दिल्ली की सत्ता से बेदखल कांग्रेस का आप से गठबंधन पर सवाल

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रासबिहारी

नईदिल्लीः दिल्ली की सत्ता से बेदखल करने वाली आम आदमी पार्टी से

कांग्रेस के नेता गठबंधन करने के लिए उतारू हैं।

गठबंधन भी दिल्ली कांग्रेस के नेताओं की मर्जी के खिलाफ।

आम आदमी पार्टी से गठबंधन करने के सवाल पर प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष

और पूर्व मुख्यमंत्री शीला दीक्षित समेत कई नेता इंकार कर चुके हैं।

वजह बताई है कि हम जनता में कौन सा मुहं लेकर जाएंगे।

कांग्रेस के आम कार्यकर्ता भी आप से गठबंधन के पक्ष में नहीं है।

पूर्व अध्यक्ष अजय माकन लगातार दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल

की झाडू हाथ से पकड़ने के लिए दवाब डाल रहे हैं।

उनका साथ दे रहे हैं दिल्ली कांग्रेस के प्रभारी पी सी चाको।

आप से गठबंधन के सवाल पर राहुल गांधी के सामने ही शीला और माकन की तीखी झडप हुई थी।

भारतीय जनता पार्टी और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विरोध के नाम पर कांग्रेस को अब तमाम राज्यों में सत्ता से बेदखल करने वालों से दोस्ती करनी पड़ रही हैं।

यह अलग बात है कि जो तर्क दिल्ली के लिए दिये जा रहे हैं वे उत्तर प्रदेश में लागू नहीं किए गए। उत्तर प्रदेश में सपा।

बसपा गठबंधन ने कांग्रेस की हैसियत के अनुसार दो सीटों अमेठी और रायबरेली छोड़ने का प्रस्ताव रखा।

मोदी को हराने का दावा करने वाले कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने सपा-बसपा का प्रस्ताव ठुकरा दिया।

बताया जाता है कि सपा की तरफ से राहुल गांधी को बाद में नौ सीटें देने का प्रस्ताव भी दिया गया पर इसे भी नामंजूर कर दिया।

दिल्ली में चाको का तर्क है कि दिल्ली नगर निगम के चुनाव में भाजपा को 35 फीसदी वोट मिले थे।

आप और कांग्रेस के वोट मिलाकर 50 फीसदी बैठते हैं।

पिछले नगर निगम चुनावों में आप को 28 फीसदी और कांग्रेस को 22 फीसदी वोट मिले थे।

चाको का कहना है कि कांग्रेस के हित में है कि मुकाबला त्रिकोणीय न हो।

इसके लिए गठबंधन जरूरी है।

कांग्रेस ने सबसे बड़े राज्य उत्तर प्रदेश में तो विपक्षी एकता की खातिर सपा-बसपा का प्रस्ताव नहीं माना।

बिहार में भी कांग्रेस राष्ट्रीय जनता दल के दवाब में 11 सीटों पर मान गई।

पश्चिम बंगाल में वाम मोर्चा ने 25 सीटों पर अपने उम्मीदवार घोषित कर दिए हैं।

पश्चिम बंगाल में माकपा और कांग्रेस में गठबंधन की बात पर

अभी तक आखिरी मोहर नहीं लगी है।

कई राज्यों में कांग्रेस ने गठबंधन के लिए कम सीटों पर लड़ना तय किया है।

अजय माकन और चाको के आप से गठबंधन की कोशिशों के बीच ही कांग्रेस को निशाना बनाया जा रहा है।

अरविंद केजरीवाल और दूसरे नेता कांग्रेस और भाजपा की मिलीभगत बता रहे हैं।

केजरीवाल ने तो कांग्रेस से हरियाणा में भी गठबंधन करने की अपील की है।

चाको तर्क दे रहे हैं कि आप और कांग्रेस मिलकर चुनाव लड़े तो दिल्ली की सातों सीट जाएंगे।

हैरान की बात यह भी है कि केजरीवाल की झाडू कांग्रेसियों के हाथ में थमाने के लिए

आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री चंद्रबाबू नायडू, राष्ट्रवादी कांग्रेस के अध्यक्ष शरद पवार,

पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री और तृणमूल कांग्रेस की अध्यक्ष ममता बनर्जी

राहुल गांधी और सोनिया गांधी पर दवाब बना रहे हैं।

शरद पवार ने खुद राहुल गांधी से इस मसले पर बात की।

विपक्षी एकता के नाम पर दिल्ली में कांग्रेसियों के विरोध के बावजूद

आप से गठबंधन की कोशिश हो रही है और अपने-अपने राज्यों में

विपक्ष के नेता कांग्रेस को ठेंगा दिखा रहे हैं।

ममता बनर्जी ने पश्चिम बंगाल में कांग्रेस को किनारे रखते हुए सभी 42 सीटों पर उम्मीदवार घोषित कर दिए हैं।

दिल्ली कांग्रेस की अध्यक्ष शीला दीक्षित की जानकारी के बिना चाको कांग्रेस कार्यकर्ता से सवाल पूछ रहे हैं कि गठबंधन हो या नहीं।

चाको दावा कर रहे हैं कि शीला दीक्षित को मना लिया गया और वह गठबंधन को राजी है।

कांग्रेस आलाकमान के दवाब में शीला दीक्षित चाहे केजरीवाल से गठबंधन को तैयार हो जाएं पर आम कांग्रेसी कार्यकर्ता इसके लिए तैयार नहीं है।

2013 में 49 दिन केजरीवाल की सरकार के चलाने के बाद कांग्रेस के नेता आप की झाडू थामने के पक्ष में नहीं हैं।

नेताओं को समझ नहीं आ रहा है कि अगर आप से गठबंधन हुआ

तो जनता में क्या मुहं लेकर जाएंगे।

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