कोलकाता की लड़की नंदग्राम से बरामद, मानव तस्करी रैकेट का भंडाफोड़, सात आरोपी गिरफ्तार

पश्चिम बंगाल से मानव तस्करी कर लायी गयी एक युवती समेत दो युवतियों को हावड़ा और गाजियाबाद की सिहानीगेट पुलिस ने दबिश देकर नंदग्राम से बरामद किया है. युवती को देह व्यापार के लिए मेरठ और गाजियाबाद में दो बार बेचा गया. पश्चिम बंगाल पुलिस ने मानव तस्करी के आरोप में तीन महिलाओं समेत सात लोगों को भी गिरफ्तार किया है.

पुलिस के मुताबिक, उलबेड़िया, हावड़ा (पश्चिम बंगाल) की रहने वाली 19 वर्षीय युवती को शरीफुल नाम का युवक शादी का झांसा देकर चार अप्रैल 2018 को साथ ले गया था. युवती के परिजनों ने थाना उलबेड़िया में अपहरण का केस दर्ज कराया हुआ है. दो दिन शरीफुल ने युवती को साथ रखा और पांच अप्रैल को बबलू मुल्ला नाम के युवक को सौंप दिया. सात अप्रैल को युवती को देह व्यापार के लिए गाजियाबाद लाकर 70 हजार रुपये में एक मोटी नाम की महिला के हाथों बेच दिया. युवती को नंदग्राम में भारती शर्मा नाम की महिला के घर में रखकर देह व्यापार कराया जा रहा था. युवती को देह व्यापार के लिए मेरठ में किसी अन्य व्यक्ति के हाथों बेचा गया था. तभी से वह देह व्यापार के नर्क में जीने को मजबूर थी.

पश्चिम बंगाल पुलिस ने आरोपी बबलू मुल्ला, शरीफुल गाजी और एक अन्य महिला अजमेरी को उलूबेड़िया में गिरफ्तार कर लिया था. उनसे पूछताछ में मिले सुराग के बाद पश्चिम बंगाल पुलिस की एसआइ मंगलवार को गाजियाबाद पहुंची थीं. उन्होंने सिहानीगेट थाना पुलिस को साथ लेकर नंदग्राम में दबिश दी और मानव तस्करी कर लायी गयी युवती को बरामद कर लिया. पुलिस ने यहां से एक अन्य युवती को भी बरामद कर उसके पति के सुपुर्द कर दिया है. वह अपनी मर्जी से यहां रह रही थी. पुलिस ने मानव तस्करी के आरोप में नंदग्राम, गाजियाबाद निवासी भारती शर्मा, मेरठ जागृति विहार निवासी सोनिया उर्फ मोनिका, उसका पति राकेश उर्फ देवेंद्र यादव, सेक्टर-9 शास्त्री नगर मेरठ निवासी महिला संजू, जागृति विहार निवासी रुचि, श्रद्धापुरी मेरठ निवासी मुकेश और शास्त्रीनगर चुंगी निवासी वसीम को गिरफ्तार किया है. एसएसपी वैभव कृष्ण ने बताया कि कोर्ट से ट्रांजिट रिमांड पर पीड़िता और आरोपियों को पश्चिम बंगाल पुलिस हावड़ा ले गयी.

सात दिन के पैकेज पर भेजी जाती थी युवती
पुलिस के मुताबिक वेश्यावृत्ति का धंधा चलाने वाले लोग युवती को सात दिन के पैकेज पर मेरठ और आसपास के शहरों में भेजते थे. यह पैकेज तीन से पांच हजार रुपये में बुक होता था. हालांकि पैकेज लेने वाले लोग ज्यादा रकम में युवती को आगे भेजते थे. युवती के जाने से इंकार करने पर उसके साथ मारपीट की जाती थी.

नंदग्राम चौकी इंचार्ज निलंबित
नंदग्राम में वेश्यावृति का धंधा बड़े स्तर पर चल रहा था. बावजूद इसके स्थानीय चौकी पुलिस ने कभी न तो यहां छापामारी की और न ही इसकी जानकारी जुटायी. यहां छापामारी की गयी होती तो मानव तस्करी कर लायी गयी युवती पहले ही बरामद हो गयी होती. चौकी इंचार्ज रविंद्र यादव की लापरवाही मानते हुए एसएसपी ने उन्हें निलंबित कर दिया है.

अनजान पर भरोसा करने की चुकाई कीमत
किशोरी ने बताया कि मार्च के महीने में उसे एक अनजान नंबर से कॉल आयी थी जिसे पहले उसने रांग नंबर सोचकर इग्नोर कर दिया. इसके बाद उस नंबर से कई कॉल्स आयीं, सामने वाले ने अपना नाम अशरफुल बताया. रोजाना बातचीत होने लगी थी, इसलिए हम दोनों की दोस्ती हो गयी. अशरफुल ने खुद को अमीर घर का बताया था. वहीं, उसके परिवार की माली हालत अच्छी नहीं थी. उसके पांच भाई-बहन हैं. माता-पिता बुनाई का कार्य करते थे, जिससे कुछ खास आमदनी नहीं होती थी.

