‘अगर ताज महल की उचित देखरेख संभव नहीं तो उसे ढहा दिया जाये’

उच्चतम न्यायालय ने आगरा के ऐतिहासिक ताज महल को संरक्षित करने के केन्द्र और उत्तर प्रदेश सरकारों के तरीकों पर गहरी नाखुशी जाहिर करते हुए कहा है कि अगर उसकी उचित देखरेख नहीं संभव है तो उसे ढहा दिया जाये।

न्यायमूर्ति मदन बी लोकुर की अध्यक्षता वाली खंड पीठ ने ताज महल के उचित रखरखाव संबंधी एक याचिका पर सुनवाई करते हुए यह टिप्पणी की। न्यायालय ने कहा, “या तो हम ताज महल को बंद कर दें अथवा आप उसे ढहा दीजिए या फिर उसकी उचित देखरेख कीजिए।”

शीर्ष अदालत ने ताज महल के रखरखाव को लेकर गहरी नाखुशी जाहिर करते हुए कहा, “ ताज महल एफिल टॉवर से ज्यादा खूबसूरत है और यह देश की विदेशी मुद्रा संबंधी समस्या का समाधन कर सकता है लेकिन उसकी वर्तमान स्थिति और दशा दयनीय है। इसका संरक्षण, सुरक्षा और रखरखाव जिस तरीके से किया जा रहा है उससे ताज महल की दशा बिगड़ती जा रही है।

न्यायालय ने कहा, “ एफिल टॉवर काे देखने आठ करोड़ लोग देखने जाते हैं। हमारा ताज महल उससे ज्यादा खूबसूरत है। यदि आप इसकी उचित देखरेख करें तो आपकी विदेशी मुद्रा की समस्या का समाधान हो सकता है। ”
उच्चतम न्यायालय ने उत्तर प्रदेश सरकार की खिंचाई करते हुए कहा कि वह ताज महल को संरक्षित और सुरक्षित करने से संबंधित दृष्टि पत्र प्रस्तुत करे। न्यायालय ने केन्द्र सरकार से भी कहा कि वह इस संबंध में अपना विवरण पेश करे।

न्यायालय ने ताज ट्रेपेजियम जोन के अध्यक्ष से कहा कि वह जोन में औद्योगिक इकाइयों के विस्तार पर रोक लगाने के उसके आदेश के उल्लंघन के बारे में जानकारी दें। इस मामले में 31 जुलाई से नियमित सुनवाई होगी।
गौरतलब है कि मई में न्यायालय ने कहा था कि ताजमहल पीला पड़ रहा है और अब वह प्रदूषण के कारण भूरा और हरा हो रहा है।

मुगल बादशाह शाहजहां की बेगम मुमताज महल की याद में सत्रहवीं शताब्दी में बनाया गया ताज महल दुनिया के सात अजूबों में शामिल है। इसे देखने के लिए दुनिया भर से लाखों लोग प्रतिवर्ष आगरा जाते हैं। यूनेस्को ने इसे विश्व धरोहर की सूची में शामिल किया है।

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