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पश्चिम बंगाल के इलाकों में अब तक करोड़ों के जाली नोट हुए बरामद







  • इतनी कड़ाई के बाद भी जाली नोट का कारोबार जारी
  • बांग्लादेश की सीमा से आ रहे हैं जाली नोट
  • पुलिस और बीएसएफ लगातार कर रही कार्रवाई
  • नोटबंदी का असली मकसद अब तक सफल नहीं
प्रतिनिधि

मालदाः पश्चिम बंगाल के मालदा और आस-पास के इलाकों में पूरी सतर्कता के बाद

भी जाली नोट का कारोबार नहीं रोका जा सका है। लगातार पुलिस अपने सूचना तंत्र

के आधार पर जाली नोट बरामद कर रही है। लेकिन इतनी अधिक संख्या में जाली

नोटों का बरामद होना अब पुलिस के अलावा केंद्रीय एजेंसियों के लिए भी खतरे का

संकेत बन चुकी है। इस कारोबार में काफी लोग शामिल हैं, यह स्पष्ट होता जा रहा है।

साथ ही इसके तार सीधे तौर पर बांग्लादेश से जुड़े होने की एक नहीं कई बार पुष्टि

हो चुकी है। नोटबंदी के तीन साल बाद भी यह स्थिति कायम रहना अपने आप में

बड़ी चिंता का विषय है।

दरअसल जाली नोट और काला धन के नाम पर ही केंद्र सरकार ने नोटबंदी का वह

कड़ा फैसला लिया था, जिससे देश अब तक उबर नहीं पाया है। लेकिन मालदा और आस

पास के इलाकों में पुलिस और बीएसएफ के लोग लगातार जाली नोट बरामद कर रहे हैं।

इससे साबित हो जाता है कि नोटबंदी के जरिए जाली नोट का कारोबार बंद करने का दावा

गलत साबित  हो चुका है। मालदा जिला के पुलिस के आंकड़ों के मुताबिक वर्ष 2019 के

अक्टूबर माह तक सिर्फ दस महीनों  में पुलिस ने विभिन्न इऩलाकों से 34 लाक 36 हजार

रुपये के जाली नोट बरामद किये हैं।  इन घटनाओं के सिलसिले में 26 मामलों में

कुल 34 लोग गिरफ्तार भी किये गये हैं। जाली नोट के कारोबार में जिन लोगों का नाम

आया था, उनमें से काफी लोग अब भी गायब हैं। पकड़े गये और इस कारोबार से जुड़े

कई लोग बांग्लादेश के नागरिक हैं। इनलोगों ने स्वीकार किया है कि वे दरअसल

बांग्लादेश की सीमा से ही जाली नोट लेकर भारत आ रहे हैं।

पश्चिम बंगाल के इलाकों में कारोबार पर कार्रवाई लगातार जारी

गत 8 नवंबर 2016 को जब नोटबंदी की घोषणा की गयी थी। उसके ढाई महीने बाद ही

जाली नोट की पहली खेप यहां पकड़ी गयी थी। नये दो हजार नोटों की नकल बाजार में

कैसे आयी, इसका आज तक खुलासा नहीं हो पाया है। लेकिन बाद में इस कारोबार का

दायरा लगातार बढ़ता ही जा रहा है। पुलिस के आंकड़ों के मुताबिक तब से लेकर अब तक

52 लाख के जाली नोट यहां से बरामद किये जा चुके हैं। इस जाली नोट के कारोबार में

कालियाचक, वैष्णवनगर, चरिअनंतपुर, मोहब्बतपुर, श्मशानी, सुलतानगंज, मोजामपुर,

शोभापुर, पारदेवनापुर सहित अनेक इलाको में जाली नोट का कारोबार एक बड़ा धंधा

बन गया है।

मालदा मार्चेंट चैंबर ऑफ कॉमर्स के महासचिव जयंत कुंडू के मुताबिक नरेंद्र मोदी ने

जिस घोषणा के साथ इस नोटबंदी की बात कही थी, वह इन घटनाक्रमों से साबित हो

जाता है कि वह घोषणा विफल रही है। सिर्फ नोटबंदी से व्यापारियों का नुकसान भर हुआ

है। सरकार कहीं से कोई काला धन भी बरामद नहीं पायी है।

दूसरी तरफ पुलिस अधीक्षक आलोक राजोरिया कहते हैं कि पुलिस इस पर लगातार

कार्रवाई कर रही है। फिर भी यह दावा नहीं किया जा सकता है कि जाली नोट का कारोबार

पूरी तरह बंद हो चुका है।



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