पराजित शत्रु की हड्डी से बना लेते थे तलवार, प्राचीन अवशेषों से खुला नया राज

शत्रु
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  • नक्काशी भी होती थी हथियार पर 
  • घायल शत्रु को मारने में होता था इस्तेमाल 
  • पराजित की संपत्ति पर विजेता का अधिकार
प्रतिनिधि
नईदिल्ली : अपने शत्रु की हड्डी से बना लेते थे हथियार। उससे यह पता चलता था कि कौन कितना शक्तिशाली है।
कई बार तो घायल शत्रु को वे खा भी लिया करते थे।
घायल को मारने के लिए ही मानव हड्डी से तैयार तलवार का इस्तेमाल किया जाता था।
 प्राचीन काल में युद्ध में पराजय का एक अर्थ मौत की सजा भी होता था। इस बात को हमलोग पहले से ही जानते हैं।
अब यह पता चला है कि विजेता अपने शत्रु की हड्डी से तलवार बनाकर अपनी जीत का रिकार्ड बनाते थे।
न्यू गिनिया के जंगलों में मानव हड्डी के हथियार मिले हैं।
इसी से उस काल में युद्ध के पश्चात पराजित पक्ष के परिणाम का निष्कर्ष निकाला जा रहा है।
वहां से मानव हड्डी से निर्मित जो हथियार मिले हैं, वे मूलत: जांघ की हड्डी यानी फीमर बोन के हैं।
इंसान के शरीर की यह सबसे मजबूत हड्डी होती है। जो हथियार मिले हैं, उनमें नक्काशी भी की गयी है, जिससे
यह पता चलता है कि इन मानव हड्डी निर्मित हथियारों का प्रदर्शन भी किया जाता था।

मानव शत्रु के अलावा शुतुरमुर्ग की हड्डी से भी बनते थे तलवार

शत्रु
डार्ट माउंट कॉलेज के मानव विज्ञान विभाग के प्रोफेसर नाथाइनिएल डोमिने का कहना है कि मानव हड्डी से सिर्फ तलवार ही नहीं बल्कि छुरा भी बनाया गया था।
इनपर भी बाद में अच्छे तरीके से नक्काशी की गयी है। शोध में जांच दल को सभी किस्म के नक्काशीदार हथियार मिले हैं।
इसी तरह के हथियार बड़ी आकार के पक्षियों खासकर शुतुरमुर्ग के पैर की हड्डी से भी बनाये जाते रहे हैं।
लेकिन मानव हड्डी में हुई नक्काशी यह साबित करती है कि अन्य हड्डियों के मुकाबले इंसानी हड्डी अधिक मजबूत थी, इसी वजह से उनमें बेहतर नक्काशी की जा सकी है।
शोध दल के नेता को वहां एक बड़े आकार के बक्से में इस किस्म के अनेक हथियार देखने को मिले थे।
इनकी लंबाई करीब 12 ईंच थी। शोध के आगे बढ़ाकर इस बात का भी पता लगाया गया कि इन मानव निर्मित हथियारों का प्रयोग भी अत्यंत भयावह था।
युद्ध में तीर अथवा अन्य हथियार से घायल शत्रु की इसी तलवार से मारा जाता था।
कुछ मामलों में यह भी पता चला कि घायल शत्रु को बंदी बनाने के लिए भी इस हथियार का उपयोग होता था।
बाद में उस घायल को विजेता दल के लोग पकाकर खा लिया करते थे।
वैसे मानव भक्षण के विषय पर अब भी शोध दल में मतभेद है।
लेकिन सभी इस बात पर एकमत हैं कि दरअसल इस किस्म के हथियारों की संख्या से
यह तय होता था कि कौन कितना बड़ा आदमी है।
मानव हड्डी के तलवार बनाने की एक खास बात यह भी है कि किसी आम आदमी की हड्डी से बने
इस किस्म के हथियार का कोई सामाजिक महत्व था।
हड्डी से हथियार बनाने के पहले यह बताया जाता था कि फलां हड्डी किस व्यक्ति की है।
किसी महत्वपूर्ण शत्रु की हड्डी से ही हथियार बनाया जाता था।
इसके पीछे का तर्क यह था कि महत्वपूर्ण व्यक्ति की हड्डी से हथियार बनाने से मारे गये व्यक्ति
की शक्तियां भी हथियार रखने वाले के पास आ जाती है।
इसके आधार पर मारे गये व्यक्ति की संपत्ति पर जीत हासिल करने वाले का अधिकार भी हो जाया करता था।

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