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टी रेक्स जैसे डॉयनासोर के दिमाग के अंदर प्राकृतिक एयरकंडिशनर




  • वैज्ञानिकों ने खोजा टी रेक्स के दिमाग ठंडा रहने का असली राज

  • कभी सबसे खतरनाक प्राणी था टी रेक्स डॉयनासोर

  • थर्मल कैमरे से हुई जांच में तापमान का पता चला

  • मगरमच्छ भी जबड़े के नीचे से ठंढक पाते हैं


प्रतिनिधि

नयीदिल्लीः टी रेक्स जैसे भयानक डॉयनासोर के बारे में नई जानकारी सामने आयी है।

वैज्ञानिकों ने खोजा है कि प्राचीन पृथ्वी का सबसे खतरनाक प्राणी यानी टी रेक्स डॉयनासोर आखिर इतनी चालाकी से काम कैसे करता था।

इस प्राणी के फॉसिलों के अध्ययन और जेनेटिक्स अनुसंधान के बाद यह निष्कर्ष निकाला गया है कि

दरअसल उसके दिमाग में एक प्राकृतिक एयर कंडिशनर जैसी प्रक्रिया काम करती थी।

इसी वजह से वह प्रतिकूल परिस्थितियों में भी ठंडे दिमाग से ही हमला किया करता था

और उस काल के सभी प्राणियों पर हमेशा ही भारी पड़ता था।

विज्ञान की कुछ महत्वपूर्ण सूचनाएं

एनॉटोमिकल रिकार्ड नामक एक वैज्ञानिक पत्रिका में इस अनुसंधान के बारे में विस्तार से जानकारी दी गयी है।

इसमें हर तथ्य की खोज के बाद ही वैज्ञानिकों ने यह नया निष्कर्ष निकाला है।

वर्तमान प्रजाति के इंसानों के धरती पर तैयार होने के करोड़ों वर्ष पूर्व ही डॉयनासोर की प्रजाति

इस पृथ्वी पर से विलुप्त हो गयी थी।

इसका कारण पृथ्वी पर अचानक एक विशाल उल्कापिंड के गिरने से उत्पन्न परिस्थितियां थी।

उस उल्कापिंड के गिरने के बाद जो आग पूरी दुनिया में तेजी से फैली, उसी में सारे डॉयनासोर अपने स्थान पर खड़े खड़े ही झूलस गये थे।

अब बताया जा रहा है कि इस प्रजाति के डॉयनासोर की खोपड़ी की संरचना के अध्ययन के बाद यह पता चल पाया है कि

हर प्रतिकूल परिस्थिति में वह अपने दिमाग ठंढा रखकर हमला कैसे किया करता था।

वैज्ञानिकों ने यह पाया है कि उसकी खोपड़ी के अंदर कुछ ऐसे खंड बने हुए थे

जो दरअसल इसके दिमाग की गर्मी को अलग कर दिमाग ठंढा रखने में मदद करते थे।

टी रेक्स के दिमाग की गर्मी विशेष खंड में चली जाती थी

दिमाग में उत्पन्न होने वाली अतिरिक्त गर्मी इन खानों में प्रवेश कर जाती थी और क्रियाशील दिमाग साधारण अवस्था में रहा करता था।

वैज्ञानिकों ने बताया है कि वर्तमान प्रजाति के हाथी भी कुछ ऐसी ही विधि का इस्तेमाल किया करते हैं।

अत्यधिक दिमागी गर्मी को वह अपने कान के पास से प्रवाहित होने वाली खून की नलियों तक पहुंचा देते हैं।

इससे हाथियों का दिमाग शांत रहता है।

शोधकर्ताओं ने पाया है कि टी रेक्स प्रजाति के डॉयनासोर की खोपड़ी के दोनों तरफ ऊपर वाले हिस्से में एक एक ऐसे खाने होते थे।

इन हिस्सों को उनका जबड़ा और दिमाग की अन्य मांसपेशियों से मदद मिलता था।

इन्हीं मदद की वजह से वे अपने स्थान पर लगातार बने रहते थे।

वर्तमान प्रजाति के घड़ियालों के अंदर भी ऐसे खाने मौजूद हैं लेकिन वे जबड़े के पास होते हैं

जबकि टी रेक्स के दिमाग के ऊपरी सतह पर यह खाली हिस्सा मौजूद होता था।


जेनेटिक विज्ञान की कुछ और रोचक खबरें


शोधकर्ताओं ने आधुनिक वैज्ञानिक उपकरणों के माध्यम से जब इन फॉसिलों की जांच की तो यह पाया कि

किस तरीके से यह दिमाग सामान्य और विशेष परिस्थितियों में काम किया करता था।

जांच के दौरान जब थर्मल कैमरे का इस्तेमाल किया गया तो यह पाया गया कि दिमाग का क्रियाशील हिस्सा इन खंडों की वजह से हमेशा शांत अवस्था में ही हुआ करता था।

इसकी वजह से उनके शरीर के खून का संचालन भी सामान्य गति से होता रहता था।

इससे वे हमेशा ही शांत रहते हुए अपने शिकार पर हमला किया करते थे।

दिमाग शांत होने की वजह से वे अन्य प्राणियों के मुकाबले अधिक चालाकी के साथ हमला करने में सक्षम थे।

दिमागी एयरकंडिशनर का काम कुछ अन्य प्राणियों में भी है

इस दिमागी एयरकंडिशनर के मौजूद होने की वजह से अब उनके दिमाग में मौजूद खाली इन दो हिस्सों के असली काम का भी खुलासा हो चुका है।




इसकी संरचना की जांच करने के दौरान यह भी पाया गया है कि इस प्रजाति के जबड़े से निकलने वाली

एक मजबूत मांसपेशी नीचे की तरफ आने के बाद नब्बे डिग्री के कोण से मुड़ते हुए दिमाग के ऊपरी हिस्से तक चली जाती थी।

ऐसा आम जानवरों में नहीं होता है लेकिन टी रेक्स प्रजाति के डॉयनासोर में यह मौजूद थे।

मिसौरी विश्वविद्यालय के प्रोफसर और इस शोध दल के सदस्य कैसी हॉलिडे ने इस बारे में कहा कि

अब इस प्रजाति के खून के प्रवाह को बेहतर तरीके से समझने में मदद मिली है।


भारतीय विज्ञान से संबंधित जानकारी


अभी के दौर में जब फ्लोरिया के एलिगेटर फॉर्म के मगरमच्छों की जांच थर्मल कैमरे से की गयी

तो पता चला कि उनके जबड़े के नीचे भी यही प्रक्रिया होती है।

इसी वजह से धूप से गर्मी जल्दी हासिल करने के लिए मगरमच्छ अपना जबड़ा खोलकर रोशनी को तेजी से अंदर पहुंचाते हैं ताकि वह इलाका गर्म हो।

लेकिन अधिक गर्मी के दौरान जब इस हिस्से को थर्मल कैमरे से जांचा गया तो यह हिस्सा काला नजर आया

यानी उस वक्त यह हिस्सा ठंढा था।

कुछ इसी तरीके की प्रक्रिया अब विलुप्त हो चुके टी रेक्स डॉयनासोर प्रजाति के दिमाग के ऊपरी हिस्सों में हुआ करती थी।


विज्ञान की कुछ महत्वपूर्ण सूचनाएं

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