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पंजाब में रोचक होता जा रहा है विधानसभा चुनाव का प्रचार




चुनावी चकल्लस

चुनावी गारंटी के आगे फीके पड़ रहे दूसरे वादे
दिल्ली का फार्मूला अब पंजाब में भी असरदार
सिद्धू का केजरीवाल के घर के बाहर धरना
सभी बड़े दलों के वोट बैंक पर सेंधमारी
राष्ट्रीय खबर

नईदिल्लीः पंजाब में अब चुनाव प्रचार अपने चरम पर पहुंच रहा है। इसके तहत भाजपा को छोड़कर सभी दल अपने अपने इलाके में पूरी तरह सक्रिय हो गये हैं। भाजपा का सांगठनिक ढांचा वैसे भी पहले से कमजोर था। अब किसके साथ गठबंधन करें, इस पर विचार जारी होने की वजह से निचले स्तर के कार्यकर्ता भी यह तय नहीं कर पाये हैं कि क्या किया जाए।




फिलहाल जो कुछ चल रहा है उसे बेहतर तरीके से समझने के लिए यह जान लें कि वर्ष 2017 के विधानसभा चुनाव में किस पार्टी को कितने वोट मिले थे। उस चुनाव में सबसे बड़ी पार्टी के तौर पर कांग्रेस उभरी थी, जिसे 38.5 प्रतिशत वोट मिले थे। दूसरे नंबर पर शिरोमणि अकाली दल था, जो भाजपा का उस दौर का सहयोगी था। उसे 25.2 प्रतिशत वोट मिले थे।

तीसरे नंबर पर आम आदमी पार्टी थी, जिनके प्रत्याशियों को 23.7 फीसद वोट मिले थे। भारतीय जनता पार्टी को 5.4, निर्दलीयों को 2.1, बसपा को 1.5, लोक इंसाफ पार्टी को 1.2 और नोटा को 0.7 प्रतिशत वोट मिले थे। इसके अलावा वाम दल और अन्य को भी कुछ न कुछ वोट मिले थे। इस बार के चुनाव में आम आदमी पार्टी ने निश्चित तौर पर अन्य दलों को अपनी गारंटी से परेशान कर दिया है।

दिल्ली की तर्ज पर स्कूल और अस्पताल निश्चित तौर पर ऐसी बातें हैं, जिन्हें यूं ही नजरअंदाज नहीं किया जा सकता है। दिल्ली में इस सबसे नई पार्टी ने ऐसा कर दिखाया है और अपने राज्य के बजटीय प्रबंध को और बेहतर बनाने में भी सफलता पायी है। लिहाजा अन्य दलों को इसके मुकाबले जनता को लोक लुभावन वादे करने पड़ रहे हैं, जिनकी इन दलों को अभ्यास नहीं है।

पंजाब में अब मतदाताओं को दिल्ली का फर्क दिखता है

दरअसल पंजाब और दिल्ली पास पास होने की वजह से पंजाब के लोगों को दिल्ली में हुए बदलाव और उसके बारे में विरोधियों का आरोपों की अपने तौर पर जांचने का भी मौका मिल जाता है। बड़े राजनीतिक दलों की चिंता और खासकर भाजपा की चिंता इस बात से भी है क्योंकि उसके पास अब शिरोमणि अकाली दल नहीं है।




कांग्रेस की परेशानी कैप्टन अमरिंदर सिंह का अलग होना है। ऐसे में चुनाव की गाड़ी को आगे ले जाना इन दोनों राष्ट्रीय दलों के लिए कठिन हो गया है। ऐसा इसलिए भी है क्योंकि इन दोनों दलों ने दिल्ली में भी लंबे समय तक राज किया है और उनके राज के बाद आम आदमी पार्टी की सरकार बनी है।

साथ ही भाजपा और कांग्रेस के लिए यह भी चिंता का विषय है कि पंजाब एक पूर्ण राज्य है। दिल्ली में पुलिस तथा उपराज्यपाल के भरोसे जो कुछ रोका जा सकता था, उसमें भाजपा ने कोई कसर नहीं छोड़ी थी। पंजाब में ऐसा करने का कोई अवसर नहीं होगा।

एक पूर्ण और खेती से खुशहाल राज्य की चुनौतियों को समझना आसान है और यह भी तय है कि अगर वाकई आम आदमी पार्टी ने पिछले पांच वर्षों में यहां संगठन को मजबूत करने का जो काम किया है, उससे अगर दस प्रतिशत भी उसके वोट बढ़ गये तो तख्तापलट हो जाएगा।

इसी वजह से अब दिल्ली के मॉडल की विफलता को साबित करने के लिए पंजाब प्रदेश कांग्रेस के अध्यक्ष नवजोत सिंह सिद्धू को केजरीवाल के आवास के सामने आयोजित धरना में शामिल होना पड़ रहा है।

चुनाव प्रचार में नई गारंटी भी दे रहे हैं केजरीवाल

दूसरी तरफ केजरीवाल अपने चुनाव प्रचार के दौरान एक के बाद एक गारंटी की घोषणा कर दूसरे दलों की परेशानी बढ़ाते चले जा रहे हैं। ऐसा इसलिए भी है क्योंकि जिस दल ने दिल्ली में अपनी बातों को सही साबित कर दिखाया है, वह अगर एक और पूर्ण राज्य में सत्ता पाने में कामयाब हो गया तो आने वाले दिनों में पूरे देश की राजनीति ही बदलती हुई नजर आयेगी।



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