चीन का अंतरिक्ष यान चांद के दूसरे हिस्से पर उतरा

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  • हल्के अंधेरे में कैमरे ने देखा विशाल गड्डा
  • घनघोर अंधेरा नहीं है चांद के इस छोर पर
  • चांद की देवी के नाम पर यान का नाम चेंग 4
  • पौधों के बीज और कीट पतंगों के अंडे भी उतारे गये

प्रतिनिधि

नईदिल्लीः चीन का अंतरिक्ष यान चांद पर सकुशल उतर चुका है।

इस यान ने पहली बार चांद के उस इलाके पर उतरने का काम किया है,

जिस तरफ अब तक कोई अभियान नहीं हुआ था।

इस यान में लगे कैमरे ने कुछ अद्धुत तस्वीरें भी भेजी हैं।

इनमें वहां नजर आने वाला एक विशाल गड्डा चर्चित हुआ है।

वैसे सोशल मीडिया तथा कई अन्य इंटरनेट प्लेटफॉर्मों पर चीन के चंद्र अभियान के

नाम पर फर्जी तस्वीरें भी चलायी जाने लगी हैं,

जिनमें वहां पर नये निशान, भवन और अंतरिक्ष के दूसरे प्राणियों को होने की कहानी रची गयी है।

वैसे चांद के इस छोर पर घना अंधेरा होने की चर्चा को भी इस यान ने गलत प्रमाणित कर दिया है।

यान द्वारा भेजी गयी तस्वीरों के विश्लेषण से चीन के वैज्ञानिक इस नतीजे पर

पहुंचे हैं कि वहां घना काला अंधेरा बिल्कुल भी नहीं है।

अलबत्ता पृथ्वी के उल्टे छोर पर होने की वजह से रेडियो तरंगों के प्रयोग में पृथ्वी की कोई बाधा यहां तक नहीं पहुंचती।

अंतरिक्ष अनुसंधान में चीनकी इस सफलता के बाद अंतरिक्ष की होड़ में उसने अपनी दमदार उपस्थिति दर्ज करा ली है।

इस चंद्र अभियान का नाम चीन ने चेंग 4 रखा था।

चीन के इस यान का नाम प्राचीन चंद्रमा की देवी पर रखा गया

वहां की प्राचीन किंवदंतियों के अनुसार चेंग एक देवी है जो चांद पर ही रहा करती थी।

इस यान को दिसंबर के प्रारंभ में छोड़ा गया था।

गुरुवार को यह यान चीन की समय के मुताबिक दिन के 10 बजकर 26 मिनट पर चांद के दक्षिण छोर पर उतरने में कामयाब रहा।

यान ने वहां उतरते ही अपने कैमरों की मदद से आस-पास की तस्वीरें पृथ्वी पर स्थित अपने नियंत्रण कक्ष तक भेजी।

चीन की अंतरिक्ष एजेंसी सीएनएसए ने दावा किया है कि अब वह भी अंतरिक्ष विज्ञान में किसी और से कम नहीं है, यह साबित हो चुका है।

इस अभियान दल के प्रवक्ता यू गुओविन ने कहा कि इस यान को भेजकर

चीन वहां के लघु तरंग संपर्क माध्यम से रेडियो संपर्क बहाल करने की संभावनाओं की तलाश करने वाला है।

इससे वहां की संरचना से इस सौर जगत की सृष्टि और तारों के बनने के बारे में भी नई जानकारी मिल सकती है।

चांद के इस इलाके में यान को उतारने में मिली सफलता के बाद ही

चीन के अंतरिक्ष विज्ञान को गंभीरता से लिया जाने लगा है।

इस क्षेत्र में काफी असमान इलाके हैं और यह हमेशा पृथ्वी से नजर भी नहीं आता।

अब अगर वहां से वाकई रेडियो संकेत स्थापित हो पाते हैं तो यह एक महत्वपूर्ण उपलब्धि होगी।

चीन के इस यान में कैमरों के अलावा एक शक्तिशाली रडार भी लगा है,

जो जमीन के अंदर की स्थितियों का पता लगा सकता है।

इसलिए समझा जा रहा है कि दरअसल सभी अंतरिक्ष अभियान अन्य ग्रहों पर मौजूद धातुओ और तत्वों की खोज के लिए भी है।

वैसे चांद पर उतरने वाले इस यान पर एक कैप्सूल के अंदर पेड़-पौधों के बीज और कीट पतंगों के अंडे भी हैं।

इन सभी को वहां विकसित होने लायक संसाधन भी इसमें उपलब्ध कराये गये हैं।

इसके माध्यम से वैज्ञानिक चांद पर जीवन की संभावनओं को तलाशने का प्रारंभिक परीक्षण करना चाहते हैं।

कुछ वैज्ञानिकों का मानना है कि अगर चांद के कम गुरुत्वाकर्षण में पौधो विकसित हो पाये

तो वे धीरे धीरे वहां का माहौल बदलकर नई जीवन प्रणाली स्थापित कर सकते हैं।

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