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ब्लैक होल दिखने में हमारे सांभर बड़ा के जैसा ही है

  • इवेंट हॉरिजन टेलीस्कोप ने दिये आंकड़े

  • इलेक्ट्रो मैगनेटिक तरंगों से किया पता

  • सोशल मीडिया पर आकार पर हंसी

  • कैटी बाउमैन के प्रोग्राम से हुआ विश्लेषण

प्रतिनिधि

नईदिल्लीः ब्लैक होल कैसा है, इसके बारे में अब हर कोई एक सामान्य समझ रख सकता है।

वैज्ञानिक इसके लिए लगातार प्रयास कर रहे थे।

खास इसी काम के लिए एक खास दूरबीन इवेंट हॉरिजन टेलीस्कोप को काम में लगाया गया था।

इसके अलावा भी दुनिया के सात अन्य दूरबीन अपने अपने स्तर पर ब्लैक होल संबंधी आंकड़े उपलब्ध करा रहे थे।

इन तमाम आंकड़ों के संकलन के बाद ब्लैक होल के आकार का एक मॉडल तैयार किया जा सका है।

वैसे वैज्ञानिकों ने इसकी तस्वीर भी ली है।

अब वैज्ञानिक तथ्यों के आधार पर यह कहा जा सकता है कि यह दरअसल अंतरिक्ष के मेसियर 87 के इलाके में है।

अनुमान के मुताबिक यह पृथ्वी से 540 लाख प्रकाश वर्ष की दूरी पर है।

इसके बारे में हुए खुलासा को नासा ने एक क्रांतिकारी उपलब्धि बताया है।

वैज्ञानिकों को पहले से ही इसके अस्तित्व का पता तो था लेकिन यह वास्तव में किस आकार का है, इसका कोई अंदाजा नहीं लग पाया था।

दरअसल इसके प्रचंड गुरुत्वाकर्षण की वजह से रोशनी भी यहां से वापस नहीं लौट पाती थी।

ब्लैक होल पर पिछले दो साल से लगातार काम चल रहा था

पिछले दो वर्षों से इसके आकार को तय करने पर लगातार शोध चल रहा था।

जिसका अब जाकर नतीजा सामने आ पाया है।

यह भारतीय नजरिए से देखने में सांभर बड़ा के जैसा ही है।

दरअसल आंखों से और दूरबनी से यह अब भी नहीं नजर आया है।

वैज्ञानिकों ने इसके लिए इलेक्ट्रो मैगनेटिक तरंगों का इस्तेमाल किया है।

तब जाकर इसके आकार प्रकार के बारे में इतनी सारी जानकारी मिल पायी है।

इस इलाके में अत्यंत लंबे रेडियो तरंग पाये गये हैं।

वैज्ञानिक इन्हीं आंकड़ों के आधार पर यह निष्कर्ष निकालने में सफल हुए हैं कि इसके काफी नजदीक जाने पर इसके बाहरी छोर पर हल्की रोशनी नजर आती है।

जो दरअसल में टूटते तारों का झूंड और तारों के विखंडन से उत्पन्न सौर धूल की आंधी भर है।

इस बार ब्लैक होल का पता लगाने के लिए खगोल वैज्ञानिकों ने एक साथ कई टेलीस्कोपों का इस्तेमाल किया

क्योंकि किसी एक से इसे पकड़ पाना संभव ही नहीं था।

सैकड़ों हार्ड डिस्क में दर्ज किये आंकड़े

सभी टेलीस्कोप जब एक साथ इसके रेडियो तरंगों के आंकड़े संकलित करने लगे, तब जाकर इस बारे में कुछ नई जानकारी सामने आयी है।

अंतरिक्ष से आने वाले अनगिनत तरंगों के बीच इस इलाके के तरंगो को अलग करना कोई आसान काम नहीं था।

वैज्ञानिकों ने अत्यंत धैर्य के साथ इस काम को अंजाम दिया।

सुनने में यह भले ही काफी छोटा लगे लेकिन इन सारे आंकड़ों को संकलित और विश्लेषण करने में कंप्यूटर का काफी अधिक स्थान लगा है।

इस बारे में आयोजित एक संवाददाता सम्मेलन में इस बात की जानकारी दी गयी है कि तीन दिनों के तस्वीरों के आंकड़े करीब 5 पिटावाइट के आकार में हैं।

इन्हें सैकड़ों की संख्या में रखे हार्ड ड्राइव में संरक्षित किया गया है।

दरअसल यह सारे आंकड़े अलग अलग टेलीस्कोप के हैं।

जिन्हें बाद में एक स्थान पर विश्लेषण के लिए भेजा गया था।

ब्लैक होल की तस्वीर आयी तो कैटी बाउमैन भी चर्चा में आयी

ब्लैक होल की यह पहली तस्वीर सामने आती ही केटी बाउमैन भी चर्चा में आ गयी हैं।

दरअसल वह एमआइटी की स्नातक हैं, जो इन तमाम आंकड़ों के विश्लेषण से जुड़ी हुई थीं।

उन्होंने इसके लिए खास तौर पर एक कंप्यूटर प्रोग्राम भी बनाया था।

जिसकी मदद से यह काम कर पाना संभव हो पाया।

वैसे इस पहली तस्वीर के सामने आने के बाद लोगों ने सोशल मीडिया पर इसका आनंद भी उठाया है।

यह देखने में एक गोलाकार सा नजर आता है, जिसके अंदर का भाग नहीं दिखता पर उसके चारों तरफ रोशनी नजर आती है।

इस आकार को देखकर लोगों ने इसे खाने का एक सामान्य आकार अथवा पहले कई फिल्मों में दिखाये गये दृश्यों को याद किया है।

लेकिन अंततः ब्लैक होल की संरचना की एक तस्वीर अब हमारे सामने है।

 

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One Comment

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