नदियों पर इतना ध्यान पूरे देश को लगातार देना ही होगा

नदियों से चलता जीवन
Spread the love
  •  
  •  
  •  
  •  
  •  
  •  
  •  
  •  
  •  
  •  

नदियों पर ध्यान देने तथा उनके किनारे पेड़ लगाने की पहल एक अच्छी शुरूआत है।

वैज्ञानिकों ने स्पष्ट तौर पर यह चेतावनी दे दी है कि देश के कई इलाकों में रेगिस्तान बनने की प्रक्रिया प्रारंभ हो चुकी है।

एक अन्य रिपोर्ट में यह भी स्पष्ट कर दिया गया है कि

देश के कुछ इलाके इस मामले में हॉट स्पॉट के तौर पर पहचाने गये हैं।

इसलिए पर्यावरण को बचाने की दिशा में त्वरित कदम उठाया जाना निश्चित तौर पर एक सराहनीय कदम है।

राज्य सरकार ने नदी महोत्सव के माध्यम से इसकी बेहतर शुरूआत की है।

उम्मीद है कि अन्य राज्य भी इसी वर्ष में बारिश का मौसम रहने तक

इस दिशा में झारखंड के रास्ते पर चलने की कोशिश प्रारंभ कर देंगे।

झारखंड में एक ही दिन 24 जिलों की 24 नदियों के किनारे नौ लाख पौधे लगाये गये हैं।

इस वर्ष यह नदी महोत्सव आगामी 2 अगस्त तक चलाया जाने वाला है। इस अवधि में पूरे राज्य में दो करोड़ चालीस लाख पेड़ लगाने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है।

जिस गति और उत्साह के साथ लोगों ने इसमें भागीदारी दिखायी है,

उससे इस लक्ष्य को प्राप्त करना कठिन तो कतई नहीं लगता

बल्कि यह उम्मीद बंधती है कि पेड़ लगाने के इस कार्यक्रम में

राज्य शायद इस लक्ष्य से आगे भी निकल जाए।

पर्यावरण और भावी पीढ़ी की चिंता करने वालों के लिहाज से यह एक सराहनीय कदम है और ऐसे कार्यक्रमों को आगे भी जारी रखना चाहिए।

अंग्रेजों के शासनकाल से साठ के दशक तक यहां के वन विभाग में ऐसी व्यवस्था थी,

जिसमें पेड़ लगाना भी वन विभाग के जिम्मे था।

दूसरी तरफ एक खास अवधि तक पेड़ों को बड़ा होेन का अवसर भी तब प्रदान किया जाता था।

इससे जंगल का अनुपात कभी भी बिगड़ता नहीं था।

बाद के कालखंडों में यह प्रथा समाप्त हो गयी और वनों की कटाई रोकने के नाम पर

वह सारे नियम बंद कर दिये गये, जो जंगल को नियमित और स्वतंत्र रुप से बढ़ने का सुअवसर प्रदान करते थे।

शहरीकरण और औद्योगिक गतिविधियों की तरफ हमारा ध्यान केंद्रित होने

एवं आबादी विस्फोट की वजह से भी देश भर में तेजी से पेड़ काटे गये।

जिसका खामियजा हम अब भोगने लगे हैं।

अब स्थिति को सुधारने के साथ साथ भावी पीढ़ी के लिए इसे और बेहतर बनाने की जिम्मेदारी हमारी है।

इसलिए पेड़ लगाने के साथ साथ उन्हें बड़ा करने तक ध्यान देने तथा राज्य के वन

अनुपात बढ़ाकर ही हम पर्यावरण को पहले के जैसा बना सकते हैं।

यदि हम इसमें चूक गये तो स्थिति और तेजी से बिगड़ती चली जाएगी।

लिहाजा नदियों के किनारे पेड़ लगाकर हम वन संरक्षण के साथ साथ जल संरक्षण का

काम भी कर रहे हैं, जिनकी पूरे देश को जरूरत है।

मुख्यमंत्री रघुवर दास ने सही कहा कि वनों को संरक्षित करने के साथ और बढ़ाकर आनेवाली पीढ़ी को हरा भरा और स्वच्छ झारखंड सौंपना है।

श्री दास ने इस क्रम में पेड़ों से होने वाले लाभों को भी रेखांकित करते हुए कहा कि वनों से काफी लाभ है।

विज्ञान और आध्यात्म दोनों में पेड़ का महत्व है।

विज्ञान की दृष्टि से जहां हमें इनसे आॅक्सीजन, धरती को नमी, साफ हवा-पानी मिलता है, वहीं आध्यात्मिक रूप से मान्यता है कि हर वृक्ष में किसी न किसी देवता का वास होता है।

आर्थिक दृष्टिकोण से भी पेड़ का महत्व है।

साल, सागवान, टीक आदि के पेड़ लगाकर हम भविष्य में होनेवाला खर्च के लिए राशि सुरक्षित कर सकते हैं।

नदियों के किनारे पेड़ लगाने के बहुआयामी फायदे हैं

नदियों के किनारे ज्यादा से ज्यादा पेड़ लगाने से नदियों का कटाव रूकेगा और जमीन में नमी के कारण वृक्षों को पानी भी मिलता रहेगा।

पिछले साल 19,700 हेक्टेयर भूमि पर 2.75 करोड़ पौधे लगाये गये और 4600 हेक्टेयर प्राकृतिक वनों का पुनरूद्धार किया गया।

इस वर्ष वन विभाग द्वारा 15,300 हेक्टेयर में कुल 2.40 करोड़ पौधे लगाने के साथ 7000 हेक्टेयर प्राकृतिक वनों का पुनरुद्धार किया गया है।

साथ ही 1450 हेक्टेयर उजड़े बांस बखारों का भी पुनरुद्धार किया जा रहा है।

इससे हाथियों को वनों के भीतर ही पर्याप्त भोजन मिल पायेगा।

इससे वे वनों से बाहर आकर लोगों के खेत, खलिहान, घरों को क्षति नहीं पहुंचायेंगे।

हाथियों के लिए जंगल के भीतर ही भोजन की व्यवस्था करना मानव हित में भी है।

कई इलाकों में हाथियों का झूंड लगातार आबादी के करीब सिर्फ भोजन की तलाश में आ जाता है।

इस क्रम में सरकार को औद्योगिक विकास की तमाम योजनाओं को दरकिनार कर

हाथियों के आने जाने के रास्ते, जिसे एलिफेंड कॉरीडोर कहा जाता है, उसे भी बेहतर बनाने के लिए काम करना चाहिए।

औद्योगिकीकरण का हम विकल्प तैयार कर सकते हैं

लेकिन पर्यावरण हमारे लिए इस औद्योगिकीकरण से कहीं अधिक महत्वपूर्ण है

क्योंकि इससे सीधे तौर पर भावी पीढ़ी का बेहतर भविष्य जुड़ा हुआ है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

This site uses Akismet to reduce spam. Learn how your comment data is processed.