एनजीटी की फटकार के बाद दिल्ली सरकार ने वापस ली ऑड-इवन की याचिका

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 नई दिल्ली: एनजीटी की फटकार के बाद दिल्ली की अरविंद केजरीवाल सरकार ने पिछले 11 नवंबर को ऑड-इवन की योजना पर नेशनल ग्रीन ट्रिब्युनल (एनजीटी) के फैसले में बदलाव की मांग करनेवाली याचिका वापस ले ली है। एनजीटी ने फटकार लगाते हुए पूछा कि आप लेडीज स्पेशल बसें क्यों नहीं चलाते हैं।

आप ऑड-इवन पर्यावरण के लिए कर रहे हैं या आपका कोई और मकसद है। एनजीटी ने कहा कि दिल्ली के उन इलाकों के हालात बदतर हैं जिनको आप अपना वोटर कहते हैं।एनजीटी ने पूछा कि जब रिपोर्ट कहती है कि दोपहिया वाहनों से ज्यादा प्रदूषण होता है तो फिर आप अगर इसको छूट देते हैं।

आखिर आप हासिल क्या करना चाहते हैं। जब प्रदूषण उतना ही था तब भी आपने स्कूल खोल दिया। आप पेड़ों पर पानी छिड़क रहे हैं उससे प्रदूषण उस पर चिपक रहा है जो पेड़ पौधों को मार देगा। आपकी कोशिश होनी चाहिए थी कि प्रदूषण के कण नीचे आएं। क्या आपके लिए मजाक है ये कि आप किसी को भी अपने मन मुताबिक छूट दे देंगे। पिछली बार आपने कहा था कि चार हजार बसे आने वाली हैं पर क्या हुआ।

आप ऐसे हालात बनने का इंतजार करते रहे।पिछले 11 नवंबर को एनजीटी ने कहा था कि ऑड-इवन योजना में दोपहिया वाहनों को भी शामिल करें। आपातकालीन सेवा में लगे वाहनों को इससे छूट दी जाएगी। महिलाओं और सरकारी अधिकारियों को भी कोई छूट नहीं दी जाएगी। सीएनजी वाहनों को भी इससे छूट मिलेगी।एनजीटी ने दिल्ली ट्रैफिक पुलिस को ये आदेश दिया कि वो ट्रैफिक पर ट्रैफिक पुलिसकर्मी की तैनाती करें और 10 साल पुराने डीजल वाहनों और 15 साल पुराने पेट्रोल वाहनों पर नजर रखें। एनजीटी ने इस बात पर चिन्ता जताई कि सरकारी विभागों में समन्वय का अभाव है।

एनजीटी ने पूछा कि दिल्ली सरकार ने 4 गुना पार्किंग फीस बढ़ा दी है| आपने सोचा है कि आप लोगों पर कितना भार डाल रहे हैं। इसी वजह से लोग पार्किंग में नहीं खड़े करते बल्कि सड़कों पर खड़ी कर देते हैं। 4 गुना फीस बढ़ाने का फायदा तो पार्किंग वालों को ही मिलेगा। एनजीटी ने उत्तरप्रदेश सरकार से पूछा कि नोएडा और ग्रेटर नोएडा में उल्लंघन करनेवाले कितने लोगों के चालान काटे गए हैं।
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