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आत्मनिर्भरता से ही भारत आगे बढ़ेगा पी एम मोदी ने देश से कहा

  • जिन्होंने अपने लोग गंवाये उनके प्रति संवेदना

  • संकट प्रारंभ हुआ तो हमारे पास संसाधन नहीं थे

  • पूरी दुनिया को बदल गया एक अति सुक्ष्म वायरस

प्रतिनिधि

नईदिल्ली: आत्मनिर्भरता का मंत्र ही देश को तरक्की के रास्ते पर आगे ले जाएगा। इसी

सिद्धांत पर हमारा देश वसुधैव कुटंबकम की सोत से दुनिया को राह दिखायेगा। प्रधानमंत्री

नरेंद्र मोदी ने आज राष्ट्र के नाम अपने संबोधन में कल शाम देश को आगे बढ़ने के लिए

आत्मनिर्भरता की बात कही।

कोरोना संकट का उल्लेख करते हुए आत्मनिर्भरता के मुद्दे पर उन्होंने कहा कि इस वायरस

ने पूरी दुनिया  को तबाह कर रख दिया है। यह ऐसी परिस्थिति हैं जिसकी कल्पना नहीं की

गयी थी। लिहाजा इस संकट को हम हम युद्ध जैसी भीषण परिस्थिति मान सकते हैं। इस

लड़ाई में पूरी दुनिया में लाखों लोग काल कवलित हुए हैं। भारत में भी अनेक लोगों ने

अपने परिजन गंवाये हैं। इसलिए मैं उन सभी परिवारों को अपनी संवेदनाए व्यक्त करते

हैं। श्री मोदी ने अपने इस संबोधन में मुख्य तौर पर कोरोना से लड़ाई में भारत की

तैयारियों और उपलब्धियों की चर्चा की। उन्होंने कहा कि जब कोरोना का हमला हुआ तो

देश के पास पीपीई किट नहीं थे, एन 95 मास्क भी नाममात्र के थे लेकिन आज इन दोनों

के मामले में भारत किसी और पर आश्रित नहीं है।

आत्मनिर्भरता से अपने प्राचीन गौरव को हासिल करेंगे

श्री मोदी ने देश की आत्मनिर्भरता के मोर्चे पर  अब तक की उपलब्धियों का उल्लेख करते

हुए कहा कि भारत में कोई भी काम हो, उसका असर पूरी दुनिया पर पड़ता है। इस क्रम में

उन्होंने खुले में शौच, पोलिया से मुक्ति तथा अलग से योग के प्रति दुनिया को नया

रास्ता दिखाने का काम कर रही है। हमें यह नहीं भूलना चाहिए कि भारतीय अवधारणा

पूरी दुनिया हमारी है। हम हरेक को अपना मानते हैं। इसलिए अब भी भारत इसी सोच के

साथ कोरोना की लड़ाई अपनी आत्मनिर्भरता के साथ जीत सकता है।

उन्होंने कहा कि भारत का गौरवपूर्ण इतिहास इस बात का प्रमाण है कि हम पहले भी विश्व

के कल्याण की राह पर ही चलते रहे हैं।

देश गुलामी की जंजीर में जकड़ने के बाद ठहर से गये थे। आजाद भारत फिर से विश्व

कल्याण की राह पर चल पड़ा है। तकनीकी तौर पर इस सदी के प्रारंभ में वाईटू के संकट

को भी भारत ने दुनिया को उबारा है। हमारे पास हर स्तर की क्षमता है। इसकी मदद से

हम खुद को और बेहतर बनायेंगे। 130 करोड़ देशवासियों की मेहनत से हम इस कठिन

लक्ष्य को हासिल कर सकते हैं। श्री मोदी ने अपनी आंखों से कच्छ के भूकंप का भी उल्लेख

किया। जहां मलवा ही मलवा बिखरा था और लगता था कि पूरा इलाका मौत की चादर

ओढ़कर सो रहा है। लेकिन भारत ने उस स्थिति को भी अपनी संकल्प शक्ति के बदल

डाला है। इसलिए हम अगर ठान लें तो कोई चीज हासिल करना मुश्किल नहीं है। अभी की

जरूरत देश को आत्म निर्भर बनाने की है।

भारत की अर्थव्यवस्था, आधारभूत संरचना, हमारी व्यवस्थाएं, हमारी भौगोलिक स्थिति

और लोकतंत्र और डिमांड और सप्लाई चेन का इस्तेमाल यह पांच मुख्य आधार हैं, जिससे

हम आत्म निर्भरता की तरफ बढ़ सकते हैं।


 

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