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अंतरिक्ष के सबसे कम उम्र के अजीबोगरीब तारे से मिलिए

  • न्यूरॉन का यह तारा सिर्फ 240 साल पुराना है

  • एक्स रे किरणों का जबर्दस्त विकिरण करता है

  • इसके एक चम्मच का वजन चार बिलियन टन

  • गामा रे विस्फोट भी करने वाला नन्हा सा टुकड़ा

प्रतिनिधि

नईदिल्लीः अंतरिक्ष के अजीब से और सबसे कम उम्र के तारे की हरकतों ने वैज्ञानिकों को

हैरान कर रखा है। यूं तो हमारी धरती पर 240 साल काफी अधिक वक्त होता है लेकिन

अंतरिक्ष के हिसाब से यह बहुत ही छोटी अवधि है। इस नन्हें और नवजात तारे को इसी

साल मार्च में खोजा गया था। उसके बाद से लगातार वह इस पर नजर रखने वाले

वैज्ञानिकों को हैरान कर रहा है। जब इस तारे से एक्स रे किरणों का जबर्दस्त विस्फोट

हुआ था तभी यह वैज्ञानिकों की नजर में आ पाया था। वरना आकार में इतने छोटे तारे की

तरफ किसी का ध्यान नहीं जाता है। इसका नाम स्विफ्ट जे 1818 -1607 रखा गया है।

यूरोपीय स्पेस एजेंसी और नासा के वैज्ञानिकों ने लगातार इस पर ध्यान रखा है। इसी

वजह से उनकी गतिविधियों के प्रति वैज्ञानिकों की रूचि दिनोंदिन बढ़ती ही जा रही है।

शोध के आंकड़ों के विश्लेषण से इस बात की जानकारी मिली है कि इसका गुरुत्वाकर्षण

अपनी किस्म के अन्य तारों से एक हजार गुणा अधिक है। ऐसा क्यों है, इस बारे में अभी

वैज्ञानिक किसी निष्कर्ष पर नहीं पहुंच पाये हैं। इसके गुरुत्वाकर्षण के संबंध में वैज्ञानिकों

ने बताया है कि आम तौर पर इंसानों द्वारा बनाये गये किसी चुंबक के मुकाबले भी इसकी

शक्ति एक सौ गुणा अधिक है। इसलिए समझा जा सकता है कि पृथ्वी के किसी भी

चुंबकीय आकर्षण वाले वस्तु को यह आसानी से अपनी तरफ खींच सकता है।

अंतरिक्ष में अजीब से तारे की क्षमता अद्भूत

अंतरिक्ष में काफी दूर होने के बाद भी वहां से गुजरने वाले ऐसे चुंबकीय आकर्षण वाले

पदार्थ और सौर अणु उसकी तरफ खींचे जाते हैं। इंस्टिट्यूट ऑफ स्पेस साइंस बार्सिलोना

के मुख्य शोधकर्ता नंदा रे ने इस बारे में कहा कि यह अन्य न्यूरॉन तारों के मुकाबले

एकदम भिन्न है। अंतरिक्ष पर नजर रखने वाले टेलीस्कोपों में भी लगातार इसकी

अजीबोगरीब हरकतें दर्ज की जा रही है।

आम तौर पर ऐसे तारों का निर्माण किसी तारों के विस्फोट के बाद होता है। किन्हीं कारणों

से किसी सुपरनोवा के दौरान जो टुकड़े बच जाते हैं उनके यह न्यूरॉन तारों का निर्माण

होता है। यह जान लेना जरूरी है कि इस किस्म की तारों का वजह पृथ्वी के मुकाबले काफी

अधिक होता है। सामान्य वैज्ञानिक गणना के मुताबिक एक चम्मच ऐसे पदार्थ का वजन

पृथ्वी के चार बिलियन टन के बराबर होगा, ऐसा वैज्ञानिकों का अनुमान है। इस वजह से

आकार में काफी छोटा होने के बाद भी उसकी ताकत को कमतर नहीं आंका जा सकता है।

नासा की विज्ञप्ति के मुताबिक यह आकार में इतना छोटा होने के बाद भी तुलनात्मक तौर

पर हमारे सूर्य से दो गुणा अधिक घनत्व का पदार्थ रखता है। लेकिन यह आकार में क्षुद्र है।

इसी वजह से उससे अब गामा रे का विकिरण होता हुआ भी दिखने लगा है, जो वैज्ञानिकों

को अचरज में डाल रहा है। उल्लेखनीय है कि अंतरिक्ष में यह गामा रे ही सबसे अधिक

ऊर्जा का स्रोत समझा जाता है। इस नन्हे तारे को मिलाकर अब तक सिर्फ पांच ऐसे

मैग्नेटर तारों की पहचान हुई है, जो ऐसी क्षमता रखते हैं। इस किस्म के न्यूट्रॉन तारों की

संख्या भी करीब तीन ह जार है लेकिन इस नये मैग्नेटर को मिलाकर 31 मैग्नेटर किस्म

के हैं।

इस पर अभी लगातार नजर रखने की जरूरत है

इस बार में मांट्रिल के मैकगिल विश्वविद्यालय के स्पेस इंस्टिटियूट के निदेशक

विक्टोरिया कास्पी का कहना है कि हर बार यह हैरान करने वाली हरकतें कर रहा है और

इस पर लगातार नजर रखने की जरूरत निश्चित तौर पर महसूस की जा रही है। इस बारे

में अभी खगोलीय संस्थानों के वैज्ञानिक और आंकड़े जुटा रहे हैं ताकि इसके बारे में और

निश्चित तौर पर कोई ठोस जानकारी दी जा सके।


 

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