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सूर्य में हो रही प्लाज्मा किरणों की बारिश का पता पार्कर सोलर प्रोव से चला

  • दुनिया भर के वैज्ञानिक इस पहेली को सुलझाने में जुटे

  • गोडार्ड स्पेस फ्लाइट सेंटर में की थी खोज

  • लाखों मील तक फैली क्षेत्र तक फैलती है

  • गैस बनकर उड़ती नहीं बल्कि लौट आती है

प्रतिनिधि

नईदिल्लीः सूर्य में प्लाज्मा किरणों की निरंतर हो रही बारिश को कैमरे में कैद किया गया है।

अभियान पर भेजे गये नासा के अंतरिक्ष यान पार्कर सोलर प्रोव ने इस दृश्य को अपने कैमरे में कैद किया है।

नीचे से ऊपर की तरफ उठती तरंगों के बीच इनका बारिश की तरह फिर से सूर्य की सतह पर आना वैज्ञानिकों के लिए एक नई पहेली है।

अब नासा सहित दुनिया भर के वैज्ञानिक इसके कारणों को समझने की कोशिश कर रहे हैं।

वहां चल रही सौर आंधियों के बारे में दुनिया को पता था

नासा के गोडार्ड स्पेस फ्लाइट सेंटर के केंद्र में पिछले मध्य 2017 से नियमित आने वाली

एमिली मेसन ने अपनी कंप्यूटर को खोलकर वहां सूर्य के बारे में आने वाली तस्वीरों को

देखने का एक अभ्यास सा बना लिया था।

अक्टूबर 2017 में जब उनकी नजर तस्वीर पर पड़ी तो वह चौंक गयी थी।

उन्हें पहली बार सूर्य की वह तस्वीर दिखी थी, जिसके बारे में वैज्ञानिकों को अंदाजा था

लेकिन उसके बारे में जानकारी अथवा तथ्य नहीं थे

तस्वीरों में लाखों मील की लंबी चुंबकीय तरंगों के बीच सूर्य की प्लाज्मा किरणों की बारिश के आंकड़े दर्ज हुए थे।

उसी समय से वैज्ञानिकों ने दुनिया को यह बताया था कि सूर्य के अंदर भयानक किस्म की

सौर आंधी का दौर चल रहा है ।

अब नासा का पार्कर सोलर प्रोव अपने अभियान के तहत इस स्थिति को कैद कर चुका है।

इसमें सूर्य की धरती से ऊपर तक उछलती प्लाज्मा किरणों को देखा जा सका है।

अनुमान है कि यह किरणें हजारों मील की ऊंचाई तक जाती हैं और फिर सूर्य में बारिश की तरह बरस रही हैं।

इसके बीच सूर्य से गैस के उत्सर्जन का क्रम तेज हो गया है।

इस स्थिति का पता चलने के बाद वैज्ञानिक उस पहेली को भी समझने की कोशिश कर रहे हैं कि

सूर्य की आंख, जिसे कोरोना कहते हैं, सूर्य के अन्य हिस्सों के मुकाबले अधिक गर्म क्यों हैं।

प्लाज्मा किरणों की इस बारिश को कोरोनल रेन कहा गया है।

सूर्य की इस अनोखी बारिश का वीडियो यहां देखें

इससे अब सूर्य के साथ साथ इस सौर मंडल के दो अनसुलझे रहस्यों का भी खुलासा होने की उम्मीद बढ़ गयी है।

पृथ्वी पर जब बारिश होती है तो बादल से पानी पृथ्वी की सतह पर आता है।

पानी बरसने के बाद वह फिर से गर्मी में भाप बनकर बादल बनकर फिर से बरसने के लिए चला जाता है।

यही पृथ्वी पर बारिश का चक्र है।

बारिश के होने से पृथ्वी का तापमान पानी के अपने गुण की वजह से घट जाता है।

सूर्य में यह बारिश पानी के बदले प्लाज्मा किरणों की हो रही है।

वैज्ञानिक इस नतीजे पर पहुंचे हैं कि यह प्लाज्मा किरणों सूर्य के चुंबकीय इलाके पर

लाखों मील दूर तक फैली हुई है।

नासा के केंद्र ने ऐसे भी देखा है इसी बारिश को

पानी की तरह यह ठंडा नहीं है बल्कि इन प्लाज्मा किरणों का तापमान भी लाखों डिग्री फारेटहाइट तक का है।

सूर्य की चुंबकीय परिधि के अंतिम छोर पर पहुंचने के बाद यह दोबारा ठंडा होता है

और सूरज के ऊपर फिर से बरस जाता है।

इस जांच के क्रम में यह बात भी सामने आय़ी है कि सूरज की सतह के मुकाबले

उसका बाहरी हिस्सा तीन सौ गुणा अधिक गर्म है।

पहले यह समझा गया था कि शायद अत्यधिक गर्मी के बाद चुंबकीय क्षेत्र की

सबसे अधिक ऊंचाई पर पहुंचने के बाद यह गैस में तब्दील होकर सौर मंडल में बाहर निकल जाता है।

परीक्षण में पाया गया है कि प्लाज्मा किरणों के साथ ऐसा नहीं होता है।

वे ठंडा होने के बाद दोबारा सूर्य पर ही वापस लौट रहे हैं।

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