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नासा का यान इनसाइड लैंडर ने बताया मंगल ग्रह पर धरती कंपन का विवरण




  • मंगल ग्रह की भी धरती कांपने का आंकड़ा दर्ज हुआ
  • इस अंतरिक्ष यान में लगे हैं उपकरण
  • अंदर की गड़गड़ाहट की रिकार्डिंग आयी
  • आंकड़ों के गहन विश्लेषण का काम जारी

प्रतिनिधि

नईदिल्लीः नासा के अंतरिक्ष यान इनसाइड लैंडर ने मंगल ग्रह पर कंपन दर्ज किये हैं।

पृथ्वी पर होता तो इसे भूकंप कहा जाता।

मंगल ग्रह पर ठीक ऐसे की प्रभाव के लिए मंगलकंप कोई शब्द बना नहीं है।

लिहाजा इसे कंपन कहना ही ठीक होता।

यानी नासा के यान ने मंगल ग्रह पर मंगलकंपन महसूस किया है।

इसके आंकड़े यान के माध्यम से पृथ्वी तक पहुंचे हैं।

इस क्रम में जो नासा ने ऑडियो फाइल जारी की है, उसमें जमीन के अंदर से

अचानक गड़गड़ाहट की आवाज दर्ज की गयी है। नासा ने इस बारे में एक विज्ञप्ति जारी की है।

नासा के वीडियो में देखें कैसे होते हैं मंगल ग्रह पर कंपन

नासा के इस यान में इस किस्म के संकेतों को पकड़ने के लिए भी अत्याधुनिक उपकरण लगे हुए हैं।

इन्हीं उपकरणों की मदद से गत छह अप्रैल को मंगल ग्रह पर इस किस्म की हलचल के आंकड़े दर्ज किये गये हैं।

वहां से प्राप्त आंकड़ों और ध्वनि संकेतों को सुनने तथा समझने के बाद नासा ने इन्हें सार्वजनिक किया है।

अब तक का अनुमान है कि जो गड़गड़ाहट दर्ज की गयी है, वह मंगल ग्रह के अंदर की आवाज है।

इससे समझा जा सकता है कि उस ग्रह पर भी पृथ्वी के भूकंप जैसी परिस्थितियां पैदा होती हैं।

वैसे नासा ने पृथ्वी के भूकंप और वहां के कंपन के अलग अलग कारणों को भी स्पष्ट कर दिया है।

पृथ्वी के टेक्टोनिक प्लेटों की तरह मंगल ग्रह पर कोई संरचना नहीं है।

पृथ्वी पर इन्हीं प्लेटों की रगड़ की वजह से भूकंप पैदा होते हैं।

मंगल पर इसके दूसरे कारणों की व्याख्या की गयी है।




 

नासा के इस अंतरिक्ष यान में सेस्मिक एक्सपेरिमेंट फॉर इंटिरियर स्ट्रक्चर (एसइआइएस) उपकरण लगाया गया था।

इसी उपकरण ने यह आंकड़े दर्ज किये हैं। जो आवाज दर्ज की गयी है वह मंगल ग्रह पर हवा की सनसनाहट नहीं है।

वह जमीन के अंदर से आने वाली आवाज है।

इन उपकरणों ने कुल तीन बार इन संकेतों को पकड़ा है।

वैसे उपकरणों के मदद से जो ध्वनि संकेत पकड़े गये हैं,

वे आम इंसानी कान की पकड़ में आने वाले संकेत नहीं है।

नासा ने जारी की मंगलकंपन की ऑडियो रिकार्डिंग

इस मंगल शोध दल के प्रमुख ब्रूस बैनेरड्ट ने कहा कि वैज्ञानिकों के लिए भी यह बिल्कुल नई बात है।

लिहाजा कैलिफोर्निया के जेट प्रोपल्सन प्रयोगशाला में इस पर अब काम प्रारंभ किया जा रहा है।

वैसे वैज्ञानिक दल के नेता ने स्पष्ट कर दिया है कि यह आंकड़े इतने कम हैं कि

इस पर कोई ठोस निष्कर्ष नहीं निकाला जा सकता है।

गत वर्ष 19 दिसंबर को मंगल ग्रह पर सफलतापूर्वक उतरने के बाद यह नासा का यान लगातार नये नये अनुसंधान कर रहा है।

वह वहां की जमीन और आंतरिक सतह का अध्ययन कर उसके आंकड़े प्रयोगशाला तक भेज रहा है।

इन अनुसंधानों की खास वजह वहां जीवन की संभावना तलाशने के साथ साथ

सौर मंडल में मंगल ग्रह सहित अन्य ग्रहों की रचना कैसे हुई,

इसके रहस्य को और बेहतर तरीके से समझना है।

सौर जगत की संरचना के बारे में वैज्ञानिकों को हर रोज नई नई जानकारी मिल रही है।

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