टाटा ट्रस्ट के साथ केंद्रीय गृह मंत्रालय ने किया समझौता

टाटा ट्रस्ट का मुख्यालय
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  • झारखंड के 16 जिलों के विकास में सहयोग

  • देश भर के 115 जिला योजना में शामिल

  • हर जिला में होंगे दो-दो विशेषज्ञ

  • सामुदायिक विकास को तेज करने पर जोर

संवाददाता



रांची:  टाटा ट्रस्ट के साथ केंद्रीय गृह मंत्रालय (एमओएचए) ने

झारखंड के 16 जिलों में विकास को तेजी देने में सहयोग करने के लिये हाथ मिलाये हैं।

एमओएचए इन जिलों में समग्र ऐस्पीरेशनल डिस्ट्रिक्ट्स प्रोग्राम के अंतर्गत

केंद्रीय विकास गतिविधियों के लिये केन्द्र सरकार का नोडल मंत्रालय है।

इस प्रोग्राम के अंतर्गत देश भर के 115 जिलों को शामिल किया गया है।

एमओएचए और टाटा ट्रस्ट्स ने एक समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किये हैं।

इसके अंतर्गत टाटा ट्रस्ट द्वारा तकनीकी सहयोग उपलब्ध कराया जायेगा।

टाटा ट्रस्ट द्वारा इन प्रत्येक जिलों में दो प्रशिक्षित संसाधन तैनात किये जायेंगे, जिन्हें डेवलपमेंट फेलोज कहा जायेगा।

ये प्रशासन की इस तरह मदद करेंगे, जिससे कि सरकारी और गैर-सरकारी एजेंसियों के कार्यक्रमों

को सम्मिलित रूप से लागू किया जा सके और तेजी से विकास हो सके।

टाटा ट्रस्ट के सहयोग का निर्माण देश भर में स्वच्छ भारत मिशन और चुनिंदा राज्यों में

ग्रामीण उत्थान कार्यक्रमों में संगठन के हस्तक्षेपों के अनुरूप किया गया है।

इन प्रोग्राम्स के अंतर्गत ट्रस्ट द्वारा संसाधनों को नियुक्त किया गया है,

जो ढेरों सामुदायिक विकास परियोजनाओं को लागू करने में प्रशासन की मदद कर रहे हैं।

 टाटा ट्रस्ट की स्थापना 1892 में जमशेदजी टाटा ने की थी

वर्ष 1892 में स्थापना के बाद से, भारत की सबसे पुरानी परोपकारवादी कंपनी,

टाटा ट्रस्ट ने समुदायों के जीवन में स्थायी अंतर लाने में अव्वल भूमिका निभाई है।

अपने संस्थापक जमशेदजी टाटा की सक्रिय परोपकारवादिता सिद्धांतों और उनके विजन से प्रभावित

टाटा ट्रस्ट का उद्देश्य स्वास्थ्य देखभाल और पोषण, जल और स्वच्छता, शिक्षा, ऊर्जा, ग्रामीण उत्थान,

शहरी गरीबी उन्मूलन, कला, वास्तुशिल्प और संस्कृति के क्षेत्र में विकास को बढ़ावा देना है।

टाटा ट्रस्ट के कार्यक्रम प्रत्यक्ष कार्यान्वयन, साझेदारी और अनुदान बनाने के माध्यम से अस्तित्व में आए हैं।

ये कार्यक्रम नए-नए विचारों से चिन्हित किए गए और ये देश के लिए काफी प्रासंगिक है।

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