अब कछुओं पर प्लास्टिक खाने से मौत का खतरा, पेट से निकला सारा कचड़ा

समुद्री जीवन के लिए काल साबित हो रहा है छोड़ा गया लावारिश प्लास्टिक

  • प्रयास के बाद भी नहीं बचा पाये डाक्टर

  • खाने की नलियों में जमा हुआ था कचड़ा

  • हर साल जा रहा अस्सी लाख टन प्लास्टिक

प्रतिनिधि
नईदिल्ली : समुद्री कछुओं के पेट से प्लास्टिक का बरामद होना अपने आप में खतरनाक संकेत है।

प्लास्टिक खाकर अनेक समुद्री जीव मर रहे हैं।

समुद्र में जा रहे लाखों टन प्लास्टिक से पूरा समुद्री जीवन ही तबाह हो रहा है।

कुछ दिन पहले मृत अवस्था में समुद्र के किनारे आये एक ह्वेल के पेट से भी टनों प्लास्टिक पाया गया था।

बाद में पता चला था कि सिर्फ प्लास्टिक खाने की वजह से ही उस ह्वेल की मौत हो गयी थी।

उस ह्वेल की पेट से प्लास्टिक के अस्सी बैग बरामद किये गये थे।

रोक नहीं होने की वजह से हर साल अस्सी लाख टन प्लास्टिक समुद्र में जा रहा है।

इनमें से सबसे ज्यादा एशिया के देशों से जाता है।

चीन, इंडोनेशिया,फिलिपिंस, वियतनाम और थाईलैंड का नाम इनमें सबसे ऊपर है।

अब समुद्र की गहराई छोड़कर विवश अवस्था में आने वाले कछुओं से भी प्लास्टिक के खतरे का पता चलता है।

इनमें से कई को बचाने की भरसक कोशिश की गयी थी लेकिन मरने के बाद यह पता चल पाया कि दरअसल प्लास्टिक की वजह से ही उनकी सारी आंतरिक नलियां अवरूद्ध हो गयी थी।

इससे वह सांस तक नहीं ले पाया। थाईलैंड में ह्वेल की मौत के बाद अब एक संरक्षित हरा कछुआ भी इसी हालत में पाया गया है।

वैज्ञानिक मान रहे हैं कि इसी प्लास्टिक की वजह से अन्य समुद्री जानवर भी तेजी से मर रहे हैं।

वह खाद्य पदार्थ समझकर प्लास्टिक को निगल लेते हैं और बाद में यही प्लास्टिक उनके लिए जानलेवा साबित हो रहा है।

कछुओं का बचाने की भरसक कोशिश की गयी

कछुओंइस बार हरा कछुआ चार जून को पूर्वी प्रांत के करीब पाया गया है।

यह कछुआ समुद्र के किनारे मरणासन्न अवस्था में पाया गया था।

उसे बचाने की पूरी कोशिश की गयी।

मौत के बाद उसकी पेट से प्लास्टिक के अलावा रबर बैंड, बैलून और अन्य ऐसे पदार्थ पाये गये, जिन्हें वह हजम नहीं कर पाया था।

इसी वजह से उनके भोजन की नलियां ही बंद हो गयी थीं और उसकी सांस अटक गयी।

विशेषज्ञ मानते हैं कि अब समुद्र के हर ऐसे संरक्षित कछुओं में से हर तीन में से एक कछुआ प्लास्टिक खाने की वजह से परेशानी में है।

जिस कारण अब समुद्र को प्लास्टिक से मुक्त करना और भी आवश्यक हो गया है।

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