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रेड मड पांड हादसे के बाद नाराज ग्रामीणों के पास पहुंचे सुदेश महतो

सिल्ली: रेड मड पांड हादसे के बाद प्रबंधन द्वारा प्रभावित लोगो की सुध नही लेने से नाराज ग्रामीणों के पास पहुंचे सुदेश महतो।

रेड मड पांड हादसे के 6 दिन बीत जाने के बाद भी हिंडाल्को के कोई अधिकारी और न ही कोई जनप्रतिनिधि प्रभावित ग्रामीणो की सुध लेने पहुंचा।

आखिर अपना दुख दर्द बयां करे तो किसे करे।

मुरी कोकोराना कुसमाटांड़ के ग्रामीण काफी नाराज थे इस संबंध में ग्रामीणों के साथ सुदेश महतो ने बैठक की

उन्होंने लोगों को स्पष्ट कहा कि किसी भी प्रकार की समस्याओ को नजरअंदाज नही किया जायेगा।

ग्रामीणो ने आरोप लगाया कि घटना के इतने दिनों के बाद भी किसी प्रकार की सुध नही ली।

इस टोला में लगभग 20 परिवार रहते हैं सुदेश महतो ने कहा घटना से प्रभावित गांव में हिण्डालको प्रबंधन द्वारा जो भी मुलभुत समस्या है उसकी शीघ्र ही निजात दिलाने के लिए प्रबंधन मिलकर बात की जायेगी।

बैठक स्थल में हिण्डालको एचआर राकेश तिग्गा को ग्रामीणों के समक्ष बुलाया एवं ग्रामीणो की समस्याओ से अवगत कराते हुए कहा कि शीघ्र ही डोर टू डोर मेडिकल कैंप एवं पानी की व्यवस्था करने को कहा।

वही प्रबंधन ने ग्रामीणो का आश्वस्त करते हुए कहा कि किसी भी समस्याओं को अनदेखा नहीं किया जाएगा।

इसके बाद प्रभावित गांव मारदु के ग्रामीणो के साथ बैठक हुई।

बैठक में ग्रामीणों ने रविवार को हिण्डालको प्रबंधन के ढ़ुल मुल रवैये के कारण मलवा उठाने के कार्य को लगभग 3 घंटे तक रोक दिया था।

बाद में सुदेश महतो ने ग्रामीणो से कहा कि किसी भी समस्याओ को बैठकर सुलझाने का प्रयास करेंगे।

मलवा हटाने के कार्य मे सहयोग करने की अपील की।

जिससे बरसात से पूर्व कार्य को पुरा कर लिया जाये।

ताकि आमजनों को बरसात में परेशानियों का सामना न करना पड़े।

रेड मड पंड का मलवा उठाने का काम हुआ तेज

इधर रेड मड परिसर में मड उठाने का कार्य में तेजी लाया गया है।

दो दिन से ब्रेकडाउन पोकलेन की मरम्मत कर ली गई है।

कार्य स्थल पर बिजली की व्यवस्था की गई है जिससे रात में भी कार्य को किया जा सके ।

ज्ञात हो कि रेड मड पांड हादसे से सब स्टेशन पर लगे 11000 वोल्टेज ट्रांसफॉर्मर क्षतिग्रस्त हो गया था

जिसके बाद उसको दुरस्त करने के लिए बड़े क्रेन मंगाये गये है।

जिसे हटाकर नये ट्रांसर्फमर को जल्द लगाया जाये ताकि पुन: बिजली बहाल हो सके।

बेकार बैठे हैं एनडीआरएफ की टीम हिंडालको रेड मड स्थल में हुए घटना के सातवें दिन बेकार बैठे है।  टीम को किस वजह से यह रखा गया है यह भी बताने इंकार कर रहे है।

टीम को रेड मड पांड पर कार्य करने का अनुभव नही।

टीम के एएसआई बीएस मंडल ने बताया कि हम लोगो की यहां किसी प्रकार की आवश्यकता नही है।

फिर भी उच्च अधिकारियो के आदेश का पालन कर रहे है।

वही एनडीआरएफ की टीम घटनास्थल के कुछ दूरी पर टेंट पर बैठकर समय बिता रहे हैं ।

इधर हिंडालको प्रबंधन ने कंपनी में कार्यरत तीनों शिफ्ट में उत्पादन विभाग के कर्मचारियों को अपने पंचिंग करने के बाद रेड मड स्थल पर रहने का आदेश दिया है।

जिससे कार्य स्थल पर तेजी ला सकें।

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