Press "Enter" to skip to content

तनाव और उसके नुकसान से कैसे बचाव करते हैं पेड़ और पौधे




  • पेड़ पौधे आपस में परमाणु स्तर पर संदेश भेजते हैं

  • इंसानों को भी तनाव से होता है नुकसान

  • पेड़ पौधे आपसी संवाद से इसे संभालते हैं

  • पेड़ों को पर्यावरण से होता है ऐसा तनाव

प्रतिनिधि

नईदिल्लीः तनाव हमलोगों के जीवन का अभिन्न अंग बन चुका है।

इस पर एक बहुत पुरानी कहावत है कि

जो तनाव और चिंता से मुक्त हैं वह या तो साधु है अथवा पागल है।

दैनंदिन जीवन के तनाव का नुकसान भी हमें उठाना पड़ता है।

इस बात को जानते हुए भी हम कई अवसरों पर खुद को रोक नहीं पाते और नुकसान उठा लेते हैं।

खास तौर पर उच्च रक्तचाप के मरीजों को इससे सबसे अधिक नुकसान उठाते हुए देखा जा सकता है।

वैज्ञानिकों ने इस बात की तलाश की है कि पेड़-पौधों को भी तनाव होता है।

लेकिन वह आम इंसानों की तरह इससे नुकसान नहीं उठाते बल्कि अपने तरीके से इससे बचाव कर लेते हैं।

रोचक तथ्य यह है कि वैज्ञानिकों ने निरंतर शोध के दौरान उस कड़ी को भी खोज निकाला है, जिसके जरिए यह काम होता है।

प्रोसिडिंग्स ऑफ नेशनल एकाडेमिक्स ऑफ साइंसेज (पीएनएनएएस) की रिपोर्ट में इसका विस्तार से वर्णन किया गया है।

इसमें बताया गया है कि पेड़-पौधे क्लोरोप्लास्ट से न्यूक्लियस संदेश के माध्यम से तनाव को नियंत्रित किया करते हैं।

उन्हें भी तनाव विभिन्न कारणों से होता है।

अत्यधिक तनाव होने की स्थिति में इंसान की तरह पेड़ों को भी नुकसान होने लगता है।

उस स्थिति में वे अपने तरीके से इससे बचाव कर पाते हैं।

तनाव होने पर आपदा संदेश भेजते हैं पेड़ पौधे

आपसी संदेश के माध्यम से यह सुक्ष्म संपर्क उन्हें शांत होने तथा नुकसान की भरपाई करने में मदद करता है।

इस बात की जानकारी मिलने के बाद अब वैज्ञानिक इस दिशा में प्रयासरत हैं कि

वैसे पौधे प्रयोगशाला में पैदा किये जाएं जो इन क्षमताओं से बेहतर तरीके से लैश हों।

इससे जहां उन्हें रोपा जाएगा, वहां के वातावरण को बेहतर बनाने में

यह पौधे अधिक मददगार साबित होंगे।

अनुसंधान में पाया गया है कि अनेक क्लोरोप्लास्ट से न्यूक्लियस संकेत उन इलाकों को ठीक होने में मदद पहुंचाते हैं, जहां के क्लोरोप्लास ही क्षतिग्रस्त हो चुके हैं।

इन बाहरी संकेतों से क्षतिग्रस्त इलाके में फिर से प्रोटिन बनने की प्रक्रिया प्रारंभ हो जाती है और पेड़ फिर से ठीक होने लगता है।

शोध के दौरान पेड़ पौधे के तनाव का भी विश्लेषण किया गया है।

यह पाया गया है कि उनके तनाव शुद्ध तौर पर पर्यावरण और माहौल से जुड़े होते हैं।

यही वजह है कि जब कभी कम बारिश होती है तो फसल भी कम उगती है।

इस बात को समझ लेने के बाद वैज्ञानिक वैसी प्रजाति तैयार करना चाहते हैं

तो इन तनावों को झेल सके।

उन्नत फसल कम बारिश में भी अधिक उपज देगी

इसके सफल होने पर अल्पवर्षा में भी फसल की उपज कम नहीं होगी।

इससे दुनिया के खाद्य संकट का एक बहुत बड़ा समाधान हो पायेगा।

अनुमान है कि तनाव मुक्त होने पर ऐसे पौधे अधिक फसल भी देंगे

तो खाद्य उत्पादन को और बढ़ा सकेगा।

इस पूरी प्रक्रिया को समझने के लिए वैज्ञानिकों ने बताया है कि सूर्य की रोशनी से ऊर्जा हासिल करने के बाद पेड़ों में मौजूद क्लोरोप्लास्ट ही उन्हें ऊर्जा में बदलता है।

इस प्रक्रिया को वैज्ञानिक परिभाषा में फोटो सिंथेसिस कहा जाता है।

यह सामान्य परिस्थिति में क्लोरोप्लास्ट का काम होता है।

लेकिन यह पाया गया है कि जब संकट की स्थिति होती है तो यही क्लोरोप्लास्ट आपदा संकेत जारी करता है।

इस संकेत को पकड़ते ही अन्य क्लोरोप्लास्ट उस हिस्से की मदद से लिए संकेत भेजने लगते हैं।

इस दौरान दोनों पक्षों से द्विपक्षीय संवाद स्थापित रहता है।

दूसरे क्लोरोप्लास अपने हिस्से से ऊर्जा उत्पादन बढ़ाते हुए इस क्षतिग्रस्त हिस्से तक पहुंचाने लगते हैं।

इससे क्षतिग्रस्त इलाका जल्दी ठीक हो जाता है।

यानी सामान्य काम के अलावा भी आपदा के मौके पर ऐसे क्लोरोप्लास्ट अतिरिक्त ऊर्जा का उत्पादन कर सकते हैं।

अब इसी तकनीक को और उन्नत बनाने पर काम हो रहा है।

विज्ञान की कुछ अन्य रोचक खबरें



Spread the love
  •  
  •  
  •  
  •  
  •  
  •  
  •  

3 Comments

Leave a Reply

Mission News Theme by Compete Themes.