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दक्षिणी ध्रुव ने इस बार ठंड का रिकार्ड बना दिया आसमान पर रंगों का खेल देखें वीडियो




पेरिसः दक्षिणी ध्रुव पर इस बार रिकार्ड ठंड पडी है। आंकड़े बताते हैं कि जब से तापमान को रिकार्ड करने का काम चल रहा है, तब से अब तक पहली बार इतनी अधिक ठंड यहां रिकार्ड की गयी है।




वैज्ञानिक इसे भी मौसम में हो रहे बदलाव का एक और परिणाम मान रहे हैं। इसकी वजह से वहां के बर्फ तेजी से पिघलते जा रहे हैं। 

दूसरी तरफ यहां औरारा भी बेहतर और अधिक फैला हुआ नजर आ रहा है। इस इलाके में रंगों का यह खेल देखने की पर्यटक यहां एकत्रित होते हैं। 

इस वजह से आसमान पर हो रहा है रंगों का खेल

इस बार यहां गरमी भी अधिक पड़ी थी और दर्ज रिकार्ड के मुताबिक चौथी बार यहां इतनी अधिक गरमी पड़ी थी। लेकिन इस बार के अप्रैल से लेकर सितंबर माह के बीच वहां शून्य से 61 डिग्री नीचे का तापमान भी दर्ज किया गया है, जो अपने आप में एक रिकार्ड है।

वर्ष 1957 से यहां तापमान को रिकार्ड करने का काम चल रही है। इसलिए यह पता चला है कि यह पिछले तीस वर्षों का सबसे कम तापमान का रिकार्ड है।

दक्षिणी ध्रुव का यह तापमान वहां के औसत तापमान से भी ढाई डिग्री नीचे हैं। नासा के ग्लोबल मॉडलिंग एंड एसिमिलेशन ऑफिस के वैज्ञानिक रिचर्ड कुलाथेर ने इसकी जानकारी दी है।

इस बारे में जानकारी रखन वाले वैज्ञानिकों ने बताया है कि दरअसल पृथ्वी के वायुमंडल की दूसरी सतह स्ट्रेटोस्फेयर में जबर्दस्त बदलाव की वजह से ऐसा हुआ है। इस बार ध्रुवीय इलाकों में स्ट्रेटोस्फेयर में अपेक्षाकृत तेज हवाएं चली है।




इसलिए मौसम में यह बदलाव दर्ज किया गया है। मौसम वैज्ञानिक एमी बटलर ने कहा कि स्ट्रेटोस्फेयर में ठंडी हवा ही अंटार्कटिका के ऊपर स्थिर जैसी अवस्था में होती है।

जब कभी पृथ्वी के वायुमंडल के ऊपर ओजोन की पर्त में छेद बड़ा हो जाता है तो ध्रुवीय इलाकों में बदलाव होता है।

दक्षिणी ध्रुव पर औरोरा का खेल अधिक आकर्षक

वायुमंडल के सबसे ऊपरी सतह पर यह ओजोन मौजूद होता है, जो पृथ्वी को सूर्य की खतरनाक अल्ट्रा वॉयोलेट किरणों से बचाता है।

जाड़े के मौसम में अंटार्कटिका के इलाके में शून्य से 98 डिग्री नीचे का तापमान भी सैटेलाइट में लगे उपकरणों से दर्ज किया गया है।

लेकिन गर्मी के मौसम में इतनी अधिक ठंड का दक्षिणी ध्रुव पर पड़ने का यह नया रिकार्ड है। इसके साथ ही वैज्ञानिक यह बता रहे हैं कि इस बार की अधिक गर्मी की वजह से यहां के इलाके पर बिछी बर्फ की चादर भी बहुत पतली हो गयी है।

कई स्थानों पर पहली बार बर्फ के नीचे की मिट्टी भी नजर आयी है। इस वजह से यह समझा जाना चाहिए कि समुद्र में अब पहले के मुकाबले अधिक पानी चला गया है।

जो मौसम के चक्र को बदलने वाला है और उसकी वजह से अनेक स्थानों पर गड़बड़ियां भी होंगी।



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