fbpx Press "Enter" to skip to content

अगले माह बाजार में उतरेगी रुस में बनी कोरोना वैक्सिन

  • चुपचाप शोध करता जा रहा था रुस

  • व्यापारिक उत्पादन में थोड़ा वक्त लगेगा

  • डब्ल्यूएचओ को भी है इस वैक्सिन का इंतजार

  • क्लीनिकल ट्रायल के दो और दौर समाप्ति की ओर

प्रतिनिधि

नईदिल्लीः अगले माह रुस अपनी कोरोना वैक्सिन को बाजार में उतारने की तैयारी कर

रहा है। सबसे बड़ी बात है कि इंसानों पर इसका परीक्षण प्रारंभ होने के एक सप्ताह बाद

रुस ने औपचारिक तौर पर इसकी घोषणा की थी। रुस की इस घोषणा से पूरी दुनिया में

हलचल मच गयी है। अब लोगों तक इसकी सूचना पहुंचने के बाद नियमित तौर पर रुस

की तरफ से इस वैक्सिन परीक्षण की प्रगति की जानकारी भी दी जाने लगी है। अब तक के

अनुसंधान रिपोर्टों के आधार पर ही रुस के वैज्ञानिक यह मानते हैं कि इसे अगस्त के दूसरे

सप्ताह तक बाजार में उतारा जाना शायद संभव हो पायेगा। ऐसा इसलिए कहा जा रहा है

क्योंकि प्रथम चरण के क्लीनिकल ट्रायल में यह कोरोना वैक्सिन सफल रहा है। इसका

परीक्षण जिनलोगों पर किया गया है, उनमें कोई प्रतिकूल प्रतिक्रिया भी नहीं पायी गयी है।

सरकार द्वारा संचालित गामालेई इंस्टिट्यूट ऑफ एपिडोमोलॉजी एंड माइक्रोबॉयोलॉजी

में यह परीक्षण चल रहा है। इस शोध से रुस की सेचनेव विश्वविद्यालय भी जुड़ा हुआ है।

सेचनेव विश्वविद्यालय के शोध दल के प्रमुख एलिना स्मोलाइचूक ने इस बारे में कहा कि

पहले दौर का क्लीनिकल ट्रायल हो चुका है और उसके सारे आंकड़ों के गहन विश्लेषण चल

रहा है। प्रारंभिक तौर पर जिनलोगों को यह वैक्सिन दिये गये थे उनमें दवा का कोई

प्रतिकूल प्रभाव पड़ता हुआ नजर नहीं आ रहा है। इस कारण अब यह माना जा सकता है

कि यह कोरोना वैक्सिन इंसानों के लिए सुरक्षित है।

अगले माह के बाद व्यापारिक उत्पादन में समय लगेगा

गामालई संस्थान के निदेशक अलेकजेंडर जिंट्सबर्ग ने कहा कि वह यह उम्मीद करते हैं

कि आगामी 12 से 14 अगस्त तक औपचारिक तौर पर इस वैक्सिन को बाजार में उतारा

जा सकता है। लेकिन उन्होंने साथ में यह भी स्पष्ट कर दिया कि अगस्त में बाजार में

उतरने के बाद भी इसका व्यापारिक उत्पादन प्रारंभ करने में थोड़ा वक्त लगेगा और इस

काम को पूरा करने में एक महीने का वक्त और लग सकता है। इस बीच विश्व स्वास्थ्य

संगठन ने फिर से यह स्पष्ट कर दिया है कि किसी भी वैक्सिन को क्लीनिकल ट्रायल का

तीन चरण पूरा करना होगा। इसके सफल होने और किसी किस्म की प्रतिकूल रिपोर्ट नहीं

आने के बाद ही उसके व्यापारिक उत्पादन की अनुमति दी जाती है। डब्ल्यूएचओ जिन

वैक्सिनों की प्रगति पर नजर रख रहा है, उनमें अब रुस के इस वैक्सिन को भी शामिल कर

लिया गया है। पहले इस सूची में रुस के वैक्सिन का नाम नहीं था क्योंकि रुस की तरफ से

कोरोना वैक्सिन पर कुछ काम होने की औपचारिक जानकारी भी नहीं दी गयी थी। वैसे इस

प्रथम परीक्षण के बारें में यह स्पष्ट किया गया है कि क्लीनिकल ट्रायल में शामिल कुछ

स्वयंसेवकों को इंजेक्शन दिये जाने के बाद सरदर्द, शरीर का तापमान बढ़ना जैसी

शिकायतें हुई थी लेकिन 24 घंट के भीतर ही सब कुछ सामान्य हो गया था। रुस का

स्वास्थ्य मंत्रालय भी इस अनुसंधान पर नजर रखे हुए हैं। इसलिए सारी रिपोर्ट आने के

बाद इसकी कार्यकुशलता के बारे में मंत्रालय की तरफ से कोई फैसला लिया जाएगा।

अगले चरण के लिए स्वयंसेवकों को पहले से किया तैयार

मिली जानकारी के मुताबिक प्रथम चरण के क्लीनिकल ट्रायल में शामिल किये गये

स्वयंसेवकों के पहले समूह को कल यानी 15 जुलाई को अस्पताल से छोड़ा जाएगा। दूसरे

समूह को 20 जुलाई को छोड़ने का फैसला हुआ है। कोरोना वैक्सिन के इस क्लीनिकल

ट्रायल के दौरान यह सभी लोग 28 दिनों तक दूसरों से बिल्कुल अलग थलग रह रहे थे।

ऐसा उन्हें दूसरे किस्म के संक्रमण से बचाने के लिए किया गया था। इस प्रथम चरण के

क्लीनिकल ट्रायल में शामिल सभी लोग 18 से 65 आयु वर्ग के थे। यहां से छोड़े जाने के

बाद भी अगले छह माह तक उनकी नियमित देखभाल की जाएगी। अब जाकर यह

जानकारी भी सार्वजनिक हुई है कि इस प्रथम बैच के 18 स्वयंसेवकों पर 18 जून को

परीक्षण किया गया था जबकि दूसरे समूह के 20 लोगों को 23 जून को वैक्सिन के

इंजेक्शन दिये गये थे। अब तक दोनों ही समूहों के लोग पूरी तरह ठीक हैं इसलिए अब

दूसरे और तीसरे चरण के परीक्षण के स्वयंसेवकों को तैयार किया जा रहा है।


 

Spread the love
  •  
  •  
  •  
  •  
  •  
  •  
  •  
  •  
  •  
  •  
  •  
More from कोरोनाMore posts in कोरोना »
More from ताजा समाचारMore posts in ताजा समाचार »
More from रुसMore posts in रुस »
More from विश्वMore posts in विश्व »

One Comment

Leave a Reply

error: Content is protected !!