी के डीजीपी बनने के बाद कई चुनौतियों का सामना 

दीपक नौरंगी
भागलपुर : बिहार के नए पुलिस महानिदेशक ने डीजीपी का नया पदभार ग्रहण करने के बाद कई चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है।

पर्दे के पीछे पुलिस मुख्यालय में हो रही है गुटबाजी।

सरकार के मुखिया को है गुटबाजी की पूरी जानकारी ।

फिर भी पुलिस की मुख्यालय में बैठे एक सीनियर आईपीएस अधिकारी की कार्यशैली से नाखुश।

पुलिस मुख्यालय के कई सीनियर अधिकारी सांप्रदायिक मामले को लेकर कई सीनियर आईपीएस के तबादले पर लगी रोक।

आपराधिक घटनाओं को अंजाम देने वाले बदमाशों को पुलिस गिरफ्तार नहीं कर पा रही।

पुलिस मुख्यालय ने जाहिर की नाराजगी

राज्य स्तर पर आरोपियों की गिरफ्तारी काफी कम होने पर पुलिस मुख्यालय ने नाराजगी जाहिर की है।

पुलिस मुख्यालय ने सभी जिलों के एसएसपी/एसपी को पत्र लिख कहा है कि

अभियुक्तों की गिरफ्तारी नहीं होने से राष्ट्रीय स्तर पर बिहार राज्य की छवि पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा।

दिसंबर महीने की समीक्षा में सही तस्वीर सामने आयी
सभी जिलों से माहवार आपराधिक घटनाओं और उसमें हुई गिरफ्तारी का आंकड़ा मांगा गया था।

इस आंकड़े को भारत सरकार को भी भेजा गया है।

पुलिस मुख्यालय ने पिछले साल दिसंबर महीने की समीक्षा की। समीक्षा में स्थिति बहुत ही खराब पायी गयी।

गिरफ्तारी नहीं होने पर पड़ता है असर

आपराधिक घटनाएं होने के बाद उसे अंजाम देने वाले आरोपियों की गिरफ्तारी नहीं होने से कई स्तर पर प्रतिकूल असर पड़ता है।

घटना में शामिल नामजद अभियुक्त गिरफ्तार नहीं होते हैं, तो केस पेंडिंग रह जाता है।

केस पेंडिंग होने से समय पर कोर्ट में ट्रायल शुरू नहीं हो पाता जिससे आरोपियों को

समय पर सजा नहीं मिलती और पीड़ित को न्याय के लिए लंबा इंतजार करना पड़ता है।

केस पेंडिंग होने से पुलिस की कार्यशैली पर भी सवाल उठता है और कार्य का दबाव भी बढ़ता जाता है।

दिसंबर 2017 में राज्य का यह रहा हाल 
अपराध             केस दर्ज हुए आरोपियों की गिरफ्तारी
 हत्या              228          99
 हत्या की कोशिश     266          49
 बलात्कार           89           25
 अपहरण           636           96
 डकैती             34           21
 लूट               132          36
 गृह भेदन          286           32
 चोरी              2672         182
 सभी प्रकार का दंगा   861          115
 धोखाधड़ी           298          15
 दहेज हत्या         68            10

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