4 अप्रैल को वह मां को उलेड़ियाया में एक अस्पताल में लेकर गयी थी. वहां अशरफुल भी पहुंच गया. ऐसे में वह बेहतर जीवन की चाह में अशरफुल के साथ चली गयी. अशरफुल शादी करने की बात बोलकर उसे गाजियाबाद लाया था, लेकिन यहां आकर उसने ऐसा नहीं किया. उसने उसे देह व्यापार के नरक में झोंक दिया. कुछ दिन बाद उसे पता चला कि अशरफुल ने उससे दोस्ती सिर्फ इसी उद्देश्य के लिए की थी. अशरफुल पहले से ही शादीशुदा था और उसका एक बेटा भी था.

‘सामान की तरह पैकेज में मुझे बेचा गया’
पीड़िता ने नम आंखों के साथ बताया कि उसे गाजियाबाद लाते ही 30 हजार रुपये में बेच दिया गया था. इसके बाद उसे बेचने का सिलसिला ही शुरू हुआ. उसे किसी एक को नहीं कई लोगों को पैकेज के रूप में बेचा गया था.10 दिन एक जगह तो 10 दिन दूसरी जगह पर रहा करती थी. जहां उससे देह व्यापार करवाया जाता था. एक व्यक्ति एक हजार रुपये देता था जिसमें से 900 रुपये मुझे लेकर गये व्यक्ति को देने होते थे, 100 रुपये मुझे मिलते थे. जब उन्हीं रुपयों को इकट्ठा कर दोबारा गाजियाबाद आती थी तो वे रुपये भी मारपीट कर मुझसे छीन लिये जाते थे. सोनिया और उसका पति राकेश मुझे हर तरह से तोड़ रहे थे. मैंने कुछ दिन बीतने के बाद यहां से निकलने की उम्मीद छोड़ दी थी.

मारपीट और सिगरेट से हाथ भी जलाते थे
पीड़िता ने बताया कि पूरे दिन उसके जिस्म को बेचा जाता था. जब वह उनकी बात मानने से इनकार करती थी तो उसकी बेरहमी से पिटाई की जाती थी. इस पर भी नहीं मानने पर उसे सिगरेट से जलाया जाता था. अंत में मजबूर होकर उसे उनकी बात माननी ही पड़ती थी. किशोरी ने बताया कि उसे खाने-पीने को भी नहीं दिया जाता था. हर वक्त कोई न कोई उसके साथ होता था. इसके चलते वह कभी उस नरक से निकलने की सोच भी नहीं पाती थी.
बाकी लड़कियों ने इसे अपनी जिंदगी मान लिया

किशोरी ने बताया कि उसके अलावा और भी लड़कियां वहां थीं, जो कुछ भी नहीं बोलती थीं. जब उसने उनसे मदद मांगी तो उसे जवाब मिला ‘अब जिंदगी ऐसे ही कटेगी’ पुलिस की कार्रवाई के वक्त भी उन लड़कियों ने कुछ नहीं बोला था. पीड़िता ने बताया कि इस धंधे में एक महिला भी उसे मिली जो एक बच्चे की मां थी और मजबूरी में देह व्यापार में आ गयी थी. वह रुपये मिलने पर गाजियाबाद से मेरठ आया करती थी. पुलिस ने उसे भी बरामद किया है.
बंगाल से एनसीआर तक सात बार बिकी किशोरी
जिस्मफरोशी का धंधा कराने वाले गिरोह से छुड़ाई गयी पश्चिम बंगाल के हावड़ा की किशोरी बेहतर जिंदगी का सपना संजोये एक अनजान युवक के साथ घर से निकली थी. जिंदगी बेहतर तो हुई नहीं, बल्कि नरक से भी बदतर हो गयी. किशोरी ने पुलिस को बताया कि पिछले तीन महीने उसने नरक से बदतर हालात में गुजारे हैं. मानव तस्करी और देह व्यापार कराने वाले गैंग के चंगुल से आजाद हुई पीड़िता ने अपने दर्द की दास्तान इसी लाइन के साथ शुरू की.

किशोरी ने बातचीत में कहा कि उसने इन तीन महीनों में जिस तरह के जुल्म और ज्यादती सही है, वह रूह को कंपाने वाली है. उसने कहा कि जिस जगह से वह बाहर आयी है, उससे खराब जगह और कुछ नहीं हो सकती. किशोरी काफी डरी हुई है, बात-बात में अपने ऊपर हुए जुल्मों को याद कर सिहर उठती है.

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