नासा का पार्कर सोलर प्रोब सूर्य के और निकट पहुंचा

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  • सबसे तेज गति का रिकार्ड भी कायम

  • हैलियोस बी के गति के रिकार्ड को तोड़ा

  • यान ने 820 डिग्री तक की गर्मी झेल ली

  • ढाई हजार डिग्री तक गर्मी झेल सकता है यान

प्रतिनिधि

नईदिल्लीः नासा के पार्कर सोलर प्रोब ने एक साथ दो नये रिकार्ड स्थापित करने में सफलता पायी है।

यह यान सूर्य के और करीब पहुंचा है। अब तक कोई यान सूर्य के इतने करीब नहीं पहुंच पाया था।

इस क्रम में इस मानव निर्मित यान ने दो लाख 23 हजार दो सौ मील प्रति घंटे की रफ्तार भी हासिल कर ली है।

यह पूर्व के रिकार्ड से अधिक है। इससे पूर्व अमेरिका और जर्मनी द्वारा संयुक्त रुप से भेजे गये अंतरिक्ष यान हैलियोस बी के नाम सबसे अधिक गति का रिकार्ड था।

हैलियोस बी के सबसे तेज गति का रिकार्ड इस यान ने गत 29 अक्टूबर को ही तोड़ दिया था।

वीडियो देखें और पहले की खबर यहां पढ़े

नासा द्वारा जारी सूचना के मुताबिक इन दोनों रिकार्ड कायम करने के साथ साथ सबसे अच्छी बात यह है कि

सूर्य के इतने करीब से गुजरने के बाद भी यान ठीक ठाक काम कर रहा है।

पिछले 5 नवंबर को यह यान सूर्य के सबसे करीब से गुजरा था।

उस वक्त सूर्य की सतह से इस यान की दूरी मात्र 150 लाख मील थी।

एक पूर्व निर्धारित धुरी पर आगे बढ़ते हुए यह यान सूर्य के अत्यधिक ताप

और वहां की सौर आंधियों का भी अब तक सफलतापूर्वक सामना कर रही है।

वह सही तरीके से काम करते हुए नियमित आंकड़े और चित्र भी भेज रही है।

नासा के इस यान को सूर्य के अध्ययन के लिए ही भेजा गया है

मालूम रहे कि इस यान को सूर्य के अध्ययन के लिए ही भेजा गया है।

इस यान की मुख्य जिम्मेदारी अत्यंत करीब से सूर्य के सतह और केंद्र में चल रही गतिविधियों का अध्ययन करते हुए

उनके आंकड़े नासा तक पहुंचाना है।

दरअसल नासा के वैज्ञानिक यह जानना चाह रहे हैं कि

सूर्य की सतह पर चल रही सौर आंधियों की वास्तविक स्थिति क्या है।

इन आंधियों से सूर्य पर क्या कुछ प्रभाव पड़ रहा है।

साथ ही इन सौर आंधियों के साथ आने वाले प्रकाश किरणें पृथ्वी पर क्या प्रभाव छोड़ रही है।

अपनी इस यात्रा के दौरान खास तौर पर तैयार किया गया यह यान अत्यधिक ताप और विकिरण भी झेल रहा है।

यान के अंदर लगे यंत्रों के मुताबिक एक बार यान के अंदर का तापमान 820 डिग्री फारेनहाइट तक चला गया था।

यह यान के उस तरफ का तापमान है, जो सूर्य की तरफ था।

वैज्ञानिकों ने इस यान को कुछ इस तरीके से तैयार किया है

ताकि यह अगले चरण की यात्रा में ढाई हजार डिग्री फारेनहाइट तक की गर्मी झेल सकता है।

सूर्य के बिल्कुल करीब पहुंचने के दौर में इस यान पर पड़ने वाली गर्मी भी धीरे धीरे बढ़ती चली जाएगी।

मजेदार बात यह है कि यान पूर्व निर्धारित कार्ययोजना के तहत ही अपने मार्ग पर आगे बढ़ रही है।

नासा के सहायक प्रशासक थॉमस जुर्बूचेन के मुताबिक फिलहाल इस यान पर नासा का कोई नियंत्रण नहीं है।

यान को पहले से जो कुछ निर्देश दिये गये थे, यान उन्हीं के मुताबिक काम करता जा रहा है।

अपना काम पूरा करने के बाद यह यान फिर से पृथ्वी की तरफ लौटने के लिए पूर्व निर्देशित किया हुआ है।

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