उच्चतम न्यायालय में पहली बार वकील से सीधे महिला जज बनेंगी इंदू मल्होत्रा

इंदू मल्होत्रा को 2007 में वरिष्ठ वकील का दर्जा दिया गया था।

उच्चतम न्यायालय कोलेजियम ने वरिष्ठ वकील इंदू मल्होत्रा और उत्तराखंड हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश केएम जोसेफ को सुप्रीम कोर्ट का न्यायाधीश बनाने की सिफारिश की है।

इंदू मल्होत्रा पहली महिला वकील हैं जिन्हे सीधे सुप्रीम कोर्ट का जज बनाए जाने की सिफारिश की गई है।

कोर्ट कोलेजियम ने सरकार से इन दोनों ही लोगों को सुप्रीम कोर्ट का जज

बनाने की सिफारिश की है। इंदू मल्होत्रा को 2007 में वरिष्ठ वकील का

दर्जा दिया गया था। वे सुप्रीम कोर्ट में अभी तक नियुक्त हुईं सातवीं महिला जज

होंगी। अभी फिलहाल सुप्रीम कोर्ट में आर. भानुमति अकेली महिला जज हैं।

जस्टिस केएम जोसेफ फिलहाल उत्तराखंड हाईकोर्ट के जज हैं। वे उत्तराखंड

में राष्ट्रपति शासन का आदेश रद करने वाली पीठ में शामिल थे। उसके बाद

उनके स्थानांतरण की चर्चाएं रहीं लेकिन उत्तराखंड से उनका स्थानांतरण नहीं

हुआ।सुप्रीम कोर्ट 1950 में बना उसके 39 साल बाद 1989 में एम फातिमा बीवी

सुप्रीम कोर्ट की पहली महिला जज नियुक्त हुईं। फातिमा बीवी केरल हाईकोर्ट से

सेवानिवृत होने के बाद सुप्रीम कोर्ट में जज नियुक्त हुईं थी। वे 29 अप्रैल 1992 को

सुप्रीम कोर्ट से सेवानिवृत हुईं। बाद में वे तमिलनाडु की राज्यपाल भी नियुक्त हुईं।

कोर्ट में दूसरी महिला जज सुजाता वी मनोहर हुईं जिन्होंने जज के रूप में

अपने कैरियर की शुरूआत बाम्बे हाईकोर्ट जज से की थी। वे सुप्रीम कोर्ट में 8

नवंबर 1994 से 27 अगस्त 1999 तक न्यायाधीश रहीं। जस्टिस सुजाता मनोहर

के सेवानिवृत होने के करीब पांच महीने बाद जस्टिस रूमा पाल सुप्रीमकोर्ट

की जज बनीं। जस्टिस पाल सबसे लंबे समय तक रहीं।

जस्टिस रंजना प्रकाश देसाई की सेवानिवृति के करीब दो महीने पहले सुप्रीम कोर्ट की वर्तमान महिला जज आर. भानुमति सुप्रीम कोर्ट जज नियुक्त हुईं।  सुप्रीम कोर्ट के 67 सालों के इतिहास में सिर्फ दो बार एक साथ दो महिला जज रहीं।

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