देश में पीएचडी धारक ने लिए नेट अनिवार्य नहीं, कॉलेजों में अब होंगे प्रोफेसर: जावड़ेकर

अब पीएचडी धारक ही होंगे नियुक्त, कुल प्रोफेसरों का दसवां हिस्सा वरिष्ठ होगा

नयी दिल्ली :पीएचडी धारकों को उच्च शिक्षा में प्राथमिकता दी जाएगी तथा कॉलेजों में प्रोफेसरों की बहाली में पीएचडी को अनिवार्य कर दिया जाएगा।

देश में उच्च शिक्षा की गुणवत्ता को बढ़ाने के लिए शिक्षकों की नियुक्ति के नियमों में

परिवर्तन करते हुए सरकार ने बुधवार को एक बड़ा फैसला किया जिसके तहत अब

कॉलेजोंं में भी प्रोफेसर होंगे और एपीआई(एसेसमेंट परफोमेंट इंडेक्स) प्रणाली को खत्म कर दिया गया है

नये शिक्षकों की नियुक्ति के बाद उन्हें अध्यापन के लिए एक महीने का कोर्स करना पड़ेगा।

मानव संसाधन विकास मंत्री प्रकाश जावड़ेकर ने आज यहां देश के विश्वविद्यालयों

और कॉलेजों में शिक्षकों की नियुक्ति के लिए न्यूनतम योग्यता को निर्धारित करने

की नयी नियमावली की घोषणा करते हुए यह जानकारी पत्रकारों को दी।

श्री जावड़ेकर ने बताया कि 2021 के बाद विश्वविद्यालयों में शिक्षकों की नियुक्ति के

लिए पीएचडी को अनिवार्य कर दिया गया है

कॉलेजों में भी सहायक प्रोफेसर(सेलेक्शन ग्रेड) की पदोन्नति के लिए भी पीएचडी को अनिवार्य किया गया है।

पांच सौ श्रेष्ठ रैंकिंग के संस्थानों के पीएचडी को मान्यता दी जाएगी

उन्होंने बताया कि नयी नियमावली में दुनिया के पांच सौ श्रेष्ठ रैंंकिंग विदेशी शैक्षणिक

संस्थानों से पीएचडी करने वाले लोगों को भी सहायक प्रोफेसर की नियुक्ति में मान्यता दी जाएगी

उनकी नियुक्ति के लिए विशेष प्रावधान किये जाएंगे।

श्री जावड़ेकर ने बताया कि कॉलेजों में शिक्षकों को शोध करने की जरूरत नहीं है बल्कि

उन्हें छात्रों को बेहतर ढंग से पढ़ाने की आवश्यकता है

इसलिए एपीआई प्रणाली को खत्म कर दिया गया है लेकिन यह एपीआई प्रणाली विश्वविद्यालय स्तर पर जारी रहेगी

विश्वविद्यालय के शिक्षकों को शोध कार्य पर अपना ध्यान केंद्रित करना होगा।

उन्होंने कहा कि कॉलेजों में शिक्षकों के अध्यापन कार्य के मूल्यांकन के लिए एक नयी

आकलन प्रणाली विकसित की जाएगी।

उन्होंने बताया कि कॉलेजों में शिक्षकों की नियुक्ति के लिए नेट अनिवार्य रहेगा

लेकिन अगर कोई उम्मीदवार पीएचडी डिग्री धारक हैं तो उसके लिए नेट अनिवार्य नहीं होगा

पर विश्वविद्यालयों में तीन साल के बाद नियुक्ति के लिए पीएचडी अनिवार्य होगी।

कॉलेजों में तीन साल बाद सहायक प्रोफेसर(सेलेक्शन ग्रेड) और प्रोफेसर बनने के लिए पीएचडी अनिवार्य होगा।

उन्होंने बताया कि 2010 के नियमों के अनुसार एमफिल और पीएचडी धारक शिक्षकों को इंसेटिव जारी रहेगी।

उन्होंने बताया कि नेट की परीक्षा जारी रहेगी और कॉलेज स्तर पर नियुक्ति के लिए यह अनिवार्य रहेगा।

मानव संसाधन विकास मंत्री ने यह भी कहा कि जिन शिक्षकों के लेक्चर मूक्स में होंगे उन्हें पदोन्नति में महत्व दिया जाएगा।

उन्होंने बताया कि विश्वविद्यालयों में प्रोफेसर के जितने पद होंगे उनका दसवां हिस्सा वरिष्ठ प्रोफेसर के रूप में नियुक्त किया जाएगा।

पदक विजेताओँ को बेहतर पद दिये जाएंगे

इसके अलावा विश्वविद्यालयों और कॉलेजों में ओलंपिक एशियाड और राष्ट्रकुल खेल के

पदक विजेताओं को सहायक निदेशक कॉलेज निदेशक या कॉलेज निदेशक और उपनिदेशक

तथा खेल निदेशक एवं शारीरिक शिक्षा निदेशक जैसे पदों पर नियुक्त किये जाएंगे।

यह पूछे जाने पर कि विश्वविद्यालयों में रोस्टर प्रणाली के कारण आरक्षित पदों में कटौती

को दूर करने के लिए सरकार क्या कदम उठा रही है,

श्री जावड़ेकर ने कहा कि सरकार विश्वविद्यालय स्तर पर आरक्षित पदों के पक्ष में है न कि विभाग और कॉलेज के स्तर पर आरक्षित पद होने चाहिए।

इसलिए सरकार दो जुलाई को उच्चतम न्यायालय में इस मुद्दे पर विशेष अनुमति याचिका

की सुनवाई के दौरान सरकार अपना पक्ष रखेगी और उन्हें उम्मीद है कि आरक्षित वर्ग के

शिक्षकों को न्याय मिलेगा।

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